रांची। झारखंड में रंगदारी, धमकी और गोलीबारी के जरिए आपराधिक नेटवर्क चलाने के आरोपों का सामना कर रहे दो गैंगस्टर राहुल सिंह और राहुल दुबे के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। दोनों पर विदेश में रहकर झारखंड में अपने गिरोह का संचालन करने और स्थानीय अपराधियों के जरिए कारोबारियों, ठेकेदारों तथा निर्माण कंपनियों को निशाना बनाने के आरोप हैं। झारखंड पुलिस की अनुशंसा पर सीबीआई के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी की गई है।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी विदेश में रहकर डिजिटल माध्यमों और अंतरराष्ट्रीय फोन नंबरों के जरिए झारखंड में सक्रिय अपने गुर्गों के संपर्क में थे। इनके गिरोह पर रंगदारी मांगने और रकम नहीं मिलने पर फायरिंग कर दहशत फैलाने के आरोप हैं। खासकर कोयलांचल और औद्योगिक क्षेत्रों में कारोबारियों तथा ठेकेदारों को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
विदेश में बैठकर चला रहे थे रंगदारी का नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, राहुल सिंह और राहुल दुबे विदेश में रहकर स्थानीय अपराधियों, शूटरों और हथियार सप्लायरों के जरिए अपना नेटवर्क संचालित कर रहे थे। इनके निशाने पर कोयला कारोबारी, बड़े व्यवसायी, ठेकेदार और कंस्ट्रक्शन कंपनियां थीं।
पुलिस का कहना है कि गिरोह के सदस्य कारोबारियों से रंगदारी मांगते थे और रकम नहीं मिलने पर गोलीबारी जैसी घटनाओं के जरिए दबाव बनाने की कोशिश करते थे। गिरफ्तार अपराधियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के दौरान विदेश से गिरोह संचालित किए जाने से जुड़े तथ्य सामने आए।
रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद अब इंटरपोल के सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ दोनों आरोपियों की तलाश में समन्वय किया जा सकेगा।
अमन साहू के एनकाउंटर के बाद राहुल सिंह ने संभाली गिरोह की कमान
राहुल सिंह पहले कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू के गिरोह से जुड़ा हुआ था। मार्च 2025 में पलामू में पुलिस मुठभेड़ के दौरान अमन साहू के मारे जाने के बाद राहुल सिंह ने गिरोह की कमान संभाल ली थी।
पुलिस के अनुसार, उसके गिरोह का नेटवर्क रांची, रामगढ़, पलामू, बोकारो, चतरा, हजारीबाग और लातेहार सहित कई जिलों में सक्रिय रहा है। गिरोह पर विकास परियोजनाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कारोबारियों को निशाना बनाकर रंगदारी वसूलने के आरोप हैं।
पुलिस स्थानीय स्तर पर गिरोह के शूटरों, सहयोगियों और हथियार सप्लायरों के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है।
हजारीबाग होटल फायरिंग के बाद चर्चा में आया राहुल दुबे का गिरोह
दूसरी ओर, राहुल दुबे का गिरोह भी झारखंड पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। 29 अक्टूबर की रात हजारीबाग के मटवारी स्थित एके इंटरनेशनल होटल पर अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की थी।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर राहुल दुबे के नाम से एक पोस्ट सामने आया था, जिसमें हमले की जिम्मेदारी लेने और होटल संचालक को धमकी देने की बात कही गई थी।
इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 30 अक्टूबर को मुठभेड़ के बाद गिरोह के पांच कथित शूटरों और हथियार सप्लायर जियाउल हबीब को गिरफ्तार किया था।
रेड कॉर्नर नोटिस के बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पर नजर
रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद दोनों आरोपियों को विदेश से भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। हालांकि, इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस अपने आप में गिरफ्तारी का अंतरराष्ट्रीय वारंट नहीं होता। यह सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से किसी वांछित व्यक्ति का पता लगाने और संबंधित देश के कानून के तहत संभावित अस्थायी गिरफ्तारी का अनुरोध है।
इसके बाद संबंधित देश के कानून और भारत के साथ प्रत्यर्पण व्यवस्था के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
झारखंड पुलिस की रणनीति अब विदेश में बैठे कथित सरगनाओं तक पहुंचने के साथ-साथ उनके स्थानीय नेटवर्क को कमजोर करने की है। रेड कॉर्नर नोटिस के बाद अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय से इस कार्रवाई को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह भी पढ़ें – राहुल दुबे गैंग पर रांची पुलिस का शिकंजा, छह अपराधी गिरफ्तार; चार पिस्टल और कारतूस बरामद