झारखंड के वे IAS अफसर जो भ्रष्टाचार के आरोप में पहुंचे जेल: ACB, CBI और ED की कार्रवाई का पूरा डीटेल

Anand Kumar
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Ranchi : झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम ने एक नया मोड़ ले लिया है। राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 20 मई 2025 को एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए तत्कालीन उत्पाद सचिव और वर्तमान में प्रधान सचिव स्तर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को शराब नीति में अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह पहली बार है जब ACB ने किसी सेवा में कार्यरत उच्चपदस्थ IAS अधिकारी के विरुद्ध सीधे कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया है।

अलग झारखंड राज्य के गठन के बाद से अब तक कुल छह आईएएस अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ़्तार हो चुके हैं। ये सीधे यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा क्वालीफाई करके आइएएस बने हैं। वै अनिल कुमार सिंह जैसे एक-आध प्रमोटी आइएएस भी जेल यात्रा कर आये हैं लेकिन हम यहां सीधे वैसे आइएएस अफसरों की चर्चा करेंगे, जो डायरेक्ट आइएएस बने और जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे।   

झारखंड में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की चर्चा तो आम है. झारखंड के एसीबी पर इस बात के लिए भी उंगली उठायी जाती थी कि उसकी कार्रवाई दारोगा, सिपाही, राजस्व कर्मी और ज्यादा से ज्यादा सीओ, बीडीओ तक सीमित रही थी। जबकि सजल चक्रवर्ती से लेकर छविरंजन तक सभी गिरफ्तारियां केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और ED ने की थी. यह पहली बार है कि ACB ने सीधे एक टॉप लेवल आइएस अफसर को जांच के दायरे में लिया है। दिलचस्प तथ्य यह है कि इन छह आईएएस अधिकारियों सजल चक्रवर्ती, डॉ प्रदीप कुमार, सियाराम प्रसाद सिन्हा, पूजा सिंघल, छविरंजन और विनय कुमार चौबे में सजल चक्रवर्ती, डॉ प्रदीप कुमार, छविरंजन और विनय चौबे रांची के डीसी रह चुके हैं।
आइये जानते हैं कौन हैं ये छह आईएएस अधिकारी जो भ्रष्टाचार के अलग-अलग आरोपों में गिरफ्तार हो चुके हैं।

1. सजल चक्रवर्ती – चाईबासा कोषागार से निकले 33.70 करोड़

झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती पर 1992-95 के दौरान हुए बहुचर्चित चारा घोटाले में गहरा संलिप्तता का आरोप है। उस समय वे चाईबासा के उपायुक्त थे। सीबीआई की विशेष अदालत ने यह पाया कि कोषागार से अवैध रूप से ₹33.70 करोड़ की निकासी की गयी थी, जिसमें चक्रवर्ती की भूमिका संदिग्ध पाई गई। कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराकर पांच वर्षों की कैद और ₹4 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि, पहले झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें बरी किया था, लेकिन सीबीआई ने फिर से फैसले को चुनौती दी। सजल चक्रवर्ती अब इस दुनिया में नहीं हैं।

2. डॉ. प्रदीप कुमार – दवा खरीद घोटाले में कथित घालमेल

पूर्व स्वास्थ्य सचिव डॉ प्रदीप कुमार पर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) के अंतर्गत दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में भारी अनियमितताओं का आरोप है। आरोपों के अनुसार, कई वर्षों तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दवा की खरीद की गई, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ। ईडी ने जांच के दौरान राजस्थान, रांची और कोलकाता में स्थित उनकी करोड़ों की संपत्तियाँ जब्त कीं। इसके अतिरिक्त उनके परिजनों की संपत्तियाँ भी जांच के घेरे में हैं। फिलहाल वे जमानत पर हैं, लेकिन केस की सुनवाई चल रही है।

3. सियाराम प्रसाद सिन्हा – दवा भंडारण में अनियमितता

1988 बैच के पूर्व स्वास्थ्य सचिव सियाराम प्रसाद सिन्हा को भी एनआरएचएम घोटाले में सह-आरोपी बनाया गया। जांच में सामने आया कि 2008-09 के दौरान राज्य की रांची इकाई ने आवश्यकता से अधिक और बिना प्रक्रिया के महंगी दवाएं निजी एजेंसियों से खरीदीं। इससे राज्य को ₹100 करोड़ से अधिक की क्षति हुई। सिन्हा को सीबीआई ने गिरफ्तार कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। बाद में उन्हें जमानत मिली, मगर मामला अब भी विशेष अदालत में विचाराधीन है।

4. पूजा सिंघल – मनरेगा फंड की लूट का आरोप

2000 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को मनरेगा योजना के करोड़ों रुपये के दुरुपयोग के मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। आरोपों के अनुसार, उनके सहारे चलाए गए फर्जी बिलों और टेंडर प्रक्रियाओं से लगभग ₹19.31 करोड़ की नकदी की जब्ती हुई। ईडी ने उनके दफ्तर और आवासों से नकदी के अलावा कई डिजिटल सबूत भी बरामद किए। करीब 28 महीने जेल में रहने के बाद उन्हें 7 दिसंबर 2024 को बीएनएस कानून के तहत जमानत मिली। वर्तमान में वे सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव पद पर कार्यरत हैं, लेकिन मुकदमा अब भी अदालत में लंबित है।

4. छवि रंजन – ज़मीन की दलाली में अफसर की भूमिका

रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन पर सरकारी जमीन की अवैध बिक्री और दस्तावेजों की हेराफेरी जैसे गंभीर आरोप हैं। बरियातू में सेना की भूमि और चेशायर रोड की प्राइम लोकेशन वाली सरकारी भूमि की फर्जी रजिस्ट्री में उनकी भूमिका को लेकर ईडी ने उन्हें 4 मई 2023 को गिरफ्तार किया। कोर्ट ने एक मामले में उन्हें जमानत दी, लेकिन दूसरे में उनका आवेदन खारिज कर दिया गया। वे फिलहाल रांची के उसी होटवार जेल में बंद हैं, जहां विनय चौबे को रखा गया है।
6. अनिल कुमार – शिक्षक भर्ती में दस्तावेजों की गड़बड़ी

झारखंड प्रशासनिक सेवा से आईएएस बने अनिल कुमार पर साहिबगंज जिले में 2012-14 के बीच शिक्षक नियुक्ति में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ का आरोप है। जब यह मामला दोबारा खुला तो पाया गया कि नियुक्तियों की सूची ही गायब कर दी गयी थी। सीजेएम कोर्ट ने उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया, जिसके बाद उन्होंने आत्मसमर्पण किया। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज की और फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला लोकायुक्त व ACB के संयुक्त जांच के अंतर्गत है।

7. विनय कुमार चौबे – शराब नीति में घोटाले का बड़ा चेहरा

1999 बैच के वरिष्ठ आईएएस विनय कुमार चौबे पर आरोप है कि उन्होंने झारखंड की नयी शराब नीति के कार्यान्वयन में गंभीर अनियमितताएं कीं। एसीबी की प्रारंभिक जांच के अनुसार विनय चौबे सचिव (उत्पाद) रहते हुए छत्तीसगढ़ स्थित शराब सिंडिकेट के साथ साठगांठ में शामिल पाये गये। 20 मई 2025 को उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। उनके साथ आबकारी विभाग के अन्य अधिकारी भी आरोपित हैं, और जांच में अब प्रवर्तन निदेशालय भी सक्रिय है।

हालांकि एसीबी ने रांची के उपायुक्त रहे दो और पूर्व आइएएस अधिकारियों एसएन वर्मा एवं सुधीर प्रसाद के खिलाफ जमीन घोटाले में नामजद प्राथमिकी दर्ज की थी। लेकिन बाद में दोनों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें राहत मिली थी।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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