रांची : झारखंड में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के खिलाफ अपराध की चार अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं। सिमडेगा, गुमला, चतरा और रांची की इन घटनाओं ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और बच्चों को यौन हिंसा से बचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं स्कूल में शिक्षक पर ही छात्रा के शोषण का आरोप है, तो कहीं शादी का झांसा देकर यौन शोषण और लाखों रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी की शिकायत सामने आई है। राजधानी रांची में दिनदहाड़े एक छात्रा के साथ छेड़खानी और उसे जबरन बाइक पर बैठाने की कोशिश का मामला भी दर्ज किया गया है।
- सिमडेगा: 10 वर्षीय छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में शिक्षक गिरफ्तार
- गुमला: शादी का झांसा देकर शोषण और 15.17 लाख रुपये ट्रांसफर कराने का आरोप
- चतरा : 12 वर्षीय बच्ची के गर्भवती होने का मामला
- रांची : कोचिंग जा रही 16 वर्षीय छात्रा से दिनदहाड़े छेड़खानी
- सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं, सुरक्षा और जवाबदेही का भी है
सिमडेगा: 10 वर्षीय छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में शिक्षक गिरफ्तार
सिमडेगा जिले के केरसई थाना क्षेत्र में एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक पर 10 वर्षीय छात्रा के साथ लंबे समय तक यौन शोषण करने का आरोप लगा है। बच्ची की नानी ने 11 अक्टूबर को थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शिक्षक ने बच्ची को किसी को घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई की और आरोपी शिक्षक जोलेन कुजूर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी को 12 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की गई। इस मामले में पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस आगे की जांच कर रही है।
गुमला: शादी का झांसा देकर शोषण और 15.17 लाख रुपये ट्रांसफर कराने का आरोप
गुमला से जुड़े दूसरे मामले में पुलिस ने प्रभास्कर कुमार नामक युवक को रांची से गिरफ्तार किया है। उस पर एक युवती को शादी का झांसा देकर जबरन शारीरिक संबंध बनाने, वीडियो के जरिए धमकाने और उसके बैंक खाते से 15,17,468 रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कराने का आरोप है।
पीड़िता के बयान के मुताबिक, वर्ष 2024 में जब वह रांची स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी, उसी दौरान आरोपी से उसकी पहचान हुई थी। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे प्रताड़ित करता था।
गुमला पुलिस ने मामले की जांच के क्रम में रांची में छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार किया और उसे जेल भेज दिया। आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
चतरा : 12 वर्षीय बच्ची के गर्भवती होने का मामला
चतरा से सामने आई तीसरी खबर और भी चिंताजनक है। 12 वर्षीय बच्ची के साथ कथित यौन हिंसा के बाद उसके गर्भवती होने की बात सामने आई है। खबर के मुताबिक, बच्ची को चतरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इतनी कम उम्र में बच्ची के गर्भवती होने की खबर ने उसके स्वास्थ्य, सुरक्षा और उसे समय पर सहायता उपलब्ध कराने को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। मामले में जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान, पुलिस कार्रवाई और बच्ची को मिलने वाली चिकित्सा तथा मनोसामाजिक सहायता से संबंधित विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
नाबालिग की पहचान और निजता की रक्षा करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच तथा बच्ची को जरूरी संरक्षण और उपचार उपलब्ध कराना सबसे महत्वपूर्ण है।
रांची : कोचिंग जा रही 16 वर्षीय छात्रा से दिनदहाड़े छेड़खानी
राजधानी रांची के लालपुर थाना क्षेत्र में जेल मोड़ के पास एक 16 वर्षीय छात्रा के साथ छेड़खानी का मामला सामने आया है। छात्रा सुबह करीब आठ बजे कोचिंग जाने के लिए निकली थी। आरोप है कि करमटोली चौक के पास एक बाइक सवार युवक उसका पीछा करने लगा।
खबर के मुताबिक, जेल मोड़ के पास युवक ने छात्रा का हाथ पकड़कर उसे जबरन बाइक पर बैठाने की कोशिश की। विरोध करने पर उसके बाल खींचने का भी आरोप है। छात्रा के शोर मचाने पर आसपास के लोग जुट गए और आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस ने छात्रा की लिखित शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दिनदहाड़े हुई इस घटना ने राजधानी में छात्राओं की सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं, सुरक्षा और जवाबदेही का भी है
झारखंड के चार जिलों से सामने आए ये मामले अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़े हैं। लेकिन इनके बीच एक साझा चिंता है—बच्चियों और महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने की चुनौती।
स्कूल में शिक्षक जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ आरोप हो, भरोसे के रिश्ते में कथित शोषण हो या सड़क पर किसी छात्रा को जबरन रोकने की कोशिश, हर मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है।
साथ ही, पीड़ितों को चिकित्सा सहायता, कानूनी मदद, मनोसामाजिक परामर्श और सुरक्षा उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नाबालिगों से जुड़े मामलों में उनकी पहचान गोपनीय रखी जानी चाहिए और उनकी निजता का सम्मान किया जाना चाहिए।
महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा केवल कानून बनाने या गिरफ्तारी करने से सुनिश्चित नहीं होगी। इसके लिए प्रभावी जांच, समय पर न्याय, सुरक्षित शैक्षणिक संस्थान और ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें पीड़ित बिना डर के शिकायत कर सकें।
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