रामगढ़/बोकारो: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को बोकारो जिले के कसमार पहुंचे। यहां उन्होंने बरलंगा–नेमरा–कसमार सड़क के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उनकी पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। सड़क का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री बाजारटांड़ चौक स्थित एक चाय-पकौड़ी की दुकान पर रुके। यहां उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ बैठकर चाय-पकौड़ी का आनंद लिया। खास बात यह रही कि कल्पना सोरेन ने खुद चाय बनाई।
मुख्यमंत्री और विधायक का यह सहज अंदाज स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने लोगों के साथ बैठकर बातचीत की। इसके बाद वे सेवाती घाटी भी पहुंचे और वहां की स्थिति तथा विकास की संभावनाओं का जायजा लिया।
कल्पना सोरेन ने खुद बनाई चाय, सीएम ने लोगों के साथ की बातचीत
सड़क निरीक्षण के बाद हेमंत सोरेन बाजारटांड़ चौक स्थित कुणाल जायसवाल की चाय-पकौड़ी की दुकान पर पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री ने आम लोगों के बीच बैठकर चाय-पकौड़ी खाई। उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने खुद चाय बनाई।
मुख्यमंत्री और विधायक का इस तरह स्थानीय लोगों के बीच समय बिताना दौरे का खास आकर्षण रहा। किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के बजाय यह दौरा सड़क निर्माण और क्षेत्र की विकास संभावनाओं पर केंद्रित रहा।
26.5 किलोमीटर लंबी सड़क का किया निरीक्षण
बरलंगा–नेमरा–कसमार सड़क लगभग 26.5 किलोमीटर लंबी है। इसका निर्माण झारखंड राज्य उच्च पथ प्राधिकरण की ओर से कराया जा रहा है। यह सड़क रामगढ़ जिले के नेमरा और बोकारो जिले के कसमार क्षेत्र को जोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन सड़क की स्थिति का जायजा लिया। सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद आसपास के ग्रामीण इलाकों में आवागमन आसान होने की उम्मीद है। इससे ग्रामीणों को बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और कारोबार तक पहुंचने में सहूलियत मिल सकती है।
नेमरा से कसमार, खैराचातर, पिरगुल और बोकारो जिले के दूसरे प्रमुख इलाकों तक पहुंच भी पहले की तुलना में सुविधाजनक हो सकती है।
शिबू सोरेन के पैतृक गांव को जोड़ती है सड़क
इस सड़क परियोजना का ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व भी है। नेमरा दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पैतृक गांव है। झारखंड आंदोलन के संघर्षों से जुड़े इस इलाके में बेहतर सड़क संपर्क लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
बरलंगा से नेमरा होते हुए कसमार तक सड़क बनने से रामगढ़ और बोकारो जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय आवागमन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिल सकता है।
मां के निधन के बाद नेमरा में थे हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी मां रूपी सोरेन के निधन के बाद करीब 14 दिनों तक अपने पैतृक गांव नेमरा में रहे। इस दौरान वे परिवार के साथ क्रियाकर्म और पारंपरिक रस्मों में शामिल हुए।
रविवार को नेमरा में संस्कार भोज का आयोजन हुआ था, जिसमें राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और दिवंगत रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सोमवार को मुख्यमंत्री ने रजरप्पा में दामोदर और भैरवी नदियों के संगम पर संथाली परंपरा के अनुसार अपनी मां की अस्थियों का विसर्जन किया।
पारिवारिक और धार्मिक रस्मों के बाद मुख्यमंत्री मंगलवार को विकास कार्यों का जायजा लेने निकले। कसमार में सड़क निरीक्षण और स्थानीय लोगों के साथ चाय-पकौड़ी का आनंद लेने की तस्वीरें उनके दौरे का प्रमुख आकर्षण रहीं।
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