63 बार निकासी, पत्नी के खाते में ट्रांसफर, अब राज्यभर में जांच
Ranchi : झारखंड एक बार फिर सरकारी खजाने (ट्रेजरी) से अवैध निकासी (Jharkhand treasury scam) के गंभीर मामलों को लेकर सुर्खियों में है। बोकारो में करोड़ों की ट्रेजरी गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद अब हजारीबाग से भी बड़े स्तर पर संदिग्ध लेन-देन की खबर ने प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया है। शुरुआती जांच से संकेत मिल रहे हैं कि यह केवल अलग-अलग जिले की घटनाएं नहीं, बल्कि एक व्यापक प्रणालीगत खामी का हिस्सा हो सकती हैं।
बोकारो से खुली परत: 25 महीने में 63 बार निकासी
बोकारो में सामने आए मामले ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी। जांच में पाया गया कि एक सेवानिवृत्त हवलदार के नाम पर वेतन मद से 25 महीनों में 63 बार निकासी की गई। नवंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच यह राशि 3.15 करोड़ से बढ़कर 4.29 करोड़ 71 हजार 7 रुपये तक पहुंच गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित हवलदार 2016 में ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। इसके बावजूद उनके नाम से भुगतान जारी रहा। e-Kuber DDO लेवल बिल मैनेजमेंट सिस्टम पर पड़ताल के दौरान फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
पूछताछ में लेखापाल कौशल कुमार पाण्डेय ने स्वीकार किया कि उन्होंने पोर्टल में जन्मतिथि और अन्य विवरणों में बदलाव कर इस फर्जी निकासी को अंजाम दिया। यह राशि उनकी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी। मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
हजारीबाग में नया संदेह: बड़ी राशि की आशंका
बोकारो कांड के तुरंत बाद हजारीबाग ट्रेजरी से भी संदिग्ध लेन-देन का मामला सामने आया है। एसपी अंजनी अंजन के अनुसार, दो बैंक खाते संदिग्ध पाए गए हैं और उनकी गहन जांच की जा रही है। हालांकि अब तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अवैध ट्रांजैक्शन की राशि “काफी बड़ी” हो सकती है।
डीसी और एसपी के नेतृत्व में संयुक्त जांच टीम बनाई गई है, जो पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह मामला भी बोकारो की तरह वेतन निकासी से जुड़ा हो सकता है।
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राज्यव्यापी जांच: पुलिस मुख्यालय सक्रिय
बोकारो और हजारीबाग में सामने आए मामलों के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों में ट्रेजरी से होने वाली निकासी की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। डीजीपी के आदेश के बाद सभी जिलों के एसएसपी और एसपी अपने-अपने स्तर पर खातों की जांच कर रहे हैं।
कई जिलों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जबकि कुछ स्थानों पर जांच अभी जारी है। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में और भी मामलों का खुलासा संभव है।
वित्त विभाग की रिपोर्ट: सिस्टम में गहरी खामियां
वित्त सचिव प्रशांत कुमार द्वारा जारी निर्देशों और समीक्षा रिपोर्ट ने इन घोटालों की जड़ को उजागर किया है। रिपोर्ट में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं—
- सेवानिवृत्त या गैर-कार्यरत कर्मियों के नाम पर वेतन भुगतान
- सर्विस बुक और वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन नहीं किया जाना
- निर्धारित वेतनमान से अधिक भुगतान
- बैंक खाते की पुष्टि किए बिना राशि ट्रांसफर
- विपत्र लिपिक द्वारा अपने या परिजनों के खाते में राशि डालना
- एक ही मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त कर प्रक्रिया पूरी करना
- लंबे समय तक एक ही लिपिक का पद पर बने रहना, जिससे निगरानी कमजोर हुई
इन खामियों ने मिलकर एक ऐसा loophole तैयार किया, जिसका इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की निकासी संभव हो सकी।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया: सख्ती और सुधार की कोशिश
घटनाओं के बाद वित्त विभाग ने सभी जिलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं—
- वेतन भुगतान से पहले कर्मचारी की पहचान और सर्विस बुक का मिलान अनिवार्य
- बैंक खाते का सत्यापन पासबुक/चेक के आधार पर
- बिना प्रमाणन के ट्रेजरी से निकासी पर रोक
- ओटीपी किसी भी परिस्थिति में साझा न करने का निर्देश
- तीन साल से अधिक समय से एक ही पद पर कार्यरत लिपिकों का स्थानांतरण
इसके अलावा, संदिग्ध मामलों पर निगरानी के लिए पोर्टल स्तर पर भी तकनीकी नियंत्रण लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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व्यक्तिगत भ्रष्टाचार या सिस्टम फेलियर?
झारखंड में ट्रेजरी घोटाला फर्जी वेतन भुगतान और सिस्टम की खामियों का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
बोकारो और हजारीबाग के मामले यह संकेत देते हैं कि यह केवल किसी एक व्यक्ति की गड़बड़ी नहीं, बल्कि पूरे वित्तीय प्रबंधन तंत्र में मौजूद कमजोरियों का परिणाम है।
जहां एक ओर व्यक्तिगत स्तर पर धोखाधड़ी सामने आई है, वहीं दूसरी ओर निगरानी, सत्यापन और जवाबदेही की कमी ने इस तरह के अपराधों को संभव बनाया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या यह कार्रवाई केवल दोषियों तक सीमित रहेगी, या फिर सिस्टम में स्थायी सुधार के जरिए भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सकेगा?