इंदौर में EV चार्जिंग बनी ‘काल’, डिजिटल लॉक ने छीनी 8 जिंदगियां, बिहार के परिवार के 6 सदस्यों की भी मौत

Anand Kumar
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Indore : मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में आज तड़के एक रबर कारोबारी के घर में लगी भीषण आग ने सुरक्षा के आधुनिक दावों की पोल खोल दी है। टाटा पंच EV की चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट ने देखते ही देखते तीन मंजिला मकान को ‘फर्नेस’ (भट्टी) बना दिया। इस दर्दनाक हादसे में घर के मुखिया मनोज पुगलिया और उनकी गर्भवती बहू सहित कुल 8 लोगों की मौत हो गई।

तड़के करीब साढ़े तीन बजे का वक्त था। इंदौर के बंगाली चौराहे के पास स्थित ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे। तभी एक तेज धमाके ने पूरे इलाके को हिला दिया। जब तक लोग समझ पाते, एक तीन मंजिला मकान आग के गोले में बदल चुका था।

मौके पर पहुंचने पर सबसे पहले जो दिखा, वह था – काले धुएं से घिरा आसमान, चारों तरफ अफरा-तफरी और घर के भीतर से आती चीखें, जो कुछ ही मिनटों में खामोशी में बदल गईं।


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चार्जिंग पॉइंट से उठी चिंगारी ने ली 8 जिंदगियां

पुलिस और फायर अधिकारियों की शुरुआती जांच में सामने आया है कि घर के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार चार्ज हो रही थी। इसी दौरान चार्जिंग पॉइंट पर शॉर्ट सर्किट हुआ और अचानक आग भड़क उठी।

आग ने पहले कार को अपनी चपेट में लिया और फिर तेजी से घर के अंदर फैल गई। ग्राउंड फ्लोर से शुरू हुई लपटें कुछ ही मिनटों में तीनों मंजिलों तक पहुंच गईं।

घर के अंदर रखे ज्वलनशील पॉलिमर केमिकल ने आग को और तेज कर दिया।

इंदौर
आग
जानकारी देते परिवार के सदस्य सौरभ पुगलिया।

बिहार से आए रिश्तेदार भी हुए शिकार

मृतकों में से 6 लोग मनोज पुगलिया के रिश्तेदार थे, जो महज एक दिन पहले (मंगलवार को) बिहार के किशनगंज से आए थे। इनमें विजय सेठिया भी शामिल थे, जो जबड़े के कैंसर का ऑपरेशन कराने इंदौर आए थे। नियति का क्रूर मजाक देखिए कि जो शख्स जिंदगी की जंग जीतने इंदौर आया था, वह सपरिवार इस अग्निकांड की भेंट चढ़ गया।

मृतकों की सूची:

  1. मनोज पुगलिया (65) – घर के मुखिया
  2. सिमरन पुगलिया (30) – गर्भवती बहू
  3. विजय सेठिया (65) – रिश्तेदार (किशनगंज, बिहार)
  4. सुमन सेठिया (60) – विजय की पत्नी
  5. छोटू सेठिया (22) – विजय का बेटा
  6. राशि सेठिया (12) – रिश्तेदार
  7. टीनू (35) – रिश्तेदार
  8. तनय (8) – बच्चा

4 लोग घायल हुए

  1. सुनीता – पति मनोज पुगलिया
  2. सौरभ (30) – पिता मनोज पुगलिया
  3. सोमिल – पिता मनोज पुगलिया
  4. हर्षित (25) – पिता मनोज पुगलिया

सिलेंडरों के धमाकों से दहला इलाका, मकान का हिस्सा ढहा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के कुछ ही देर बाद एक के बाद एक कई धमाके सुनाई दिए। बाद में पता चला कि घर में रखे गैस सिलेंडर आग की चपेट में आ गए थे। लगातार हुए विस्फोटों से मकान का एक हिस्सा भी ढह गया। आसपास के घरों के लोग दहशत में बाहर निकल आए।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि कई लोगों ने इसे पहले भूकंप या किसी बड़े हादसे के तौर पर महसूस किया।


डिजिटल लॉक बने मौत का कारण, बाहर निकलने का रास्ता बंद

इस हादसे में सबसे खतरनाक स्थिति तब बनी जब घर में लगे डिजिटल लॉक सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया।

आग लगने के बाद बिजली सप्लाई ठप हो गई और इलेक्ट्रॉनिक लॉक खुल नहीं पाए। अंदर सो रहे लोग बाहर निकलने के लिए दरवाजों तक पहुंचे, लेकिन लॉक जाम हो चुके थे।

बचाव दल को बाद में लोहे की ग्रिल काटकर और दरवाजे तोड़कर अंदर जाना पड़ा। लेकिन तब तक कई लोग दम घुटने और जलने से अपनी जान गंवा चुके थे।


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“जब हम पहुंचे, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था”

मौके पर मौजूद एक स्थानीय निवासी ने बताया – “हम लोग मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे, तभी देखा कि कार और घर दोनों में आग लगी है। हमने शोर मचाया। कुछ लोग बाहर निकल आए थे, लेकिन अंदर कई लोग फंसे रह गए। आग इतनी तेज थी कि पास जाना भी मुश्किल था।”

एक अन्य पड़ोसी ने कहा कि फायर ब्रिगेड को सूचना देने के बावजूद मौके पर पहुंचने में काफी देर हो गई, जिससे आग और फैल गई।


एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत, बच्चा भी शामिल

इस हादसे में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू सिमरन सहित कुल 8 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में बिहार के किशनगंज से आए 6 रिश्तेदार भी शामिल हैं, जो एक पारिवारिक कार्यक्रम के लिए इंदौर पहुंचे थे। मरने वालों में 8 साल का मासूम तनय भी है। घटनास्थल से एक बच्चे का शव मलबे में दबा मिला, जिसे निकालने में राहत टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी।


इलाज के लिए आए थे, हादसे में खत्म हो गया पूरा परिवार

मृतकों में शामिल विजय सेठिया जबड़े के कैंसर का इलाज कराने इंदौर आए थे। उनके साथ उनकी पत्नी, बेटा, बहन और बहनोई भी थे।

लेकिन इलाज से पहले ही यह हादसा उनके पूरे परिवार को खत्म कर गया।


घर में रखे थे केमिकल और 10 से ज्यादा सिलेंडर

पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, घर में पॉलीमर से जुड़े ज्वलनशील केमिकल और 10 से ज्यादा गैस सिलेंडर रखे थे। इन्हीं कारणों से आग ने विकराल रूप ले लिया और बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया।


घायलों की हालत गंभीर, जांच के आदेश

हादसे में 4 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में घायलों का इलाज चल रहा है।

घटनास्थल पर पहुंचे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे ‘अलार्मिंग’ बताते हुए कहा कि EV के बढ़ते दौर में चार्जिंग पॉइंट्स के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाएगी और नयी SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तय की जाएगी।

प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और विशेषज्ञों की टीम गठित करने की बात कही गई है।


पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा, फिर भी नहीं बदले नियम

इसी तरह का हादसा अक्टूबर 2025 में भी इंदौर में कांग्रेस नेता प्रवेश अग्रवाल के घर हुआ था, जब डिजिटल लॉक न खुलने से जान गई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि शहरी घरों में नई तकनीकों के इस्तेमाल के साथ सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लागू नहीं किया जा रहा है।


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तकनीक और लापरवाही का खतरनाक मेल

इंदौर का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई स्तरों पर विफलता की कहानी है। ईवी चार्जिंग की सुरक्षा, घर में ज्वलनशील सामग्री का भंडारण, डिजिटल लॉक सिस्टम की निर्भरता और आपातकालीन तैयारी—सभी ने मिलकर इस त्रासदी को और बड़ा बना दिया।

यह घटना एक सख्त चेतावनी है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग बिना ठोस सुरक्षा व्यवस्था के किया गया तो वह सुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा साबित हो सकती है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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