गणतंत्र दिवस पर लंदन के पार्लियामेंट हाउस में बापू की प्रतिमा पर करेंगे माल्यार्पण
London/Ranchi : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यूनाइटेड किंगडम में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य भारत के संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक विरासत और समृद्ध सभ्यतागत परंपरा को वैश्विक मंच पर रेखांकित करना है। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने लंदन और ऑक्सफोर्ड में कई ऐतिहासिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थानों का भ्रमण किया तथा भारत–ब्रिटेन के बीच अकादमिक और बौद्धिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
पार्लियामेंट स्क्वायर में गांधी प्रतिमा पर पुष्पांजलि, आंबेडकर हाउस का भ्रमण
गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यमंत्री 26 जनवरी को लंदन स्थित Parliament Square में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इस अवसर पर उन्होंने सत्य, अहिंसा और नैतिक नेतृत्व के गांधीजी के सार्वकालिक संदेश को स्मरण करेंगे, जो आज भी दुनिया भर में स्वतंत्रता और न्याय के आंदोलनों को दिशा देते हैं।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने Dr Ambedkar House & Museum का भ्रमण करेंगे और भारतीय संविधान के शिल्पकार भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यहां सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक लोकतंत्र से जुड़े उनके विचारों और वैश्विक प्रभाव पर चर्चा होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री विश्वविख्यात British Museum भी जायेंगे, जिसे भारत की सभ्यतागत और ऐतिहासिक विरासत के वैश्विक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।
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ऑक्सफोर्ड के सेंट जॉन्स कॉलेज में जयपाल सिंह मुंडा की विरासत का अवलोकन
यूके दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने University of Oxford अंतर्गत संचालित St John’s College, Oxford का भ्रमण किया। कॉलेज की अध्यक्ष प्रोफेसर लेडी सू ब्लैक, बैरोनेस ब्लैक ऑफ स्ट्रोम ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर आयोजित हाई-टी स्वागत समारोह में प्रतिनिधिमंडल का सम्मान किया गया।

सेंट जॉन्स कॉलेज में मुख्यमंत्री ने महान आदिवासी नेता, संविधान निर्माता और झारखंड आंदोलन के वैचारिक स्तंभ जयपाल सिंह मुंडा से जुड़े दुर्लभ अभिलेखों का अवलोकन किया। कॉलेज द्वारा प्रदर्शित अभिलेखों में उनके ऑक्सफोर्ड काल से जुड़े फोटोग्राफ, डिबेटिंग सोसाइटी के दस्तावेज, व्यक्तिगत पत्र, नोटबुक तथा हॉकी उपलब्धियों का विवरण शामिल था। कॉलेज रिकॉर्ड के अनुसार जयपाल सिंह मुंडा डिबेटिंग सोसाइटी के सचिव और अध्यक्ष रहे तथा कॉलेज और विश्वविद्यालय की ओर से हॉकी में प्रतिनिधित्व करते हुए ‘हॉकी ब्लू’ सम्मान प्राप्त किया। आगे चलकर उन्होंने 1928 के ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की।
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मुख्यमंत्री ने सेंट जॉन्स कॉलेज द्वारा जयपाल सिंह मुंडा की विरासत को गरिमा के साथ संरक्षित किए जाने की सराहना की और कहा कि ऐसे प्रयास झारखंड की ऐतिहासिक और बौद्धिक धरोहर को वैश्विक शैक्षणिक केंद्रों से जीवंत रूप में जोड़ते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जयपाल सिंह मुंडा की वैचारिक परंपरा को दशकों तक जनआंदोलनों के माध्यम से आगे बढ़ाया गया, जिसमें दिशोम गुरु शिबू सोरेन की केंद्रीय भूमिका रही।
मुख्यमंत्री ने झारखंड सरकार और सेंट जॉन्स कॉलेज के बीच अभिलेखीय आदान-प्रदान, डिजिटाइजेशन और संयुक्त संरक्षण जैसे क्षेत्रों में संरचित सहयोग की संभावनाओं पर भी रुचि जताई। साथ ही, मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की स्मृति में समर्पित पीएचडी/डॉक्टोरल छात्रवृत्ति पर विचार-विमर्श हुआ।

सोमरविल कॉलेज में सतत विकास और पर्यावरण नीति पर संवाद
इसके बाद मुख्यमंत्री ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के Somerville College, Oxford का दौरा किया, जहां उनका स्वागत कॉलेज की प्रिंसिपल कैथरीन रॉयल द्वारा किया गया। इस अवसर पर आदिवासी कल्याण, सतत विकास, जलवायु कार्रवाई और न्यायसंगत परिवर्तन के क्षेत्रों में झारखंड सरकार की नीतिगत पहलों की चर्चा हुई।
संवाद में ऑक्सफोर्ड इंडिया सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की रिसर्च डायरेक्टर प्रो. राधिका खोसला भी शामिल रहीं। पर्यावरण नीति, क्लाइमेट एक्शन और सतत विकास जैसे विषयों पर ऑक्सफोर्ड के शोध समुदाय और झारखंड सरकार के बीच सहयोग की संभावनाओं पर विचार हुआ।
सोमरविल कॉलेज की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया गया कि यह उन शुरुआती कॉलेजों में से रहा है, जिसने महिलाओं को उच्च शिक्षा तक पहुंच दी। कॉलेज के पूर्व छात्रों में मार्गरेट थैचर, इंदिरा गांधी और कॉर्नेलिया सोराबजी जैसे नाम शामिल रहे हैं। स्वागत समारोह में विभिन्न कॉलेजों से जुड़े छात्र, शोधार्थी, भारतीय विद्वान और सिविल सेवक उपस्थित रहे। अनौपचारिक संवाद में छात्रों और शोधकर्ताओं ने झारखंड सरकार के साथ अधिक सक्रिय सहभागिता की इच्छा जताई।
भारत–ऑक्सफोर्ड शैक्षणिक सेतु को मजबूती
यह पूरा दौरा भारत और ऑक्सफोर्ड के बीच ऐतिहासिक शैक्षणिक और बौद्धिक संबंधों की पुनः पुष्टि करता है। साथ ही, झारखंड की विकासात्मक, पर्यावरणीय और शासन प्राथमिकताओं के साथ वैश्विक शोध संस्थानों के तालमेल को भी रेखांकित करता है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह पहल भारत के संवैधानिक मूल्यों और वैश्विक संवाद के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जा रही है।