पढ़ाई में बार-बार डाउट? झारखंड के पूर्व IAS अधिकारियों ने बनाया AI ऐप Prepzy, बदल देगा पढ़ाई का तरीका

Anand Kumar
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CBSE छात्रों के लिए बड़ी राहत: Prepzy ऐप से पढ़ाई, टेस्ट और डाउट सॉल्विंग एक ही जगह

Anand Kumar
स्कूल की पढ़ाई के साथ कोचिंग, ट्यूशन और ऑनलाइन कोर्स आज अधिकांश छात्रों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। इसके बावजूद कई बार छात्र और अभिभावक इस दुविधा में रहते हैं कि पढ़ाई वास्तव में समझ में आई है या केवल पाठ्यक्रम पूरा हुआ है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी समस्या यह है कि छात्रों के पास अपनी पढ़ाई की प्रगति को स्पष्ट रूप से मापने का कोई व्यवस्थित तरीका नहीं होता।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा के झारखंड कैडर के दो पूर्व अधिकारियों डॉ एस. शिवेंदु और उनकी पत्नी मृदुला सिन्हा ने तकनीकी विशेषज्ञ अरुण रेड्डी के साथ मिलकर एक एआई आधारित शैक्षणिक प्लेटफॉर्म विकसित किया है। प्रेपजी (Prepzy) नाम का यह मोबाइल एप छात्रों के लिए डिजिटल पर्सनल ट्यूटर की तरह काम करता है और पढ़ाई, अभ्यास, मूल्यांकन तथा डाउट सॉल्विंग की सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है।

शिक्षा और नीति से जुड़ा अनुभव
प्रेपजी (Prepzy) प्लेटफॉर्म के सह-संस्थापक डॉ एस. शिवेंदु ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद से शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और झारखंड में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
प्रशासनिक सेवा के दौरान भी उनका झुकाव शोध और अकादमिक गतिविधियों की ओर रहा। बाद में उन्होंने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया से अर्थशास्त्र में पीएचडी की और 2008 में आईएएस सेवा से वीआरएस लेकर अकादमिक क्षेत्र में कदम रखा। वर्तमान में वे अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा में प्रोफेसर हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन तथा साइबर सुरक्षा जैसी उभरती तकनीकों के आर्थिक प्रभावों पर शोध कर रहे हैं।

प्रेपजी (Prepzy) की सह-संस्थापक मृदुला सिन्हा भी आइएएसअधिकारी रह चुकी हैं। रांची में पली-बढ़ीं मृदुला सिन्हा ने रूरल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद गांवों में विकास कार्यक्रमों पर काम किया और बाद में आईएएस सेवा में आईं। झारखंड सरकार में उन्होंने उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
सेवानिवृत्ति के बाद भी वे शिक्षा और नीति के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सलाहकार के रूप में कार्य कर रही हैं।
इस पहल के तीसरे सह-संस्थापक अरुण रेड्डी हैं। चंडीगढ़ में पले-बढ़े रेड्डी ने अमेरिका के प्रतिष्ठित कार्नेगी मेलॉन विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में शिक्षा प्राप्त की और बाद में तकनीकी प्रबंधन तथा वित्त के क्षेत्र में काम किया।

छात्रों की दो बड़ी समस्याओं की पहचान
इन तीनों संस्थापकों ने अपने अनुभवों के आधार पर शिक्षा व्यवस्था में दो प्रमुख समस्याओं की पहचान की।
पहली, छात्रों को यह समझने का स्पष्ट तरीका नहीं मिलता कि वे वास्तव में कितना सीख रहे हैं।
दूसरी, जिज्ञासु छात्रों को शुरुआती स्तर पर शोध और नवाचार के अवसर बहुत सीमित मिलते हैं।
इन्हीं समस्याओं के समाधान के रूप में प्रेपजी (Prepzy) और ग्लोबल-आर हब (Global-R Hub) जैसे प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं।

Prepzy क्या है और कैसे काम करता है
यह एक एआई आधारित डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है, जिसे इस तरह तैयार किया गया है कि यह छात्रों के लिए पर्सनल ट्यूटर की तरह काम करे।
यदि छात्र किसी सवाल को हल करते समय उलझ जाते हैं, तो वे अपने हाथ से लिखे हुए उत्तर को स्कैन करके ऐप पर अपलोड कर सकते हैं। एआई आधारित सिस्टम कुछ ही सेकंड में उस उत्तर का विश्लेषण कर समाधान और सुझाव उपलब्ध कराता है।
इसके साथ ही प्लेटफॉर्म छात्र के उत्तरों का मूल्यांकन भी करता है और यह बताता है कि गलती कहां हुई है और उसे किस तरह सुधारा जा सकता है।
प्रेपजी (Prepzy) में तीन हजार से अधिक वीडियो लेक्चर और लगभग डेढ़ लाख अभ्यास प्रश्न उपलब्ध हैं। छात्र पहले वीडियो के माध्यम से विषय को समझते हैं, फिर क्विज़ के जरिए अपनी समझ का परीक्षण करते हैं और उसके बाद लिखित उत्तर देकर अपनी तैयारी का मूल्यांकन करा सकते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया का विश्लेषण छात्र के डैशबोर्ड पर दिखाई देता है, जिससे वह अपनी प्रगति और कमजोरियों को स्पष्ट रूप से समझ सकता है।

Prepzy

सामान्य एआई से अलग प्रणाली
प्रेपजी (Prepzy) के संस्थापकों का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म सामान्य एआई टूल्स से अलग तरीके से काम करता है। जहां सामान्य एआई केवल सीधे उत्तर प्रदान करते हैं, वहीं Prepzy छात्रों को चरणबद्ध तरीके से समस्या हल करना सिखाता है।
इसमें एक विशेष ‘पेडागॉजिकल रूल इंजन’ लगाया गया है, जो यह सुनिश्चित करता है कि एआई द्वारा दिया गया मार्गदर्शन स्कूल के पाठ्यक्रम और शिक्षण के सही तरीकों के अनुरूप हो।
इसका उद्देश्य छात्रों को केवल उत्तर देना नहीं, बल्कि विषय पर मजबूत पकड़ विकसित कराना है।

Prepzy App क्या है? 200 रुपये महीने में मिलेगा AI ट्यूटर, डाउट सॉल्विंग और टेस्ट एक साथ

कम लागत में शिक्षा
इस प्लेटफॉर्म की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी अपेक्षाकृत कम लागत है। कक्षा 6 से 11 तक के छात्रों के लिए सालाना सदस्यता शुल्क लगभग 2400 रुपये रखा गया है, जबकि कक्षा 12 के छात्रों के लिए यह शुल्क लगभग 3800 रुपये है।
संस्थापकों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक से अधिक छात्रों तक सुलभ बनाना है।

नए उपयोगकर्ताओं के लिए 15 दिनों का निःशुल्क ट्रायल भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि छात्र और अभिभावक प्लेटफॉर्म की सुविधाओं को समझ सकें।

शोध से जोड़ने की पहल
प्रेपजी (Prepzy) के साथ-साथ संस्थापकों ने ग्लोबल-आर हब (Global-R Hub) नामक एक और प्लेटफॉर्म भी विकसित किया है। इसका उद्देश्य छात्रों को शुरुआती स्तर पर शोध और नवाचार से जोड़ना है।

इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्र दुनिया भर के पीएचडी शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के साथ काम कर सकते हैं और वास्तविक शोध परियोजनाओं का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। कुछ मामलों में छात्रों को अपने शोध कार्य को अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित करने का अवसर भी मिल सकता है।

बदलती शिक्षा व्यवस्था में नई पहल

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव के कारण शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है।
ऐसे समय में केवल जानकारी याद करना पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों के लिए यह भी जरूरी होगा कि वे अपनी सीखने की प्रक्रिया को समझें, आलोचनात्मक सोच विकसित करें और नई चुनौतियों के अनुरूप खुद को तैयार करें।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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