34 आईएएस चुनाव प्रेक्षक बने, झारखंड में प्रशासनिक फैसलों की रफ्तार हुई धीमी

Anand Kumar
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161 में से 34 अधिकारी बाहर, मार्च-अप्रैल के अहम दौर में बढ़ा दबाव

Ranchi : झारखंड में इन दिनों शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की कमी साफ महसूस की जा रही है। इसकी वजह केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य कैडर के 34 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को विभिन्न राज्यों में चुनाव प्रेक्षक के रूप में तैनात किया जाना है। इससे राज्य में प्रशासनिक फैसलों की रफ्तार सुस्त हो गयी है।

राज्य में कुल 161 आईएएस अधिकारियों में से सचिव और विशेष सचिव स्तर के 34 अधिकारी करीब डेढ़ महीने से बाहर हैं। अधिकांश अधिकारी 17 मार्च से ही राज्य से बाहर हैं और इनके 7 मई के बाद लौटने की संभावना है। ऐसे में प्रशासनिक कामकाज सीमित संसाधनों के सहारे चल रहा है।

आईएएस

पांच राज्यों में भेजे गए अधिकारी

चुनाव प्रेक्षक के तौर पर झारखंड के अधिकारियों को जिन राज्यों में भेजा गया है, उनमें—

  • पश्चिम बंगाल: 24
  • तमिलनाडु: 5
  • पुडुचेरी: 2
  • केरल: 2
  • असम: 1

इन तैनातियों के कारण राज्य के कई महत्वपूर्ण विभागों में नेतृत्व स्तर पर खालीपन आ गया है।

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वित्तीय वर्ष के अहम समय पर असर

मार्च और अप्रैल प्रशासनिक दृष्टि से सबसे अहम महीने माने जाते हैं। इसी दौरान:

  • योजनाओं के खर्च का निपटारा होता है
  • बजट उपयोग की समीक्षा होती है
  • नए वित्तीय वर्ष की योजनाएं तय होती हैं

लेकिन इस बार कई विभागों में निर्णय प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। कई जगहों पर विभागीय प्रमुखों का अतिरिक्त प्रभार भी तय नहीं हो सका है।

किन विभागों पर सबसे ज्यादा असर

अधिकारियों की अनुपस्थिति का असर खास तौर पर इन विभागों में देखा जा रहा है:

  • श्रम विभाग
  • वाणिज्य कर विभाग
  • भू-राजस्व विभाग
  • कल्याण, कृषि और वन विभाग
  • ग्रामीण विकास

इन विभागों में कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबित हैं और नीतिगत फैसले टल रहे हैं।

अतिरिक्त प्रभार से बढ़ा दबाव

अधिकारियों की कमी के कारण कई विभागों का अतिरिक्त प्रभार अन्य अधिकारियों को दिया गया है।
स्थिति यह है कि एक-एक अधिकारी के पास दो से तीन विभागों की जिम्मेदारी है, जिससे फाइलों के निष्पादन में देरी हो रही है।

योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर

राज्य सरकार की कई योजनाएं इस समय क्रियान्वयन के चरण में हैं। लेकिन मॉनिटरिंग और निर्णय लेने वाले अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण:

  • जिलों से आने वाले प्रस्ताव लंबित हैं
  • रिपोर्ट पर समय पर निर्णय नहीं हो पा रहा
  • जमीनी स्तर पर कामकाज प्रभावित हो रहा है

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राजनीतिक और प्रशासनिक व्यस्तता भी कारण

इधर, मुख्यमंत्री भी पिछले कुछ दिनों से असम चुनाव में व्यस्त रहे हैं। उनके 8 अप्रैल के बाद राज्य लौटने की संभावना है। ऐसे में शीर्ष स्तर पर निर्णय लेने की गति और प्रभावित हुई है।

परंपरा पुरानी, लेकिन संख्या ज्यादा

विधानसभा चुनाव के दौरान अन्य राज्यों के आईएएस अधिकारियों को प्रेक्षक बनाकर भेजना निर्वाचन आयोग की पुरानी व्यवस्था है। लेकिन इस बार झारखंड से भेजे गए अधिकारियों की संख्या अधिक होने के कारण प्रशासनिक दबाव बढ़ गया है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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