सिमडेगा: झारखंड की पूर्व मंत्री और सिमडेगा की पूर्व विधायक विमला प्रधान का शुक्रवार 18 सितंबर की रात करीब 8:40 बजे रांची के सैमफोर्ड अस्पताल में निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की खबर सामने आते ही सिमडेगा समेत झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
विमला प्रधान सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र से 2009 और 2014 में भाजपा के टिकट पर लगातार दो बार विधायक चुनी गई थीं। वह वर्ष 2009 से 2019 तक सिमडेगा विधानसभा का प्रतिनिधित्व करती रहीं। विधायक रहते हुए उन्होंने झारखंड सरकार में समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास तथा पर्यटन जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
सामाजिक कार्यों से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
विमला प्रधान ने सक्रिय राजनीति में आने से पहले सामाजिक क्षेत्र में काम किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने वर्ष 1989 से सामाजिक कार्यों में सक्रियता शुरू की और वर्ष 1994 में भाजपा से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने पार्टी संगठन और सिमडेगा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई।
वर्ष 2009 में भाजपा ने उन्हें सिमडेगा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। चुनाव जीतकर वह पहली बार विधानसभा पहुंचीं और सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2014 में उन्होंने फिर सिमडेगा सीट से जीत दर्ज की और लगातार दूसरी बार विधायक बनीं।
2017 में मिला था उत्कृष्ट विधायक सम्मान
विधानसभा में उनके कार्यकाल के दौरान वर्ष 2017 में उन्हें उत्कृष्ट विधायक सम्मान से नवाजा गया था। विधानसभा में उन्होंने क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए। उनके निधन के बाद उनके सामाजिक और ग्रामीण सरोकारों से जुड़े कामों को भी याद किया जा रहा है।
2019 में नहीं मिला था भाजपा का टिकट
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में विमला प्रधान को भाजपा ने सिमडेगा से उम्मीदवार नहीं बनाया। उस चुनाव में कांग्रेस के भूषण बाड़ा विजयी हुए। इसके बाद भी विमला प्रधान का सिमडेगा से राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव बना रहा तथा वह सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं।
परिवार में तीन पुत्र
विमला प्रधान के पति का पहले ही निधन हो चुका था। उनके तीन पुत्र हैं। उनके बड़े पुत्र मनीष प्रधान न्यायपालिका में सेवा दे रहे हैं, जबकि दूसरे पुत्र राकेश रविकांत भाजपा से जुड़े हुए हैं। तीसरे पुत्र का नाम गुड्डू बताया गया है।
विमला प्रधान के निधन से सिमडेगा की राजनीति में उनके करीब एक दशक लंबे विधायक कार्यकाल और मंत्री पद से जुड़े सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
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