रांची से राज्यसभा की दो सीटें खाली, मई तक प्रक्रिया संभव
झारखंड में इस वर्ष राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। एक सीट दिशोम गुरु शिबू सोेरेन के निधन के बाद से रिक्त है, जबकि भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है। संकेत हैं कि चुनावी प्रक्रिया मई तक पूरी की जा सकती है।
इसी पृष्ठभूमि में सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक के भीतर दावेदारी की राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बयानों से साफ है कि दोनों दल सीट बंटवारे को लेकर अपनी-अपनी रणनीति साध रहे हैं।
कांग्रेस का दावा: “एक सीट स्वाभाविक हक”
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने दो में से एक सीट पर पार्टी का दावा ठोका है। उनका तर्क है कि गठबंधन सरकार में कांग्रेस अहम घटक है, इसलिए राज्यसभा में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि अंतिम निर्णय केंद्रीय स्तर पर होगा, लेकिन गठबंधन में संतुलन बनाए रखने के लिए एक सीट कांग्रेस को मिलनी चाहिए। पार्टी यह भी संकेत दे रही है कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए उसने “छोटे भाई” की भूमिका निभाई है, ऐसे में अब झामुमो को राजनीतिक उदारता दिखानी चाहिए।
झामुमो का रुख: “दोनों सीटों पर उतार सकते हैं उम्मीदवार”
कांग्रेस के दावे के जवाब में झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि पार्टी दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की स्थिति में है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतिम फैसला सहयोगी दलों से बातचीत के बाद ही होगा।
झामुमो का भरोसा अपने विधायकों की संख्या और नेतृत्व की राजनीतिक क्षमता पर है। प्रवक्ता ने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री Hemant Soren सहयोगी दलों से संवाद कर सर्वसम्मति बनाने की कोशिश करेंगे।
अंकगणित: इंडिया ब्लॉक के पक्ष में समीकरण
झारखंड विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 81 है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 27+1 यानी 28 विधायकों का समर्थन आवश्यक होगा।
वर्तमान विधानसभा स्थिति:
- झामुमो: 34 विधायक
- कांग्रेस: 16 विधायक
- राजद: 4 विधायक
- सीपीआई (माले): 2 विधायक
कुल: 56 विधायक (इंडिया ब्लॉक)
स्पष्ट है कि यदि गठबंधन एकजुट रहता है तो दोनों सीटों पर जीत का रास्ता आसान है।
एनडीए का गणित कमजोर
भाजपा के पास 22 विधायक हैं। एलजेपी (रामविलास) और जदयू के एक-एक विधायक जोड़ने पर संख्या 24 तक पहुंचती है। यह जीत के लिए आवश्यक 28 से चार कम है।
हालांकि हाल में भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां ने “खेला” होने की बात कहकर राजनीतिक संभावनाओं की ओर इशारा जरूर किया है। लेकिन फिलहाल अंकगणित इंडिया ब्लॉक के पक्ष में है।
क्या अंदरूनी खींचतान बढ़ाएगी दिलचस्पी?
राज्यसभा चुनाव सामान्यतः गणित का खेल माना जाता है, लेकिन इस बार गठबंधन के भीतर ही दावेदारी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। यदि सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बनती, तो अंदरूनी असंतोष भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल तस्वीर यही कहती है कि दोनों सीटों पर महागठबंधन की जीत तय है, बशर्ते एकजुटता बनी रहे। लेकिन कांग्रेस और झामुमो के सार्वजनिक बयान यह संकेत दे रहे हैं कि अंतिम फैसला आसान नहीं होगा।