नेमरा में मुख्यमंत्री ने सुनी लोगों की समस्याएं, गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत मिला चिकित्सा अनुदान
रामगढ़/नेमरा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रामगढ़ जिले के एक छह वर्षीय बच्चे अनूप बेसरा के कान के इलाज के लिए 10 लाख रुपये की चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई है। मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत आवश्यक प्रक्रियाएं 48 घंटे के भीतर पूरी कर अनूप के पिता रामकिशुन बेसरा को 10 लाख रुपये का चेक सौंपा गया।
अनूप का इलाज तमिलनाडु के वेल्लौर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) में चल रहा है। चिकित्सकों ने उसके आंतरिक कान से संबंधित समस्या के उपचार के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रक्रिया की सलाह दी है, जिस पर काफी खर्च आने की बात सामने आई थी।
नेमरा में मुख्यमंत्री से मिले थे अनूप के पिता
जानकारी के मुताबिक, रामगढ़ जिले के बेराटांड़ के भरेच नगर निवासी रामकिशुन बेसरा ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नेमरा में मुलाकात की थी। उन्होंने अपने बेटे के इलाज में होने वाले भारी खर्च के कारण आर्थिक सहायता का अनुरोध किया था।
मुख्यमंत्री ने मामले को संज्ञान में लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। इसके बाद रामगढ़ जिला प्रशासन ने चिकित्सा अनुदान से संबंधित औपचारिकताएं तेजी से पूरी कीं और 48 घंटे के भीतर 10 लाख रुपये का चेक उपलब्ध करा दिया।
मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना से मिली सहायता
यह आर्थिक मदद मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत दी गई है। इस योजना का उद्देश्य गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे पात्र मरीजों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
अनूप के इलाज के लिए मिली इस सहायता से परिवार को अस्पताल में आगे का उपचार कराने में आर्थिक सहयोग मिलेगा।
नेमरा में लोगों की समस्याएं सुन रहे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों अपनी दिवंगत माता रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म के सिलसिले में अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर उनसे मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं, आवेदन स्वीकार किए और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
परिवार को इलाज में मिलेगी राहत
अनूप के पिता रामकिशुन बेसरा ने बताया कि आर्थिक सहायता मिलने से उनके बेटे के इलाज में काफी मदद मिलेगी। परिवार के लिए इलाज पर आने वाला भारी खर्च बड़ी चुनौती था।
48 घंटे के भीतर चिकित्सा अनुदान की प्रक्रिया पूरी होने से परिवार को आगे के उपचार की व्यवस्था करने में सहायता मिली है।
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