कैरव गांधी अपहरण का मास्टरमाइंड पंजाब का अपराधी गिरफ्तार, अपहरण की पूरी कहानी सामने आयी

Anand Kumar
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OLX से खरीदी गयी स्कॉर्पियो, इंडोनेशिया जाकर बैठा तेजिंदर पाल सिंह

Jamshedpur : जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित सीएच एरिया से युवा उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले में पुलिस जांच ने अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साजिश की चौंकाने वाली तस्वीर सामने रख दी है। इस अपहरण कांड का मास्टरमाइंड पंजाब के लुधियाना जिले के कोटमाना गांव निवासी तेजिंदर पाल सिंह उर्फ सरदार जी था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि पूरे अपहरण की योजना उसी के निर्देश पर तैयार की गई थी।

कैरव गांधी को अपराधियों ने 13 जनवरी को खुद को पुलिसकर्मी बताकर अगवा किया था। दबाव बढ़ने के बाद 26 जनवरी की रात अपहरणकर्ताओं ने उन्हें हजारीबाग जिले के चौपारण–बरही सीमा क्षेत्र के पास छोड़ दिया। इसके बाद पुलिस की जांच ने साजिश की परतें खोलनी शुरू कीं।

घायल आरोपी की पूछताछ से खुला पूरा नेटवर्क

इस कांड का बड़ा खुलासा अपहरण मामले में गिरफ्तार और पुलिस मुठभेड़ में घायल मोहम्मद इमरान उर्फ आमिर की पूछताछ में हुआ। इमरान बिहार के नालंदा जिले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के सिरहारी गांव का रहने वाला है। उसने पुलिस को बताया कि इस वारदात में कुल 12 लोग सीधे तौर पर शामिल थे।

इमरान के अनुसार, अपहरण की साजिश जमशेदपुर के मानगो इलाके में रची गई थी। योजना से लेकर वाहन की व्यवस्था, हथियार, रेकी और फिरौती की रणनीति तक, हर कदम पर तेजिंदर पाल सिंह की भूमिका निर्णायक रही। अपहरण के लिए वाहन खरीदने के लिए चार लाख रुपये की रकम भी उसी ने उपलब्ध कराई थी।

इंडोनेशिया से हो रही थी फिरौती की बातचीत

जांच में सामने आया है कि घटना के बाद तेजिंदर पाल सिंह और उसका करीबी साद आलम इंडोनेशिया फरार हो गए थे। वहीं से वे अपहृत उद्यमी के परिजनों से फिरौती के लिए संपर्क कर रहे थे। पुलिस का मानना है कि जानबूझकर विदेश जाकर बैठने की रणनीति बनाई गई थी, ताकि भारतीय एजेंसियों की पकड़ से बचा जा सके।

इमरान ने बताया कि साद आलम से उसकी पहचान पहले से थी, क्योंकि साद की बहन की शादी उसके गांव में हुई थी। इसी रिश्ते के जरिए उसकी बातचीत तेजिंदर पाल सिंह से कराई गई, जिसके बाद दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी।

महीनों तक की गई रेकी और तैयारी

पूछताछ में यह भी सामने आया कि बीते छह-सात महीनों से जमशेदपुर में लगातार रेकी की जा रही थी। किराये के मकान तलाशे गए, पुलिस की तैनाती और गतिविधियों पर नजर रखी गई। दिसंबर 2025 में तेजिंदर पाल ने साफ निर्देश दिया कि अब अपहरण को अंजाम देने का समय आ गया है।

अपहृत को 10 से 15 दिन तक रखने का खर्च उठाने की जिम्मेदारी भी तेजिंदर पाल ने ली थी। हथियार और कारतूस की व्यवस्था करने का जिम्मा गुड्डू सिंह को सौंपा गया। इसके साथ ही एक पुरानी स्कॉर्पियो खरीदने का निर्देश दिया गया।

OLX से खरीदी गई स्कॉर्पियो

वाहन की व्यवस्था के लिए 2 जनवरी को olx वेबसाइट के जरिए पटना के अगमकुआं निवासी मोहन कुमार से संपर्क किया गया। 5 जनवरी को मोटी रकम के लालच में मोहन स्कॉर्पियो देने के लिए तैयार हो गया और उसे एक लाख रुपये तत्काल दिए गए। इसी वाहन का इस्तेमाल अपहरण में किया गया।

गिरफ्तारियां और आगे की जांच

पुलिस ने 27 और 28 जनवरी को बिहार के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। अब तक की जांच में पंजाब, बिहार और झारखंड से जुड़े अपराधियों का एक संगठित नेटवर्क सामने आया है। पुलिस का कहना है कि विदेश से फिरौती मांगने और तकनीकी माध्यमों के इस्तेमाल की गहन जांच की जा रही है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी ऐसे संगठित अपराध किए हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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