
Jamshedpur : जमशेदपुर जिले से एक सनसनीखेज अपहरण का मामला सामने आया है। आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (ASIA) के उपाध्यक्ष और शहर के चर्चित उद्योगपति देवांग गांधी के 24 वर्षीय बेटे कैरव गांधी का अपहरण कर लिया गया है। अपहरणकर्ताओं ने इंटरनेट कॉलिंग के जरिए परिवार से 5 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को देवांग गांधी आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर में एक अहम बैठक में व्यस्त थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर एक विदेशी नंबर +62-831-94765544)) से लगातार 8–10 बार व्हाट्सएप कॉल आई, लेकिन बैठक के कारण कॉल रिसीव नहीं हो सकी।
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दोपहर करीब दो बजे जब वे घर लौटे और बेटे कैरव से संपर्क करने की कोशिश की, तो उसका मोबाइल बंद मिला। जांच करने पर पता चला कि कैरव न तो बैंक पहुंचा था और न ही अपनी कंपनी।
इसके बाद जब उसी विदेशी नंबर से आए मैसेज को पढ़ा गया, तो परिजनों के होश उड़ गए। संदेश में कैरव के अपहरण की पुष्टि करते हुए फिरौती की मांग की गई थी।
शुरुआती लापरवाही, फिर दर्ज हुई FIR
परिजनों का आरोप है कि शुरुआती दौर में जब अपहरण की आशंका जताई गई, तब पुलिस ने इसे केवल लापता व्यक्ति का मामला मानकर गंभीरता नहीं दिखाई। हालांकि फिरौती संदेश और तकनीकी साक्ष्य सामने आने के बाद बिष्टुपुर थाना ने तत्परता दिखाई।
सीएच एरिया इनर सर्किल रोड निवासी देवांग गांधी के बयान पर अज्ञात अपहरणकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
7 टीमें गठित, झारखंड समेत 3 राज्यों में छापेमारी
कैरव गांधी की सकुशल बरामदगी के लिए झारखंड पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी है।
पुलिस की 7 विशेष टीमें झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
कैरव की कार को जब्त कर फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि फिंगरप्रिंट्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए अपराधियों तक पहुंचा जा सके। इसके साथ ही कॉल डंप और मोबाइल सर्विलांस के जरिए इलाके में सक्रिय नंबरों का डेटा खंगाला जा रहा है।
पुलिस को शक है कि इस वारदात के पीछे अखिलेश गिरोह से जुड़े किसी पूर्व गुर्गे का हाथ हो सकता है, जो फिलहाल बिहार से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है।
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टोल प्लाजा और CCTV फुटेज खंगाले जा रहे
इस हाई-प्रोफाइल अपहरण कांड में जमशेदपुर के साथ-साथ सरायकेला पुलिस भी सक्रिय है। कांदरबेड़ा, पाटा (रांची मार्ग) और गालूडीह (कोलकाता मार्ग) के टोल प्लाजा और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अपहरणकर्ता किस दिशा में फरार हुए।
पुलिस की एक टीम लगातार परिवार के संपर्क में है, जबकि दूसरी टीम साइबर सेल की मदद से इंडोनेशियाई नंबर के वास्तविक स्रोत और नेटवर्क की जांच कर रही है। शहर के सभी एग्जिट प्वाइंट्स पर सघन वाहन जांच अभियान भी तेज कर दिया गया है।