लालू बोले – तेजप्रताप से नाराज नहीं, अब परिवार के साथ रहेगा बेटा, तेजस्वी-राबड़ी रहे दूर

Patna : मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में एक भावुक और सियासी मोड़ आया। जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेजप्रताप यादव ने अपने पटना आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया, जिसमें आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शामिल हुए। करीब 8 महीने बाद लालू परिवार में तेजप्रताप की ‘वापसी’ के संकेत मिले हैं। लालू ने कहा कि वे तेजप्रताप से नाराज नहीं हैं और बेटा अब परिवार के साथ ही रहेगा। हालांकि, छोटे भाई तेजस्वी यादव और मां राबड़ी देवी इस भोज में नहीं पहुंचे।
तेजप्रताप ने अपने सरकारी आवास पर पारंपरिक दही-चूड़ा भोज रखा। लालू यादव भोज में पहुंचे और बेटे को आशीर्वाद दिया। मीडिया से बातचीत में लालू ने कहा, “हम तेजप्रताप से नाराज नहीं हैं। परिवार में मतभेद होते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब दूरी नहीं। बेटे को हमेशा आशीर्वाद रहेगा। वो परिवार के साथ ही रहेंगे।”
यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 8 महीने पहले तेजप्रताप की गर्लफ्रेंड के साथ फोटो वायरल होने के बाद लालू ने उन्हें परिवार और आरजेडी से बाहर कर दिया था। उस विवाद के बाद तेजप्रताप ने अपनी अलग पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी अलग सिंबल पर लड़े।
भोज में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, बड़े मामा प्रभुनाथ यादव, साधु यादव और चेतन आनंद सहित कई नेता शामिल हुए। हालांकि, तेजस्वी और राबड़ी की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी।
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भोज के दौरान तेजप्रताप ने कहा कि “तेजस्वी राजद का विलय जनशक्ति जनता दल में कर दें। लालू प्रसाद की असली पार्टी जेजेडी ही है।” उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के खिलाफ लड़ेगी और बिहार में एमएलसी चुनाव भी लड़ेगी। दिल्ली नगर निगम चुनाव में भी उनकी पार्टी उतरेगी। उन्होंने पूरे बिहार की यात्रा पर निकलने की बात कही, लेकिन तारीख बाद में बताई जाएगी।
यह घटना लालू परिवार में रिश्तों की ‘नरमी’ का संकेत दे रही है। लालू की मौजूदगी और आशीर्वाद को कई लोग परिवार की एकता का संदेश मान रहे हैं। हालांकि, तेजस्वी-राबड़ी की गैरहाजिरी से साफ है कि पूरी तरह से रिश्ते सामान्य नहीं हुए। राजनीतिक नजरिए से यह बिहार में नए समीकरणों की शुरुआत हो सकती है, जहां तेजप्रताप अपनी अलग पहचान बनाए रखते हुए परिवार से निकटता बढ़ा रहे हैं।
आरएलजेपी प्रमुख पशुपति कुमार परस ने इसे ‘नए समीकरणों’ का संकेत बताया और कहा कि “परिवार में बिखराव खत्म हो रहा है और बिहार की राजनीति में नया मोड़ आएगा।”मामला अब भी सियासी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। क्या यह सिर्फ पारिवारिक मिलन है या बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर? समय बताएगा।
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