Hazaribagh : जिले के चुरचू प्रखंड के गोंदवार गांव में गुरुवार देर रात हाथियों के झुंड ने हमला कर छह लोगों की जान ले ली। घटना अंगो थाना क्षेत्र की है। मृतकों में एक वर्ष के बच्चे से लेकर 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग शामिल हैं। रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुए इस हमले ने पूरे इलाके को दहला दिया है।
मृतकों की पहचान
हमले में जान गंवाने वालों में सुमन कुमारी (26), धनेश्वर राम (52), सूरज राम (50), सविता देवी (25) तथा दो छोटे बच्चे—अनुराग राम (1) और संजना कुमारी (3 माह)—शामिल हैं। सूरज राम, सविता देवी, अनुराग राम और संजना कुमारी एक ही परिवार के सदस्य थे। घटना के समय सभी अपने घरों में सो रहे थे।
घर में घुसकर हमला, गेट उखाड़ा
स्थानीय लोगों के अनुसार पांच हाथियों का झुंड गांव में घुस आया। एक घर का गेट उखाड़ दिया गया और अंदर प्रवेश कर सो रहे लोगों को कुचल दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले एक माह से हाथियों का विचरण जारी था और खतरे की आशंका बनी हुई थी।
‘खिड़की से कूदकर बची जान’
हमले में जीवित बचे रोहित राम ने बताया कि हाथियों ने पहले घर का दरवाजा तोड़ा। बाहर निकलते ही एक हाथी सामने दिखा। उन्होंने पिता को अंदर जाने को कहा। हाथी ने उन्हें चपेट में लेने की कोशिश की, तो घर में रखी कढ़ाही से मारकर खुद को बचाया और खिड़की से कूदकर दूसरे रास्ते से भागे। शोर मचाकर आसपास के लोगों को जगाया। उन्होंने कुल पांच हाथियों को गांव में देखा।
प्रशासन और वन विभाग की प्रतिक्रिया
पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ विकास कुमार उज्ज्वल ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वन विभाग पीड़ित परिवारों के साथ है और हरसंभव सहायता दी जाएगी। प्रशासन ने भी त्वरित मुआवजा और राहत की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया है।
लगातार बढ़ रहा वन्यजीव-मानव संघर्ष
हजारीबाग और आसपास के क्षेत्रों, खासकर गोमिया प्रखंड में हाल के महीनों में हाथियों के हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ दिन पहले ही गोमिया क्षेत्र में हाथियों के हमले में पांच लोगों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के क्षरण, भोजन और आवास की कमी तथा हाथियों के पारंपरिक मार्गों पर मानव बसावट बढ़ने से टकराव की घटनाएं तेज हुई हैं।
स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
- हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान हो
- सौर फेंसिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया जाए
- रात में पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए
- त्वरित मुआवजा वितरण सुनिश्चित हो
यह घटना केवल एक आपदा नहीं, बल्कि वन्यजीव प्रबंधन और ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।