युद्ध के 10वें दिन इस्फहान में इजरायल का बड़ा प्रहार, 1332 मौतें; परमाणु ठिकानों पर कब्जे की फिराक में अमेरिका
Tehran/Tel Aviv : मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान और इजराइल के बीच सीधी जंग अब नेतृत्व को खत्म करने तक आ गई है। एक तरफ जहां ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह यह युद्ध अपनी मर्जी से नहीं बल्कि मजबूरी में लड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर इजरायली हमलों ने सीधे तौर पर ईरानी सत्ता के शीर्ष को निशाना बनाया है। ‘टाइम्स ऑफ इजराइल’ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल के एक हवाई हमले में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई घायल हो गए हैं।
यह घटना तब हुई है जब मुजतबा को बीती रात ही आधिकारिक तौर पर ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया था। यह हमला मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक भूचाल ला सकता है।
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‘जंग हमारी पसंद नहीं, आत्मरक्षा की मजबूरी है’ सोमवार को तेहरान में एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मौजूदा हालात पर देश का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “हम जो भी सैन्य कदम उठा रहे हैं, वह हमारी पसंद नहीं है। यह जंग देश पर जबरन थोपी गई है।”
जब बघाई से मौजूदा तनाव को कम करने और सीजफायर के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की संभावना पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। बघाई ने दो टूक शब्दों में कहा, “जब सैन्य टकराव जारी हो और आप पर हमले हो रहे हों, तो सीजफायर या मध्यस्थता की बात करना बेमानी है। इस समय हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता देश की संप्रभुता की रक्षा करना है। इसके अलावा किसी अन्य विषय पर चर्चा का सवाल ही पैदा नहीं होता।”
इजरायल और ईरान के बीच जारी सीधी जंग आज अपने 10वें दिन में प्रवेश कर गई है। रविवार को दोनों ओर से हुए भीषण हमलों के बाद, सोमवार को हालात और भी तनावपूर्ण हो गए हैं। इजरायली सेना ने सीधे ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जबकि ईरान ने खाड़ी देशों की ओर अपने हमलों का दायरा बढ़ा दिया है।
इस्फहान और तेहरान पर इजरायल का कहर इजरायली वायुसेना ने ईरान के इस्फहान एयरपोर्ट पर एक बड़ा और सटीक हमला किया है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) का दावा है कि इस एयरस्ट्राइक में ईरान का एक F-16 लड़ाकू विमान पूरी तरह से तबाह हो गया है।
हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं हैं। आज ईरान की राजधानी तेहरान में भी एक बड़े हमले की खबर है, जिसमें शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक 20 लोगों की मौत हो गई है। पिछले 10 दिनों से जारी अमेरिका और इजरायल के संयुक्त और लगातार हमलों के कारण ईरान के भीतर भारी तबाही मची है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक इन हमलों में ईरान में 1332 लोगों की जान जा चुकी है।
ईरान के परमाणु भंडार पर अमेरिका की नजर इस युद्ध के बीच सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर वाशिंगटन से आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए पंगु बनाने की योजना पर काम कर रहा है। बाइडन प्रशासन कथित तौर पर ईरान के परमाणु भंडार (Nuclear Stockpile) पर सीधा कब्जा करने या उसे पूरी तरह से नष्ट करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। अगर ऐसा होता है, तो यह युद्ध एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर पहुँच जाएगा जहाँ से वापसी लगभग असंभव होगी।
खाड़ी देशों तक फैली युद्ध की लपटें ईरान केवल इजरायल पर ही पलटवार नहीं कर रहा है, बल्कि उसने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की रणनीति अपना ली है। खाड़ी देशों में ईरान के हमले लगातार जारी हैं।
- दुबई, कुवैत और बहरीन: ईरान ने इन प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक केंद्रों पर भी हमले किए हैं, जिससे पूरे गल्फ रीजन में दहशत का माहौल है।
- जॉर्डन: इस बीच, जॉर्डन ने दावा किया है कि उसे 100 से अधिक हमलों और हवाई घुसपैठ का सामना करना पड़ा है, जिसे उसने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणालियों के जरिए नाकाम करने की कोशिश की है।
ग्लोबल वॉर्निंग: अमेरिका और तुर्किए की सख्त चेतावनी युद्ध के वैश्विक प्रभाव को देखते हुए कूटनीतिक धमकियों का दौर भी तेज हो गया है।
- रूस को चेतावनी: अमेरिका ने रूस को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वह इस युद्ध में किसी भी प्रकार की खुफिया या सीक्रेट मिलिट्री जानकारी ईरान के साथ साझा न करे।
- तुर्किए का रुख: दूसरी ओर, तुर्किए (Turkey) ने भी इस संघर्ष में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए ईरान को चेतावनी दी है। अंकारा ने मिसाइल हमलों के बढ़ते दायरे को लेकर तेहरान से कड़ा विरोध जताया है।
हालात पल-पल बदल रहे हैं और मध्य पूर्व का यह संकट अब एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो चुका है, जिसके विश्वव्यापी आर्थिक और भू-राजनीतिक परिणाम होने तय हैं।
पड़ोसी देशों पर हमले से ईरान का इनकार इस ब्रीफिंग के दौरान ईरान ने खुद को एक जिम्मेदार क्षेत्रीय ताकत दिखाने का भी प्रयास किया। बघाई ने उन सभी अंतरराष्ट्रीय दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान ने तुर्किये, साइप्रस और अजरबैजान पर हमले की योजना बनाई है या उन्हें अंजाम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया, “पिछले सप्ताह या हाल के दिनों में हमारी जमीन से इन देशों की दिशा में कोई भी सैन्य कार्रवाई या हमला शुरू नहीं किया गया है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान देकर ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यह युद्ध केवल इजराइल तक सीमित रहे और नाटो (NATO) सदस्य या अन्य पड़ोसी देश इसमें न कूदें।

नेतृत्व का संकट: अली खामेनेई की मौत और मुजतबा पर हमला ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर नेतृत्व संकट से गुजर रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के एक संयुक्त एवं सटीक हमले में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी।
84 वर्षीय अली खामेनेई पिछले 35 सालों (1989 से) से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज थे। 1979 की इस्लामिक क्रांति के प्रमुख चेहरों में से एक, अली खामेनेई ने 1981 से 1989 तक राष्ट्रपति के रूप में भी कार्य किया था। रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद वे सर्वोच्च नेता बने थे। ईरानी संविधान के अनुसार, ‘सुप्रीम लीडर’ देश का सबसे शक्तिशाली पद है, जिस पर केवल ‘अयातुल्ला’ (वरिष्ठ शिया धर्मगुरु) की पदवी वाला व्यक्ति ही बैठ सकता है। सेना, न्यायपालिका और विदेशी मामलों पर उनका पूर्ण नियंत्रण होता है।
अली खामेनेई की मौत के बाद सत्ता में आए शून्य को भरने के लिए बीती रात ही उनके बेटे, मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था। मुजतबा लंबे समय से पर्दे के पीछे रहकर ईरानी राजनीति और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के साथ समन्वय कर रहे थे। लेकिन पद संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर उनके घायल होने की खबर ने यह साबित कर दिया है कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) और सेना ईरान के भीतर कितनी गहराई तक पैठ बना चुकी है।
आगे क्या? नए सुप्रीम लीडर के घायल होने से ईरान के भीतर और उसके समर्थित गुटों (हिजबुल्लाह, हूतियों आदि) में बौखलाहट बढ़ना तय है। ईरान अब इसका कड़ा जवाब देने की कोशिश कर सकता है, जिससे न केवल खाड़ी देशों में बल्कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति (कच्चे तेल की कीमतें) और अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।
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