Ranchi। झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए हो रहे चुनाव के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी के नामांकन पत्र की जांच के दौरान एक तकनीकी त्रुटि सामने आने की सूचना है। इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने मामले को तत्काल निर्णय लेने के बजाय केंद्रीय चुनाव आयोग के समक्ष भेज दिया है। आयोग से मार्गदर्शन मिलने तक नथवानी के नामांकन पर अंतिम निर्णय लंबित रखा गया है।
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के बीच सामने आए इस घटनाक्रम ने राजनीतिक दलों, विधायकों और चुनावी रणनीतिकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। क्योंकि परिमल नथवानी को इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन प्राप्त है और उन्हें प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था।
जांच के दौरान सामने आई तकनीकी आपत्ति
जानकारी के अनुसार परिमल नथवानी ने 8 जून को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। नामांकन जमा होने के बाद जब दस्तावेजों की औपचारिक जांच की प्रक्रिया शुरू हुई, तब उसमें एक तकनीकी विसंगति सामने आई। चुनाव अधिकारियों ने मामले की प्रकृति को देखते हुए इसे केवल स्थानीय स्तर पर निपटाने के बजाय केंद्रीय चुनाव आयोग से मार्गदर्शन लेने का निर्णय लिया।
फिलहाल संबंधित नामांकन पत्र को होल्ड पर रखा गया है। आयोग से प्राप्त निर्देशों के आधार पर ही यह तय होगा कि नामांकन वैध माना जाएगा या फिर उसमें किसी प्रकार की कानूनी या प्रक्रियागत बाधा है।
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एनडीए समर्थित उम्मीदवार होने से बढ़ा राजनीतिक महत्व
परिमल नथवानी इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं, लेकिन उन्हें एनडीए के विधायकों का समर्थन प्राप्त है। नामांकन के दौरान भी कई विधायक उनके साथ मौजूद रहे थे, जिससे उनकी दावेदारी को राजनीतिक मजबूती मिलने का संकेत माना गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संख्या बल के लिहाज से नथवानी की स्थिति मजबूत मानी जा रही थी। ऐसे में उनके नामांकन को लेकर उठे तकनीकी प्रश्न ने चुनावी समीकरणों पर नई चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि तकनीकी आपत्ति की प्रकृति क्या है और उसका चुनावी पात्रता पर कितना प्रभाव पड़ सकता है।
भाजपा उम्मीदवार को लेकर चली थी लंबी चर्चा
राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद शुरुआती दौर में भाजपा की ओर से कई नामों पर चर्चा हुई थी। इनमें गौरव वल्लभ का नाम सबसे प्रमुख माना जा रहा था। राजनीतिक गलियारों में यह धारणा बन रही थी कि पार्टी उन्हें राज्यसभा चुनाव के लिए मैदान में उतार सकती है।
हालांकि अंतिम समय में राजनीतिक रणनीति बदली और भाजपा ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित करने के बजाय परिमल नथवानी के समर्थन का रास्ता चुना। इसके बाद नथवानी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया और एनडीए समर्थक विधायकों का समर्थन उनके साथ दिखाई दिया।
अन्य उम्मीदवारों ने भी भरा नामांकन
राज्यसभा चुनाव के लिए सोमवार को अन्य प्रमुख उम्मीदवारों ने भी अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से बैद्यनाथ राम और कांग्रेस की ओर से प्रणव झा ने चुनावी मैदान में उतरते हुए अपने नामांकन जमा किए।
सूत्रों के अनुसार सभी प्रमुख उम्मीदवारों ने दो-दो सेट में नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। अब जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
चुनाव आयोग के निर्णय का इंतजार
फिलहाल पूरा मामला केंद्रीय चुनाव आयोग के विचाराधीन है। आयोग द्वारा जारी निर्देशों के बाद ही चुनाव अधिकारी आगे की कार्रवाई करेंगे। यदि तकनीकी त्रुटि को सुधार योग्य माना जाता है तो नथवानी की उम्मीदवारी बरकरार रह सकती है। वहीं यदि आयोग इसे गंभीर प्रक्रियागत कमी मानता है तो इसका असर उनकी दावेदारी पर पड़ सकता है।
इसी कारण राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों के नेताओं, समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हुई है।
18 जून को होगा मतदान
गौरतलब है कि झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव कराया जा रहा है। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 8 जून को समाप्त हो चुकी है। नामांकन पत्रों की जांच और अन्य औपचारिकताओं के बाद 18 जून 2026 को मतदान कराया जाएगा। मतदान संपन्न होने के बाद मतगणना होगी और विजयी उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
राज्यसभा चुनाव के इस चरण में परिमल नथवानी के नामांकन से जुड़ा विवाद चुनावी प्रक्रिया का सबसे चर्चित विषय बन गया है। अब सभी की निगाहें केंद्रीय चुनाव आयोग के निर्णय पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकता है।
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