Chatra : 28 दिन से लापता दिव्यांग किशोरी का शव पहाड़ पर मिलने से सनसनी, SIT जांच में जुटी पुलिस

Anand Kumar
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पहाड़ पर जांच करती पुलिस।

गांगपुर गांव में मातम, सवालों के घेरे में मौत की परिस्थितियां, पैर से लाचार बच्ची पहाड़ पर कैसे चढ़ी

Chatra : गिद्धौर थाना क्षेत्र के गांगपुर गांव से 28 दिसंबर से लापता 15 वर्षीय किशोरी मुन्नी कुमारी उर्फ रानू कुमारी का शव 28वें दिन शनिवार को गांव से सटे पहाड़ के ऊपर मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। शव मिलने की खबर जैसे ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए।

दुर्गम पहाड़ी इलाके में किशोरी का शव मिलने से लोग स्तब्ध हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों पैरों से दिव्यांग रही किशोरी पहाड़ पर आखिर कैसे पहुंची। इसी सवाल को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।


दुर्गंध से हुआ खुलासा

ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार को कुछ लोग पहाड़ की ओर गए थे। इसी दौरान तेज दुर्गंध आने पर आसपास खोजबीन की गई, जहां एक किशोरी का शव पड़ा हुआ मिला। इसकी सूचना तत्काल गिद्धौर थाना पुलिस को दी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पहचान की प्रक्रिया शुरू की। परिजनों ने शव की पहचान मुन्नी कुमारी उर्फ रानू कुमारी के रूप में की। पहचान होते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।


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28 दिसंबर से थी लापता, दर्ज थी गुमशुदगी

गौरतलब है कि मुन्नी कुमारी 28 दिसंबर को अचानक घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने उसी दिन गिद्धौर थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। किशोरी की तलाश को लेकर पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया था। किशोरी की बरामदगी के लिए गांव-गांव इश्तेहार चिपकाए गए, छापेमारी की गई और इनाम की राशि भी बढ़ाई गई थी, लेकिन लगभग एक माह बाद इस तरह शव का मिलना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


हर एंगल से जांच, फॉरेंसिक टीम जुटा रही साक्ष्य

पुलिस का कहना है कि किशोरी की मौत किन परिस्थितियों में हुई, शव पहाड़ पर कैसे पहुंचा और इसमें किसी आपराधिक साजिश की भूमिका है या नहीं—इन सभी बिंदुओं पर गहन जांच की जा रही है। घटनास्थल को सील कर फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए हैं।

शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।


निष्पक्ष जांच की मांग

इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक माह तक चली तलाश के बाद इस दर्दनाक अंत ने न केवल परिजनों, बल्कि पूरे समाज को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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