दिवाली के खरीदारी सीजन में कारोबार प्रभावित होने की आशंका, CTI ने 10 नवंबर के बाद रैली कराने का किया आग्रह; भाजपा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाकर कांग्रेस पर साधा निशाना
नई दिल्ली। चुनाव आयोग में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे भारत की सबसे बड़ी रैलियों में से एक बनाने का दावा किया है। वहीं, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापार संगठन ने आशंका जताई है कि त्योहारों के व्यस्त खरीदारी सीजन में रैली से दिल्ली के कारोबार को भारी नुकसान हो सकता है।
CTI की चिंता, दिवाली के कारोबार पर पड़ सकता है असर
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी को लिखे पत्र में कहा है कि 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली के कारण रामलीला मैदान के आसपास के थोक और खुदरा बाजारों में व्यापार प्रभावित हो सकता है। धनतेरस और दिवाली से पहले बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में बड़े राजनीतिक आयोजन के कारण यातायात बाधित होने और आवाजाही पर पाबंदियां लगने से कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
CTI ने कांग्रेस से अपील की है कि रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर न पड़े। संगठन की मुख्य चिंता बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच और व्यापारियों के कारोबार को लेकर है।
कांग्रेस का दावा—देश की सबसे बड़ी रैलियों में से एक होगी
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने शनिवार को बताया कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली चुनाव आयोग की कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आयोजित की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि यह भारत की सबसे बड़ी रैलियों में से एक होगी। रैली के साथ मार्च निकालने की भी तैयारी है।
प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार को कांग्रेस मुख्यालय में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर रैली की तैयारियों की समीक्षा की थी। कांग्रेस का कहना है कि इस आयोजन में INDIA गठबंधन के घटक दल पूरी ताकत के साथ शामिल होंगे।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने रैली के आयोजन के लिए अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी कर दिया है।
SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष का विरोध
कांग्रेस की यह रैली चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच हो रही है। इससे पहले 30 सितंबर को INDIA गठबंधन ने SIR के मुद्दे पर मिलकर काम करने और रैलियों के साथ ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ आयोजित करने की योजना पर सहमति जताई थी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहले कहा था कि विपक्षी दलों के बीच चुनाव ईवीएम के बजाय मतपत्रों से कराने की मांग को लेकर सहमति बनी है। इसके बाद कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली करने की घोषणा की थी।
भाजपा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाया
कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर भाजपा ने भी हमला तेज कर दिया है। भाजपा नेता गौरव भल्लभ ने रैली की तारीख को 1984 के सिख विरोधी दंगों से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सिख समुदाय के प्रति अपनी संवेदनशीलता को लेकर सवालों के घेरे में है। उन्होंने पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की।
भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कांग्रेस पर SIR के मुद्दे से आगे बढ़कर सत्ता परिवर्तन की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम में इस तरह की रैली आयोजित करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर भी तंज कसा और रैली के फ्लॉप होने का दावा किया।
रैली से पहले सियासी और कारोबारी बहस तेज
एक तरफ कांग्रेस चुनाव आयोग की कथित अनियमितताओं के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ CTI ने त्योहारों के दौरान कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताते हुए तारीख बदलने की मांग की है। भाजपा ने भी रैली को लेकर कांग्रेस पर राजनीतिक हमला बोला है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस व्यापारियों की चिंता को देखते हुए रैली की तारीख में कोई बदलाव करती है या 1 नवंबर को ही रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन करेगी।
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