रांची: दक्षिण पूर्व रेलवे के रांची रेल मंडल में एसी कोचों में यात्रियों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले कंबल, बेडशीट, तकिया, फेस टॉवेल और पिलो कवर की चोरी तथा क्षति का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जनवरी 2022 से अप्रैल 2026 तक मंडल में 9,31,410 लिनेन आइटम चोरी या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। देशभर के रेल मंडलों में यह आंकड़ा दूसरा सबसे अधिक है।
सबसे अधिक नुकसान बीकानेर रेल मंडल में दर्ज किया गया है, जहां 25.76 लाख लिनेन आइटम गायब हुए हैं। इसके बाद रांची (9.31 लाख) और दिल्ली रेल मंडल (8.21 लाख) का स्थान है।
2025 रहा सबसे खराब साल
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 रांची रेल मंडल के लिए सबसे खराब साबित हुआ। इस वर्ष अकेले 2,50,439 लिनेन आइटम चोरी या क्षतिग्रस्त हुए, जो वर्ष 2024 की तुलना में 30.87 प्रतिशत अधिक है।
वहीं, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच ही 1,18,048 लिनेन आइटम गायब हो चुके हैं, जिससे समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सबसे ज्यादा चोरी फेस टॉवेल और बेडशीट की
चार वर्षों से अधिक की अवधि में सबसे अधिक नुकसान फेस टॉवेल (3,87,708) का हुआ। इसके बाद बेडशीट (2,89,447), पिलो कवर (2,00,419), कंबल (35,301) और तकिए (18,535) गायब या क्षतिग्रस्त हुए।
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देश में सबसे अधिक चोरी वाले रेल मंडल
- बीकानेर रेल मंडल – 25.76 लाख आइटम
- रांची रेल मंडल – 9.31 लाख आइटम
- दिल्ली रेल मंडल – 8.21 लाख आइटम
वर्षवार नुकसान

यात्रियों से रेलवे की अपील
रांची रेल मंडल की सीनियर डीसीएम श्रेया सिंह ने यात्रियों से रेलवे की सुविधाओं का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रेलवे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। यदि यात्री इन सुविधाओं का दुरुपयोग नहीं करेंगे तो सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
चोरी सिर्फ रेलवे की नहीं, हमारी भी है
ट्रेन से बेडशीट, टॉवेल या कंबल उठाकर घर ले जाना कई लोग “यादगार” या “हक” समझते हैं, जबकि यह सीधे-सीधे सार्वजनिक संपत्ति की चोरी है। रांची रेल मंडल में 9.31 लाख लिनेन आइटम का गायब होना सिर्फ रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि इसका बोझ अंततः ईमानदार यात्रियों और करदाताओं पर पड़ता है।
रेलवे जितनी जिम्मेदारी से सुविधाएं उपलब्ध कराता है, उतनी ही जिम्मेदारी यात्रियों की भी है कि वे इनका दुरुपयोग न करें। सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना केवल सरकार का नहीं, हर नागरिक का भी कर्तव्य है। छोटी लगने वाली ऐसी चोरी, वास्तव में राष्ट्रीय संसाधनों की बड़ी बर्बादी है।
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