झारखंड राज्यसभा चुनाव : बैजनाथ राम और परिमल नाथवाणी विजयी, कांग्रेस के प्रणव झा को मिली हार

Anand Kumar
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रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव में आखिरकार वही हुआ जिसकी राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा थी। झामुमो के बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी ने जीत हासिल कर ली, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। गुरुवार को हुए मतदान में राज्य के सभी 81 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

हालांकि चुनाव परिणाम ने कई राजनीतिक सवाल भी खड़े कर दिए हैं। मतदान के दौरान डाले गए तीन मत अमान्य घोषित कर दिए गए। इनमें दो मत परिमल नाथवाणी के पक्ष में और एक मत कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में पड़ा था। अंतिम परिणाम में बैजनाथ राम को 31 मत, परिमल नाथवाणी को 28 वैध मत और प्रणव झा को 20 वैध मत प्राप्त हुए।

बैजनाथ राम की जीत पहले से तय मानी जा रही थी

झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत को लेकर शुरू से ही कोई संशय नहीं था। असली मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी के बीच माना जा रहा था। कांग्रेस और झामुमो नेतृत्व लगातार दावा कर रहे थे कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है और उसके पास दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल है। लेकिन परिणाम ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए।

नाथवाणी

नाथवाणी ने तीसरी बार दर्ज की जीत

परिमल नाथवाणी का झारखंड से यह तीसरा राज्यसभा कार्यकाल होगा। इससे पहले वे 2008 और 2014 में भी झारखंड से राज्यसभा सदस्य चुने जा चुके हैं।

2008 का चुनाव आज भी झारखंड की राजनीति में चर्चित है। उस समय कांग्रेस के आरके आनंद को प्रथम वरीयता के अधिक मत मिलने के बावजूद नाथवाणी ने दूसरी वरीयता के मतों के आधार पर जीत दर्ज की थी। वहीं 2014 में वे भाजपा-आजसू के समर्थन से निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे थे।

तीन अमान्य वोटों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

चुनाव परिणाम के बाद सबसे अधिक चर्चा तीन अमान्य मतों को लेकर हो रही है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने मतदान से पहले दावा किया था कि उनके पास आवश्यक संख्या बल मौजूद है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मतदान से पहले बैजनाथ राम और प्रणव झा के साथ तस्वीर साझा कर एकजुटता का संदेश दिया था।

इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की हार और तीन मतों का अमान्य होना कई सवाल छोड़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम सिर्फ गणित का नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश का भी संकेत हो सकता है।

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होटल पॉलिटिक्स और रणनीति की चर्चा

राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन और एनडीए दोनों ने अपने-अपने विधायकों को होटलों में ठहराया था। विधायकों को मतदान की प्रक्रिया समझाने के लिए मॉक पोलिंग तक कराई गई थी। बावजूद इसके तीन वोटों का अमान्य होना विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए चर्चा का विषय बन गया है।

मतदान के दौरान विधानसभा परिसर में भी दिलचस्प तस्वीरें देखने को मिलीं। मतदान के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भाजपा विधायकों नवीन जायसवाल और राज सिन्हा के साथ चाय पर चर्चा करते नजर आए। वहीं मतदान समाप्त होने के बाद सभी दलों के नेता अपने-अपने जीत के दावे करते रहे।

भाजपा खेमे में उत्साह

परिणाम घोषित होते ही विधानसभा परिसर में भाजपा नेताओं के चेहरे खिल उठे। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने परिमल नाथवाणी को गले लगाकर बधाई दी। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी सोशल मीडिया पर नाथवाणी की जीत को महागठबंधन की बड़ी हार बताते हुए एनडीए समर्थित उम्मीदवार को शुभकामनाएं दीं।

राजनीतिक संदेश क्या?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह परिणाम सिर्फ एक राज्यसभा चुनाव का नतीजा नहीं है, बल्कि झारखंड की मौजूदा राजनीति के भीतर चल रहे समीकरणों की भी झलक है। सत्ता पक्ष के तीन वोटों का अमान्य होना और कांग्रेस उम्मीदवार का हार जाना आने वाले दिनों में महागठबंधन के भीतर नए सवाल खड़े कर सकता है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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