Ranchi : झारखंड के पूर्व कृषि मंत्री और कांग्रेस से निष्कासित नेता योगेंद्र साव के आवास ध्वस्तीकरण को लेकर विवाद गहरा गया है। उनकी बेटी, पूर्व विधायक एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने शनिवार को रांची प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर NTPC और हजारीबाग प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
अंबा प्रसाद ने कहा कि उनके पिता का घर अवैध तरीके से और बिना मुआवजा दिए गिरा दिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि उनका परिवार लंबे समय से विस्थापन और मुआवजे के मुद्दे पर आवाज उठाता रहा है।
बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप
प्रेस वार्ता में अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक बुलडोजर चलाकर आवास ध्वस्त कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
अंबा प्रसाद ने कहा कि इस मामले को लेकर वे न्यायालय का रुख करेंगी।
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अधिग्रहण प्रक्रिया और मुआवजे पर सवाल
अंबा प्रसाद ने NTPC के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि वर्ष 2008 में जमीन का अधिग्रहण हो चुका था।
उन्होंने कहा कि अधिग्रहण और मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया में कई विसंगतियां हैं। भवन निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई किए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि इस प्रकार का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा ही लिया जाना चाहिए।
कॉर्पोरेट और प्रशासन पर गठजोड़ का आरोप
अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि NTPC, CCL और अन्य कंपनियां प्रशासन के साथ मिलकर रैयतों के अधिकारों का हनन कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि उनका परिवार पिछले करीब 15 वर्षों से विस्थापितों को मुआवजा और पुनर्वास दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है, जिसके कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
2013 भूमि अधिग्रहण कानून के उल्लंघन का आरोप
उन्होंने कहा कि 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों से रैयतों को वंचित किया जा रहा है।
अंबा प्रसाद के अनुसार, कई मामलों में पुराने प्रावधानों के आधार पर मुआवजा तय करने की कोशिश की जा रही है, जिसका विरोध किया गया है।
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हाईकोर्ट में लंबित मामलों के बीच कार्रवाई
अंबा प्रसाद ने बताया कि मुआवजा से जुड़े छह मामलों में 83 रैयतों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और मामले अभी विचाराधीन हैं।
इसके बावजूद संपत्ति पर कार्रवाई जारी रहना न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई का दावा
अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि 19 मार्च 2026 को करीब 2000 पुलिस बल की मौजूदगी में उनके घर को ध्वस्त किया गया।
उन्होंने कहा कि उस समय उनके पिता दिल्ली में थे, जबकि उनकी मां को घर से बाहर निकालकर थाना ले जाया गया।
अंबा प्रसाद के अनुसार, घर के भीतर रखे सामान को निकालने का अवसर भी नहीं दिया गया, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ।
निष्कासन पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान अंबा प्रसाद ने अपने पिता योगेंद्र साव को कांग्रेस से निष्कासित किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि घर ध्वस्तीकरण के बाद दिए गए बयानों के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं है।