चतरा: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ कथित मुठभेड़ में मारे गए टीएसपीसी कमांडर ब्रजेश गंझू का शव सोमवार को उनके पैतृक गांव लावालौंग पहुंचा। शव पहुंचने के बाद परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। मृतक के भाई और सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू, पत्नी उषा देवी और बेटे ऋषिकेश ने पुलिस के मुठभेड़ के दावे को खारिज करते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
परिजनों का आरोप है कि ब्रजेश गंझू को पहले पकड़ा गया और बाद में वाराणसी ले जाकर उनकी हत्या कर दी गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पूर्व विधायक भाई बोले- मुठभेड़ नहीं, साजिश के तहत हत्या
ब्रजेश गंझू के भाई गणेश गंझू ने आरोप लगाया कि यह मुठभेड़ नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या का मामला है। उन्होंने झारखंड सरकार से मामले की सीबीआई और मानवाधिकार आयोग से जांच कराने की मांग की।
गणेश गंझू ने कहा कि केवल नक्सलियों पर इनाम घोषित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि आखिर लोग नक्सली गतिविधियों की ओर क्यों जाते हैं।
उन्होंने बताया कि ब्रजेश वर्ष 2010 में पंचायत के मुखिया रहे थे और बाद में पंचायत समिति सदस्य भी बने। परिवार का सवाल है कि अगर वह लगातार नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थे, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत जनप्रतिनिधि कैसे बने।
यूपी एटीएस का दावा- संदिग्धों से मुठभेड़ हुई
दूसरी ओर, यूपी एटीएस का कहना है कि वाराणसी के रामनगर क्षेत्र में संदिग्धों को रोकने के दौरान गोलीबारी हुई। एजेंसी के अनुसार जवाबी कार्रवाई में ब्रजेश गंझू घायल हुए और अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
एटीएस के मुताबिक घटनास्थल से हथियार, कारतूस और नकदी भी बरामद की गई थी।
इस तरह मामले में एक तरफ पुलिस और एटीएस का मुठभेड़ का दावा है, जबकि दूसरी तरफ परिवार इसे गिरफ्तारी के बाद की गई हत्या बता रहा है। इन दोनों दावों की स्वतंत्र जांच से ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पत्नी बोलीं- 10 साल से सामान्य जीवन जी रहे थे
ब्रजेश गंझू की पत्नी उषा देवी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उन्होंने दावा किया कि उनके पति पिछले करीब 10 वर्षों से घर से बाहर रहकर सामान्य जीवन जी रहे थे और उनका नक्सली गतिविधियों से कोई संबंध नहीं था।
पत्नी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि ब्रजेश नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थे, तो उन्हें चुनाव लड़ने का प्रमाणपत्र कैसे मिला और वह जनप्रतिनिधि कैसे बने।
उषा देवी ने दावा किया कि ब्रजेश ने गांव में स्कूल-कॉलेज खुलवाने में भूमिका निभाई थी और बड़ी संख्या में गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में मदद की थी।
परिवार का यह भी आरोप है कि ब्रजेश की मौत की जानकारी उन्हें प्रशासन से पहले मीडिया के माध्यम से मिली। पत्नी ने कहा कि न्याय नहीं मिलने पर परिवार हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ेगा।
बेटे ने भी पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
ब्रजेश गंझू के बेटे ऋषिकेश ने भी पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने कथित तौर पर पदोन्नति हासिल करने के लिए उनके पिता की हत्या की।
उन्होंने आशंका जताई कि संभव है कि ब्रजेश ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया हो और बाद में उन्हें कथित फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया हो। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ब्रजेश गंझू पर था इनाम
पुलिस और जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के मुताबिक ब्रजेश गंझू को टीएसपीसी का शीर्ष कमांडर और लंबे समय से वांछित बताया गया था। उन पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और एनआईए की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
अब परिवार की मांग है कि वाराणसी में हुई कार्रवाई की पूरी परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच हो। परिवार विशेष रूप से यह जानना चाहता है कि ब्रजेश की गिरफ्तारी से लेकर उनकी मौत तक वास्तव में क्या हुआ, घटनास्थल पर क्या साक्ष्य मिले और पुलिस की कार्रवाई किस परिस्थितियों में हुई।
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