रांची। झारखंड में ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को धनबाद, देवघर और गिरिडीह के मुख्य डाकघरों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद तीनों जिलों में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गईं। सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad), डॉग स्क्वॉड और खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चलाया।
कई घंटे तक चली गहन तलाशी के दौरान किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध विस्फोटक या आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली। हालांकि प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है।
कुछ मिनटों में पूरे सिस्टम में मच गया हड़कंप
धमकी भरा ई-मेल मिलते ही तीनों शहरों के मुख्य डाकघरों को एहतियातन खाली कराया गया। कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया तथा पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर चप्पे-चप्पे की तलाशी ली गई।
राहत की बात यह रही कि तलाशी अभियान के दौरान कोई विस्फोटक नहीं मिला, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।
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पहले अदालतें, अब डाकघर बने निशाना
यह पहली बार नहीं है जब झारखंड में इस तरह की धमकी मिली हो। पिछले कुछ महीनों में राज्य के कई जिला न्यायालयों और अन्य सरकारी संस्थानों को भी ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं।
लगातार मिल रही इन धमकियों के कारण हर बार सुरक्षा एजेंसियों को बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाना पड़ता है। अब तक अधिकांश मामलों में कोई विस्फोटक नहीं मिला है, लेकिन हर धमकी प्रशासन के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बन रही है।
सबसे बड़ा सवाल—आखिर ‘ई-मेल वाला’ कौन है?
लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद अब तक किसी भी मामले में ई-मेल भेजने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं हो सकी है। जांच एजेंसियां ई-मेल के तकनीकी स्रोत, आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल की पड़ताल कर रही हैं।
साइबर विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ये धमकियां किसी एक व्यक्ति या समूह की ओर से भेजी जा रही हैं या फिर किसी बड़े साइबर नेटवर्क का हिस्सा हैं। फिलहाल जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रही हैं।
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