निकाय चुनाव में बगावत पर सख्ती : भाजपा करीब 20 नेताओं को शो-कॉज करेगी, राजकुमार श्रीवास्तव ने पार्टी छोड़ी

Anand Kumar
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Ranchi : झारखंड के नगर निकाय चुनाव में पार्टी लाइन से हटकर सक्रिय नेताओं पर भाजपा कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। संगठन ने संकेत दिया है कि समर्थित प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतरने या विरोधी उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने वाले करीब 20 नेताओं को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज) जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संगठन से बाहर किए जाने तक की कार्रवाई संभव है।

सूत्रों के मुताबिक जिन नेताओं को नोटिस की सूची में शामिल किया गया है, उनमें डालटनगंज के पूर्व जिला अध्यक्ष परशुराम ओझा, धनबाद के पूर्व जिला अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार और जमशेदपुर महानगर के पूर्व जिला अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव प्रमुख हैं। इनके अलावा चास की मेयर प्रत्याशी परिंदा सिंह, देवघर के मेयर प्रत्याशी बाबा बलियासे और धनबाद के पूर्व विधायक संजीव सिंह के नाम भी सामने आए हैं।

राजकुमार श्रीवास्तव ने भाजपा छोड़ी

हालांकि शोकॉज की खबर आने के बाद राजकुमार श्रीवास्तव ने भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। श्रीवास्तव धनबाद जिला भाजपा प्रभारी भी थे। उधर गिरिडीह नगर निगम के मेयर प्रत्याशी सह भाजपा नेता नागेश्वर दास ने अपने आवास पर प्रेसवार्ता कर भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की साथ ही निकाय चुनाव से हटने का भी एलन कर दिया।


‘अनुशासन सर्वोपरि’ का संदेश

प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू विभिन्न बैठकों में यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ने या विरोधी खेमे के समर्थन में प्रचार करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई चर्चाओं में भी सहमति बनी कि अनुशासनहीनता को किसी हाल में बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।

संगठन ने संबंधित गतिविधियों की रिपोर्ट, भाषणों और प्रचार सामग्री के वीडियो एकत्र कर लिए हैं। अगले कुछ दिनों में औपचारिक नोटिस जारी होने की संभावना है।


मनाने की कोशिशें विफल

पार्टी ने असंतुष्ट नेताओं से कई दौर की बातचीत की। उन्हें चुनाव मैदान से हटने या विरोधी प्रचार से दूरी बनाने का आग्रह किया गया, लेकिन प्रयास सफल नहीं रहे।

  • देवघर में बाबा बलियासे, समर्थित उम्मीदवार रीता चौरसिया के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
  • चास नगर निगम में परिंदा सिंह, अधिकृत प्रत्याशी अविनाश कुमार के मुकाबले मैदान में हैं।
  • डालटनगंज में परशुराम ओझा ने अपनी पत्नी जानकी देवी को मेदिनीनगर मेयर पद पर उतारा है।
  • जमशेदपुर में राजकुमार श्रीवास्तव की पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव, मानगो की समर्थित प्रत्याशी संध्या सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं।
  • धनबाद में सत्येंद्र कुमार, समर्थित उम्मीदवार के विरोध में खड़े रवि चौधरी के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं।
  • पूर्व विधायक संजीव सिंह भी अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में हैं।

इन घटनाओं को संगठन ने “संगठनात्मक अनुशासन के उल्लंघन” की श्रेणी में रखा है।


केंद्रीय नेतृत्व की निगरानी

झारखंड निकाय चुनाव पर केंद्रीय नेतृत्व की भी पैनी नजर है। पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह और राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा को राज्य में जिम्मेदारी सौंपी है।

अरुण सिंह ने रांची में समर्थित मेयर प्रत्याशी रोशनी खलखो के समर्थन में सभाएं कीं। उनका कार्यक्रम मेदिनीनगर और गढ़वा में भी निर्धारित है। पार्टी नेतृत्व का संदेश स्पष्ट है—निकाय चुनाव में अधिकृत उम्मीदवारों को लेकर कोई भ्रम न रहे।


संगठनात्मक असर और आगे की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनाव भले ही औपचारिक रूप से गैर-दलीय आधार पर हो रहे हों, लेकिन प्रमुख दलों ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। ऐसे में बगावत की घटनाएं पार्टी की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं।

यदि नोटिस जारी होने के बाद भी स्थिति नहीं बदलती है, तो निष्कासन जैसी कठोर कार्रवाई संगठनात्मक संदेश देने के लिए की जा सकती है।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि भाजपा अनुशासन के मुद्दे पर कितनी दूर तक जाती है और इसका निकाय चुनाव के परिणामों पर क्या असर पड़ता है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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