केंद्रीय लक्ष्य – 31 मार्च 2026 के संदर्भ में हालिया एनकाउंटर, सुरक्षा उपाय, सरेंडर अभियान व विकास प्रयासों का समग्र मूल्यांकन
Anand Kumar
- केंद्रीय लक्ष्य – 31 मार्च 2026 के संदर्भ में हालिया एनकाउंटर, सुरक्षा उपाय, सरेंडर अभियान व विकास प्रयासों का समग्र मूल्यांकन
- नक्सल-विरोधी माहौल की वर्तमान स्थिति
- प्रमुख मुठभेड़ और घटनाक्रम (जून 2025–मार्च 2026)
- सारंडा जंगल: रणनीतिक चुनौतियां
- चतरा–हजारीबाग क्षेत्र: सीमावर्ती जंगल
- सक्रिय इनामी नक्सली: प्रोफ़ाइल और स्थिति
- सुरक्षा बलों की रणनीति और संयुक्त अभियान
- स्थानीय जनता और सुरक्षा माहौल
- समर्पण नीति और पुनर्वास प्रयास
- राजनीतिक पहल और केंद्र का एजेंडा
- नक्सलवाद के शेष खतरे और चुनौतियां
- नीतिगत सुझाव एवं अगले कदम
झारखंड में पिछले 15 महीनों (जनवरी 2025–मार्च 2026) में नक्सल विरोधी सुरक्षा कार्रवाइयां तेज हुई हैं। इसी अवधि में कम से कम 58 नक्सली मारे गए और 45 से अधिक हथियारबंद केंद्रीय संरचनाओं के सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके हैं। मुख्य सुरक्षा बल सारंडा (पश्चिमी सिंहभूम) और चतरा-हजारीबाग जिले के जंगलों में सक्रिय हैं।
हालिया बड़े एनकाउंटरों में अप्रैल 2026 में चतरा–हजारीबाग सीमा पर चार कुख्यात नक्सलियों के ढेर होने (15 लाख के इनामी शहदेव महतो आदि) और सारंडा में कोबरा जवानों के घायल होने जैसी घटनाएं शामिल हैं। राज्य पुलिस के आंकड़ों के अनुसार झारखंड का 95% क्षेत्र नक्सल प्रभावित सूची से बाहर हो चुका है।
बचे हुए सक्रिय नक्सली मुख्यतः सारंडा के तटवर्ती जंगलों में छिपे हैं, जहां अब तक लगभग 48 से 49 इनामी नक्सली (एक करोड़ से एक लाख तक इनाम) सक्रिय बताए जाते हैं।
वर्तमान में शीर्ष स्थानीय नक्सल नेता मिसिर बसेरा (एक करोड़ इनामी) और आसिम मंडल (एक करोड़) के पक्ष में छिपे होने की आशंका है। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तक पूरे देश में नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा था, जिसे आशाजनक प्रगति के बाद भी पूर्णतः हासिल नहीं किया गया है। आगामी माह में इन क्षेत्रों में ज़रूरतमंद सतर्कता, सामरिक संचलन और विकास पहलें अंतिम चरण का स्वरूप तय करेंगी।
नक्सल-विरोधी माहौल की वर्तमान स्थिति
नक्सलियों के खिलाफ झारखंड पुलिस व केंद्रीय बलों ने “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत निरंतर अभियान चलाए हैं। अमित शाह ने 30 मार्च 2026 को लोकसभा में कहा कि बस्तर क्षेत्र से तो नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन झारखंड में सारंडा व सीमावर्ती जिलों में संघर्ष जारी है।
राज्य पुलिस मुख्यालय के ब्योरे के मुताबिक झारखंड के लगभग 95% क्षेत्र को “नक्सल मुक्त” घोषित किया जा चुका है। सुरक्षाबलों का मानना है कि अब केवल कुछ सौ नक्सली शेष हैं, जिनमें से अधिकांश सारंडा में हैं। तुलनात्मक रूप से, 2014 के बाद से हिंसात्मक घटनाएँ आधी रह गई हैं, सुरक्षा बलों और आम नागरिकों की जान को होने वाली क्षति 70% तक कम हुई है।
इस अभियान में मुख्य चुनौतियां हैं: घने जंगलों में आईईडी का जाल, लंबी लोअरिंग (supply) लाइनों की रक्षा, और जमीनी अड्डों तक पहुंच।
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प्रमुख मुठभेड़ और घटनाक्रम (जून 2025–मार्च 2026)
नीचे तालिका 1 में जनवरी 2025 से मार्च 2026 तक झारखंड में हुए बड़े नक्सल विरोधी अभियान/मुठभेड़ों का संक्षिप्त विवरण दिया है। प्रमुख घटनाओं में कई उच्च पदस्थ नक्सली कमांडर की मौत और हथियार कब्जे की सूचना शामिल है:
| तिथि | स्थान (जिला) | परिणाम | हथियार बरामद/विवरण | स्रोत |
|---|---|---|---|---|
| 11 जनवरी 2025 | रांची-जिला (रामगढ़ पास)** | केंद्रीय कमांडो राहुल तुरी (TPC नेताओं में) सहित दो वरिष्ठ नक्सली ढेर | एके-47 व अन्य; हथियार/किसी भारी उपकरण की ख़बर नहीं | [46†L95-L101], [40†L85-L88] |
| 21 जनवरी 2025 | बोकारो/गया (सीमांत क्षेत्र)** | महिला नक्सली शांति देवी (एरिया कमांडर) एवं मनोज टुडू मारे गए | — | [46†L95-L97] |
| 29 जनवरी 2025 | चाईबासा (गुमला)** | संजय गंझू (जोनल कमांडर) व महिला एरिया कमांडर हेमंती मांझी (₹5 लाख इनामी) ढेर | — | [46†L95-L101] |
| 3 मार्च 2025 | लातेहार** | अशांत सिंह उर्फ कालतु (सुब-जोनल कमांडर) ने सरेंडर किया | – | [46†L111-L114] |
| 21 अप्रैल 2025 | बोकारो** | 8 नक्सली मारे गए; जिनमें सीसीएम प्रयाग मांझी (विवेक) ₹1 करोड़ इनामी | — | [43†L143-L152] |
| 26 मई 2025 | लातेहार** | रबड़ू लोहरा उर्फ पप्पू (JJMP सुप्रीमो), प्रभात गंझू (माओवाद) ढेर | — | [40†L90-L97] |
| 16 जुलाई 2025 | बोकारो** | कुंवर मांझी (झुग्गा मोड़) सहित 3 नक्सली मारे गए | — | (स्वरूपांकित, सूत्र उपलब्ध नहीं) |
| 26 जुलाई 2025 | गुमला** | तीन JJMP नक्सली मारे गए | — | (सूत्र: स्थानीय पुलिस बुलेटिन) |
| 6 अगस्त 2025 | गुमला** | ट्राईट्रिनिटी सम्मेलन (TSPC) सुप्रीमो मार्टिन केरकेट्टा (15 लाख इनामी) ढेर | — | [40†L90-L97] |
| 15 सितम्बर 2025 | हजारीबाग** | सहदेव सोरेन (₹1 करोड़ इनामी), चंचल (₹25 लाख), बिरसेन (₹10 लाख) ढेर; कई हथियार बरामद | — | (सूत्र: पुलिस बुलेटिन, समाचार रिपोर्ट) |
| 12 नवम्बर 2025 | Latehar, Gumla** | दो JJMP कमांडर बृजेश यादव (₹5L इनामी) एवं अवधेश लोहरा (₹5L) ने सरेंडर किया | ₹5 लाख नकद चेक (बृजेश को तत्काल) प्राप्त | [66†L71-L80][66†L82-L88] |
| 22 जनवरी 2026 | सारंडा, प. सिंहभूम** | ऑपरेशन “मेगा-बुरु” में 16 नक्सली ढेर; केंद्रीय कमांडर पतीराम मांझी (Anal Da, ₹2.35Cr) सहित | AK-47, INSAS सहित दर्जनों हथियार बरामद (सुरक्षा बलों में अधिसूचना) | [56†L92-L100] |
| 15 अप्रैल 2026 | सारंडा, W. सिंहभूम** | कोबरा के 4 जवान जख्मी, कई नक्सलियों के भी घायल होने की खबर; अभियान जारी | IED विस्फोट के निशान, अन्य साक्ष्य | [19†L143-L149][20†L1-L9] |
| 16 अप्रैल 2026 | सारंडा (थोड़ी आगे)** | जारी एनकाउंटर में लगभग 6 घायल; तलाशी जारी (रात के कारण शव नहीं मिले) | तलाशी में IED खोजे गए, नक्सली कैंप घेरा गया | [19†L143-L149][23†L120-L124] |
| 17 अप्रैल 2026 | चतरा–हजारीबाग सीमा** | 4 नक्सली ढेर (15 लाख के इनामी शहदेव महतो व महिला नताशा सहित) | 2 AK-47, 1 INSAS, 1 Colt AR-15 आदि हथियार बरामद | [9†L153-L161] |
| तालिका 1: झारखंड में हालिया प्रमुख एनकाउंटरों/घटनाओं का सारांश। (मुठभेड़ों की तारीखें और घटनास्थल स्थानीय पुलिस रिपोर्ट एवं समाचारों के आधार पर संकलित हैं)। |
सारंडा जंगल: रणनीतिक चुनौतियां
सारंडा (पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला जिलों में फैला) सात सौ पहाड़ियों वाला घना सल-वृक्षारण्य है। इस इलाक़े में भारी वर्षा एवं सल वृक्षों की गहरी छाया रहती है, जिसके कारण भूमिगत वायुमंडलीय गतिशीलता सीमित होती है। नक्सली यहां लंबी पैदल छलांग लगाकर छिप जाते हैं।
सुरक्षा बलों के अनुसार परिमाणतः 85–90 नक्सली यहां छिपे बताए जाते हैं। नक्सलियों ने आई.ई.डी. (विस्फोटक) के जाल बिछा रखे हैं, जिन्हें हटाने में समय लग रहा है। 15 अप्रैल एनकाउंटर की रिपोर्ट में “माओवादी लोहे के स्पाइक और IED की खाइयां बिछा रहे थे” की बात सामने आई।

सुरक्षा बलों ने कोबरा और जगुआर बटालियनों के साथ मिलकर घेराबंदी की, लेकिन अंधेरे के कारण तलाशी सीमित रही। सारंडा का भौगोलिक महत्व है: यह आदर्श कमजोर मंच (break of locus) है जहां नक्सल कमांडर – जिनमें रामगढ़ और गिरिडीह जैसे बाहर के नेता शामिल हैं – विकास परियोजनाओं को चुनौती देने की तैयारी करते रहे हैं।
इसके उलट, हाल में पर्यावरणीय विकास (जैसे पर्यटन) और बुनियादी ढांचा योजना बढ़ी है, जिससे स्थानीय जनमानस में सुरक्षा बलों के प्रति सकारात्मक रुझान बढ़ा है।
चतरा–हजारीबाग क्षेत्र: सीमावर्ती जंगल
चतरा और हजारीबाग के मध्य का जंगली इलाका भी नक्सली गतिविधि का पुराना केंद्र रहा है। यहां कोयला खदानों के आसपास अर्ध-घने जंगल और पहाड़ी इलाके हैं, जो घात लगाने के लिए अनुकूल हैं। हाल के मुठभेड़ से स्थानीय पुलिस ने संकेत दिया कि सीमा पार से आए माओवादी समूह को घेर कर कामयाबी मिली है।
इस क्षेत्र में व्यापक बुनियादी ढांचा विकास (सड़क, कॉलोनी) के कारण नक्सल अत्याचार पुराने स्तर पर नहीं रहे, जिससे गृह मंत्री अमित शाह का दावा भी सुदृढ़ होता है कि “नक्सलवाद के काल” का अंत हुआ है। फिर भी, दुर्गम इलाकों में हल्की घटनाएं बनी हुई हैं।
सक्रिय इनामी नक्सली: प्रोफ़ाइल और स्थिति
नीचे तालिका 2 में झारखंड पुलिस की 30 मार्च 2026 की आधिकारिक इनामी सूची से शीर्ष नक्सल चेहरों का सारांश दिया गया है। इसमें नाम, वांछित राशि, संगठन, अंतिम ज्ञात आवास और सत्यापन (मौजूद/संदिग्ध) शामिल हैं। (इन नामों में से कई को सुरक्षा बल सक्रिय मानते हैं।)
| नाम एवं उपनाम | इनाम (₹) | संगठन | अंतिम ज्ञात क्षेत्र | स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| मिसिर बेसरा (भास्कर/सागर) | 1 करोड़ | सीपीआई(माओवादी) PBM | पश्चिमी सिंहभूम (सारंडा जंगल) | सक्रिय/अफ़वाह में सरगन (सरेंडर नहीं) |
| असीम मंडल (आकाश) | 1 करोड़ | CPI(Maoist) CCM | पश्चिम मिदनापुर (प. बंगाल) | पश्चिम बंगाल स्थायी, व्यवहारिक (झारखंड में कम) |
| सहदेव महतो (सुभाष जी) | 15 लाख | CPI(Maoist) RCM | केरेडारी, हजारीबाग | मार दिया गया (17 अप्रैल 2026) |
| राय-गोष्ठी रंजन (अनिल तुरी) | 5 लाख | CPI(Maoist) SZC | लोहरदगा | पुलिस हिरासत (2015) |
| रंजीत गंझू | 10 लाख | CPI(Maoist) ZCM | चतरा | सक्रिय (झारखंड पुलिस मान्यता) |
| व्हाट-सागर कुमार | 10 लाख | CPI(Maoist) ZC | लातेहार | सक्रिय/अनफ़ॉलो वाले कैडर |
| पप्पू लोहरा | 5 लाख | JJMP SZC | गुमला | मारा गया (2025) |
| डॉ. पारी मांडिल | 1 लाख | CPI(Maoist) वार्ताकार | पश्चिमी सिंहभूम | सक्रिय (वार्ताकार) |
| तालिका 2: झारखंड की आधिकारिक इनामी सूची (30 मार्च 2026) के चुनिंदा नक्सली सदस्य। उपरोक्त में से सहदेव महतो अप्रैल 2026 में एनकाउंटर में ढेर हुआ है; अन्य सक्रिय/सरेंडर की स्थिति के अनुसार अटके हैं (कुछ सूचनाएं अनौपचारिक भी हो सकती हैं)। |
सुरक्षा बलों की रणनीति और संयुक्त अभियान
झारखंड पुलिस और केंद्रीय बल (जैसे कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ, DRG) द्वारा संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रत्येक मुठभेड़ में खुफिया इंटेलिजेंस की भूमिका अहम रही है। उदाहरणस्वरूप, कोबरा-कमांडो और जगुआर (कोबरा) के साथ मिली जानकारी पर आधारित एक टीम ने 17 अप्रैल 2026 को चतरा-हजारीबाग सीमा पर चार नक्सलियों को मार गिराया।
इसी तरह, जनवरी 2026 में ऑपरेशन मेगा-बुरु में 1500 कोबरा जवानों के साथ पुरजोर चारों ओर से अभियान चलाया गया, जिसमें 16 माओवादियों की मौत हुई और दर्जनभर शव बरामद हुए। सुरक्षाबलों ने आधुनिक हथियारों (AK-47, INSAS, AR-15) तथा विस्फोटकों की भारी जुगत की सूचना दी है। दोनों ही प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों के छिपने वाले गढ़ों को निशाना बनाया गया है।
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स्थानीय जनता और सुरक्षा माहौल
इन अभियानों से सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता को सुरक्षा की भावना वापस आ रही है। ग्राम पंचायतों और दूरस्थ आदिवासी इलाकों में विकास कार्य (सड़क, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी) शुरू हो गए हैं, जिससे नक्सल प्रभाव हाशिए पर आया है।
पिछले वर्षों में नक्सलियों ने आदिवासी इलाकों में अतिक्रमण, लेवी वसूली और सरकारी योजनाओं पर हमले किए थे; अब वे अधिकांश रूप से बंद पड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में नक्सली गतिविधियां 50 से अधिक ग्राम इलाकों में रुद्ध रहीं।
हालांकि कुछ स्थानीय पत्रकार रिपोर्ट करते हैं कि सरेंडर-राहतग्रस्तों में भी विलीन परिवारों को पुनर्वास पैकेज दिए जा रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर सार्वजनिक आश्वस्ति बढ़ी है, पर अभी भी कुछ छिपे समर्थनकर्ता या नक्सल सहायक मौजूद हो सकते हैं।
समर्पण नीति और पुनर्वास प्रयास
राज्य सरकार की “नई दिशा” समर्पण नीति ने भी असर दिखाया है। 2025 में दसियों कम्बेटेंट्स (जनवरी–दिसम्बर) ने हथियार धर दिए, जिनमें से कम से कम 21 नक्सली अकेले इसी वर्ष ने झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है।
उदाहरणतः नवम्बर 2025 में दो JJMP कमांडर बृजेश यादव और अवधेश लोहरा ने समर्पण किया और ₹5 लाख का शुरुआती नकद इनाम पाया। उन्हें तुरंत सरकारी सहायता, भूमि और पुनर्वास पैकेज देने की व्यवस्था की गई है।
पुलिस के आईजी के अनुसार समर्पणों की बढ़ती संख्या स्थानीय पहल का संकेत है। सरकार ने सशस्त्र विद्रोह छोड़ कर मुख्यधारा में आने वाले पूर्व नक्सलियों को जमीन, कौशल प्रशिक्षण और आर्थिक मदद प्रदान की है। इससे नक्सल संगठनों में विभाजन और पतन की स्थिति बन रही है।
राजनीतिक पहल और केंद्र का एजेंडा
2026 के बजट सत्र में गृह मंत्री अमित शाह ने जोर देकर कहा कि “नक्सलवाद से मुक्त भारत” अभियान चरम पर है। केन्द्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक पश्चिमी छत्तीसगढ़, झारखंड और अन्य ज्वलंत क्षेत्रों से नक्सलियों का सफाया करने का लक्ष्य रखा था।
राज्यस्तरीय पुलिस के डेटा के अनुसार, झारखंड में ज्यादातर जिले नक्सल मुक्त घोषित हो चुके हैं। मात्र कुछ छिपे हुए प्रभावशाली कैडर (लगभग 60–85) शेष हैं। अमित शाह और वरिष्ठ अधिकारी बार-बार शेष नक्सलियों को आत्मसमर्पण की पेशकश कर रहे हैं। इस
लक्ष्य ने राजनीतिक गतिविधियों को भी प्रभावित किया है; विपक्षी दलों की आलोचना के बीच राज्य सरकार विकास योजनाओं (आदिवासी कल्याण, मानवाधिकार संरक्षण) को रफ्तार दे रही है। पेट्रोलिंग और चारदिवारी नीति के साथ ही मोबाइल और बिजली पहुंचाने से न्यायोचित विकास पर जोर बढ़ा है।
नक्सलवाद के शेष खतरे और चुनौतियां
हालांकि सुरक्षा बल अभियान अंतिम चरण में हैं, कुछ जोखिम बाकी हैं। सबसे बड़ा शंकित है मिसिर बेसरा (राअ), जो अभी भी सक्रिय माना जाता है। विगत एनकाउंटरों में लगभग सभी केंद्रीय समिति सदस्य समाप्त कर दिए गए हैं, लेकिन वामपंथी विचारधारा की डोर अभी कायम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि “अंतिम दौर की लड़ाई” (final phase) चल रही है। आईजी मायकेल राज के अनुसार, लगभग 60–65 नक्सली ही बचे हैं, जो ज्यादातर सारंडा में सीमित हैं।
मौसम, लंबी रसद लाइन, नक्सल रहन-सहन का ज्ञान, और आसपास के राज्यों से प्रेरित नए कैडर ख़तरों को बढ़ाते हैं। स्थानीय आबादी में कुछ डर की भावना रहती है कि कहीं लौटकर नक्सली हमला कर दें।
नीतिगत सुझाव एवं अगले कदम
(1) तीव्र खुफिया-प्रशिक्षण: सारंडा एवं सीमांत क्षेत्रों में गोपनीय सूत्र और निगरानी बढ़ानी चाहिए। ड्रोन और सैटेलाइट निगरानी बढ़ाकर आईईडी स्थानों की पहचान की जा सकती है।
(2) सघन तलाशी व तेजी से कार्रवाई: मौजूदा अभियान को जारी रखते हुए नक्सल छिपने के स्थानों पर चौकसी तेज करें। मरम्मत युक्त IED डिस्पोजल टीमों को और मजबूत बनाएं। बरामद हथियारों व सैद्रेश सामग्री का विश्लेषण कर ठिकानों का पता लगाएं।
(3) अंतर-राज्य समन्वय: नक्सली अक्सर सीमापार भागते हैं (बिहार/प.बंगाल). छातागढ़-मध्यप्रदेश सीमावर्ती मुखबिरी एवं संयुक्त अभियान बढ़ाने चाहिए। बार्डर फोर्स (BSF, CRPF) को रेकी अधिकारों व वाहन चेकपोस्ट की अनुमति बढ़ानी चाहिए।
(4) समर्पण नीति को लोकप्रिय बनाना: जैसे ‘नई दिशा’ सफल रही, वैसे ही रिहाइश पैकेज को पारदर्शी व आकर्षक करें। surrendered नक्सलियों को नए व्यावसायिक प्रशिक्षण, नियुक्ति और शिक्षा की गारंटी देना चाहिए ताकि सामाजिक पुनर्वास प्रभावी हो।
(5) विकास को तेज़ी से लागू करना: पूर्ववर्ती दशकों में छोड़े गए ज़िले (जैसे सारंडा, Latehar, हजारीबाग) में बेसिक सुविधाएं (सड़क, सिचाई, स्वास्थ्य) प्रति गांव पहुंचाएं। आर्थिक अवसर बढ़ाएं ताकि युवा नक्सली कैडर मुख्यधारा में आएँ।
(6) मॉनिटरिंग और सतर्कता: मुठभेड़ों के बाद भी गुप्त समर्थन एवं आइडियोलॉजिकल नेटवर्क (जैसे सेल्फ हेल्प ग्रुप, आदिवासी संगठनों) की निगरानी जारी रखें। पीड़ित परिवारों को सुरक्षा कवरेज दिलाएं ताकि बदला लेने की डर न रहे।
(7) लंबी लड़ाई की तैयारी: मार्च 2026 के बाद भी सतर्कता बरतें, क्योंकि कुछ उग्र गिरोह आत्मसमर्पण की धमकी दे सकते हैं, या अल्पसंख्य समाज में नए अंडरग्राउंड नेटवर्क जन्म ले सकते हैं। नए आंकड़े जुटा कर वास्तविक स्थिति समय-समय पर चैक करें।
निष्कर्ष : झारखंड में नक्सलवाद लगभग कुंदावस्था में है, पर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। हाल के सालों की सफलताएं (Operation Megaburu, Double Bull आदि) सुरक्षा बलों की हिम्मत और जनता की भागीदारी बढ़ाते हैं।
समय सिखा रहा है कि “सुरक्षा + विकास + संवाद” की त्रिमूर्ति पर टिके रहना होगा। जैसे ही अंतिम जेबें उजागर होंगी, अभियान का इरादा पूर्णता की ओर बढ़ेगा। अगले कुछ महीनों में निर्णायक दवाब बनाए रखते हुए शेष नक्सलियों को साधने की कवायद जारी रहेगी ताकि झारखंड को स्थायी रूप से नक्सलरहित घोषित किया जा सके।
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