रांची: डुमरी विधायक और JLKM अध्यक्ष जयराम महतो तथा झारखंड पुलिस एसोसिएशन के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। जयराम महतो की ओर से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस एसोसिएशन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

जयराम महतो ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि आईएएस-आईपीएस जैसे अधिकारी धनबाद, बोकारो, मधुपुर, रांची और जमशेदपुर जैसे जिलों में तबादला कराने के लिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं। उन्होंने दावा किया कि अधिकारी एक साल काम करने के बाद करोड़ों रुपये कमाकर घर लौटते हैं।
जयराम महतो ने यह भी कहा कि उनके पास विभिन्न जिलों के एसपी के बारे में जानकारी है और वह एक-एक अधिकारी के कमाई के स्रोत का हिसाब देने को तैयार हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई दस्तावेज या सार्वजनिक प्रमाण पेश नहीं किया है।
पुलिस एसोसिएशन ने किया पलटवार
जयराम महतो के बयान का वीडियो सामने आने के बाद झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश संयुक्त सचिव राकेश कुमार पांडेय ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी।
एसोसिएशन की ओर से जयराम महतो के बयान की आलोचना करते हुए कहा गया कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के बारे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
एसोसिएशन के बयान में जयराम महतो को लेकर काफी तीखी और व्यक्तिगत टिप्पणियां भी की गईं। संगठन ने कहा कि इस तरह की भाषा और व्यवहार से पुलिसकर्मियों का मनोबल प्रभावित होता है।
पहले से चला आ रहा है विवाद
जयराम महतो और पुलिस एसोसिएशन के बीच यह विवाद नया नहीं है। अगस्त में धनबाद के बरवाअड्डा थाना प्रभारी और जयराम महतो के बीच कथित फोन बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था। इसके बाद पुलिस एसोसिएशन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की थी।
बाद में बरवाअड्डा थाने में जयराम महतो और उनके सहयोगियों के खिलाफ पुलिस के साथ दुर्व्यवहार और सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत आरोपों को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई। 21 सितंबर को धनबाद की MP-MLA अदालत ने जयराम महतो और अन्य आरोपितों को मामले में अग्रिम जमानत दी।
पुलिस एसोसिएशन ने घोषित किया था आंदोलन
इस विवाद के बाद झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने जयराम महतो की गिरफ्तारी समेत नौ सूत्री मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की थी। कार्यक्रम में काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी करना, सामूहिक उपवास, धरना और अक्टूबर में सामूहिक अवकाश शामिल था।
हालांकि बाद में आंदोलन स्थगित कर दिया गया। इसके बाद एसोसिएशन के भीतर भी संगठन के रुख को लेकर सवाल उठने की खबर सामने आई थी। कुछ पुलिस पदाधिकारियों द्वारा एसोसिएशन के नाम पर वेतन से होने वाली चंदे की कटौती बंद कराने के लिए एसपी को पत्र लिखे जाने की बात सामने आई थी।
फिलहाल जयराम महतो के ताजा आरोप और पुलिस एसोसिएशन की प्रतिक्रिया के बाद दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी फिर तेज हो गई है। अब देखना होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है।
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