Ranchi/Palamu : झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के तहत दो अलग-अलग जिलों में कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो झारखंड ने अमीन और रोजगार सेवक को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। रांची और पलामू प्रमंडल में हुई इन कार्रवाइयों ने निचले स्तर के राजस्व और पंचायत तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिल्ली अंचल में 8 हजार की रिश्वत लेते अमीन गिरफ्तार
रांची जिले के सिल्ली अंचल कार्यालय में पदस्थापित अमीन गणेश महतो को 8 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। शिकायतकर्ता वासुदेव महतो (लोवादाग, सिल्ली) ने एसीबी रांची को लिखित शिकायत दी थी।
शिकायत के अनुसार, वासुदेव महतो ने 20 डिसमिल जमीन (खाता संख्या 13, प्लॉट संख्या 676) की नापी के लिए 16 दिसंबर को ऑनलाइन आवेदन किया था। 10 फरवरी 2026 को भूमि की नापी की गई, जिसके बाद अमीन गणेश महतो ने नापी रिपोर्ट और नक्शा तैयार करने के एवज में 8 हजार रुपये की मांग की।
एसीबी ने पहले शिकायत का सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई गई। गुरुवार को शिकायतकर्ता द्वारा रकम देते समय आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया गया। आरोपी के खिलाफ रांची थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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पलामू में 6 हजार लेते रोजगार सेवक गिरफ्तार
दूसरी कार्रवाई पलामू प्रमंडल में हुई। यहाँ सिलदाग पंचायत के रोजगार सेवक सुनील कुमार को 6 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
शिकायतकर्ता ने एसीबी पलामू के एसपी को आवेदन देकर आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी और भाभी के नाम विशेष ग्राम सभा में “दीदी बाड़ी योजना” प्रस्तावित हुई थी। योजना की स्वीकृति के लिए रोजगार सेवक 6 हजार रुपये की मांग कर रहा था।
शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने जाल बिछाया। दंडाधिकारी की उपस्थिति में पंचायत क्षेत्र में ही आरोपी को रिश्वत की रकम लेते रंगे हाथ दबोच लिया गया।
कानूनी परिप्रेक्ष्य: किन धाराओं में होगी कार्रवाई?
इन दोनों मामलों में आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत लोक सेवक द्वारा अवैध पारिश्रमिक मांगना दंडनीय अपराध है। हाल के वर्षों में एसीबी द्वारा ट्रैप मामलों में सजा दर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
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प्रशासनिक असर और संदेश
दो दिनों के भीतर दो अलग-अलग प्रमंडलों में हुई कार्रवाई यह संकेत देती है कि एसीबी निचले स्तर के राजस्व और पंचायत कर्मचारियों पर निगरानी बढ़ा रही है। जमीन नापी और ग्रामीण योजनाओं की स्वीकृति से जुड़े मामलों में शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रैप मामलों में त्वरित अभियोजन और सजा सुनिश्चित होती है, तो इससे निचले स्तर के प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और संपत्ति व आय के स्रोत की भी जांच की जा सकती है।