Ranchi : झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर झामुमो अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। 2 फरवरी को दुमका में झामुमो के स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए भाषण के एक क्लिप को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोपों की झड़ी लगा दी। मरांडी के हमले के बाद झारखंड की राजनीति में आदिवासी मुद्दे को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।
असम दौरे के बयान पर भड़के बाबूलाल मरांडी
दरअसल, झामुमो के 47वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने असम दौरे का जिक्र करते हुए कहा था कि असम के चाय बागानों में ले जाए गए झारखंड के आदिवासी आज भी पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें न तो आदिवासी का अधिकार मिला है और न ही सामाजिक सम्मान। मुख्यमंत्री ने कहा था कि असम के आदिवासियों की लड़ाई में झारखंड उनके साथ खड़ा है और जरूरत पड़ी तो पूरे झारखंड के आदिवासियों को असम लेकर जाएंगे।
“आदिवासी आपकी जागीर नहीं”
मुख्यमंत्री के इसी बयान को लेकर बाबूलाल मरांडी ने कड़ा एतराज जताया। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासी किसी की जागीर नहीं हैं, जिन्हें जब चाहें, जहां चाहें ले जाकर राजनीतिक भीड़ का हिस्सा बना दिया जाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आदिवासी उन बेबस विधायकों की तरह नहीं हैं, जिन्हें बसों में भरकर रायपुर भेज दिया गया था।
शिबू सोरेन पर भी साधा निशाना
बाबूलाल मरांडी ने इस मुद्दे पर दिवंगत शिबू सोरेन का नाम लेते हुए भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि चंद करोड़ रुपये में आदिवासी समाज की भावनाओं और झारखंड आंदोलन को बेचने वाली सोच से बाहर निकलने की जरूरत है। मरांडी के मुताबिक, आदिवासी समाज अब अपने स्वाभिमान, पहचान और अधिकारों को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग हो रहा है।
“हेमंत सरकार में आदिवासी असुरक्षित”
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में आदिवासी समाज असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी युवक सूर्या हांसदा की हत्या कर दी गई, रांची में आदिवासी नेता सुभाष मुंडा और खूंटी में सोमा मुंडा की भी हत्या हुई। इसके अलावा रिम्स-2 के नाम पर आदिवासियों की जमीन हड़पने की साजिश रची गई और सिरमटोली में सरना स्थल की पवित्रता भंग करने का प्रयास किया गया। मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि संथाल परगना से लेकर कोल्हान तक बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने का खेल चल रहा है।
पेसा एक्ट के नाम पर विश्वासघात का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पेसा एक्ट के नाम पर आदिवासियों के साथ विश्वासघात किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कन्वर्जन माफियाओं को खुश करने के लिए स्वशासन और रूढ़िवादी परंपराओं की परिभाषा बदली गई। जल, जंगल और जमीन को खनन माफियाओं के हाथों सौंप दिया गया, जिससे आदिवासी समाज के अधिकारों को गहरा नुकसान पहुंचा है।