भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का बड़ा दावा: पेट्रोल-डीजल और LPG की कमी नहीं

Anand Kumar
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मिडल ईस्ट तनाव के बीच मंगलुरु पोर्ट पर लगातार पहुंच रहे जहाज

New Delhi : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा आश्वासन दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह नियंत्रण में है। मंत्रालय के अनुसार, देश में कहीं भी ईंधन की कमी नहीं है, सप्लाई चेन सामान्य रूप से काम कर रही है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

इसी बीच कर्नाटक के न्यू मंगलुरु पोर्ट पर एलपीजी और कच्चे तेल के जहाजों का लगातार पहुंचना इस दावे को जमीन पर मजबूती देता दिख रहा है।

मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा कि देशभर के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप खुले हैं और सभी स्थानों पर बिना किसी व्यवधान के ईंधन की आपूर्ति जारी है। किसी भी डीलर या आउटलेट को सप्लाई घटाने, कोटा तय करने या राशनिंग लागू करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक तनाव के कारण कई देशों में ईंधन आपूर्ति और मूल्य को लेकर आशंकाएं बढ़ी हुई हैं।

सरकार ने यह भी कहा कि तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल पंप संचालकों की कार्यशील पूंजी पर दबाव कम करने के लिए क्रेडिट सीमा को एक दिन से बढ़ाकर तीन दिन से अधिक कर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी खुदरा आउटलेट पर पेट्रोल या डीजल की उपलब्धता बाधित न हो। यानी सरकार केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि वितरण तंत्र के वित्तीय पक्ष को भी स्थिर रखने की कोशिश कर रही है।

41 से अधिक स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद, 60 दिनों की आपूर्ति पहले से सुरक्षित

मंत्रालय के मुताबिक भारत अब दुनिया भर के 41 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं से कच्चा तेल प्राप्त कर रहा है। यह विविधता भारत की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है, क्योंकि किसी एक क्षेत्र या समुद्री मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता संकट के समय जोखिम बढ़ा सकती है। सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार, खासकर पश्चिमी गोलार्ध से भारी मात्रा में उपलब्ध तेल ने किसी भी संभावित व्यवधान की भरपाई कर दी है।

विज्ञप्ति के अनुसार, भारत की सभी रिफाइनरियां अपनी स्थापित क्षमता के बराबर या उससे अधिक स्तर पर काम कर रही हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुरक्षित कर ली है। इसका सीधा अर्थ है कि निकट भविष्य में किसी तत्काल आपूर्ति झटके की आशंका को सरकार फिलहाल खारिज कर रही है।

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74 दिनों की भंडारण क्षमता, लगभग 60 दिनों का वास्तविक स्टॉक कवर

सरकार ने यह भी कहा है कि भारत के पास कुल 74 दिनों की भंडारण क्षमता है, जबकि मौजूदा वास्तविक स्टॉक कवर लगभग 60 दिनों का है। इसमें कच्चा तेल, रिफाइंड उत्पाद और रणनीतिक गुफाओं में रखा गया भंडार भी शामिल है। मंत्रालय का कहना है कि वैश्विक तनाव के बावजूद हर भारतीय के लिए लगभग दो महीने की निरंतर आपूर्ति उपलब्ध है और अगले दो महीनों के लिए खरीद भी सुनिश्चित कर ली गई है।

यहां सरकार का संदेश साफ है कि मौजूदा संकट को केवल समुद्री तनाव या युद्ध के नजरिये से नहीं, बल्कि भारत की कुल ऊर्जा सुरक्षा संरचना के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। रणनीतिक भंडार, विविध आयात स्रोत, घरेलू रिफाइनिंग क्षमता और लगातार चल रही बंदरगाह गतिविधियां मिलकर एक बफर सिस्टम तैयार करती हैं।

एलपीजी पर खास जोर, घरेलू उत्पादन में 40 प्रतिशत वृद्धि का दावा

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि एलपीजी नियंत्रण आदेश के बाद घरेलू रिफाइनरी उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसके चलते दैनिक एलपीजी उत्पादन बढ़कर 50 टीएमटी तक पहुंच गया है, जो देश की कुल जरूरत का 60 प्रतिशत से अधिक है। कुल दैनिक आवश्यकता लगभग 80 टीएमटी बताई गई है, यानी अब केवल 30 टीएमटी आयात की जरूरत रह गई है। मंत्रालय इसे इस रूप में पेश कर रहा है कि भारत अब एलपीजी के मामले में पहले की तुलना में कहीं अधिक आत्मनिर्भर स्थिति में है।

PNG को बढ़ावा देने पर सरकार का जवाब

मंत्रालय ने पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी को बढ़ावा देने के पीछे भी अपना पक्ष स्पष्ट किया है। सरकार के अनुसार, राज्य सरकारों के साथ समन्वय में पीएनजी को इसलिए बढ़ाया जा रहा है क्योंकि यह घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सस्ती, स्वच्छ और सुरक्षित ईंधन व्यवस्था है। भारत अपनी कुल 191 एमएमएससीएमडी दैनिक गैस आवश्यकता में से 92 एमएमएससीएमडी घरेलू उत्पादन से पूरा कर रहा है। मंत्रालय ने साफ कहा कि पीएनजी को बढ़ावा दिए जाने का यह अर्थ निकालना कि एलपीजी खत्म हो रही है, गलत सूचना है।

मंगलुरु पोर्ट पर लगातार जहाजों की आवाजाही ने बढ़ाया भरोसा

सरकारी दावे के समानांतर जमीन से जो संकेत मिल रहे हैं, वे भी आपूर्ति व्यवस्था के पक्ष में दिखाई देते हैं। हाल के दिनों में न्यू मंगलुरु पोर्ट पर कच्चे तेल और एलपीजी से लदे जहाज लगातार पहुंच रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के बीच भी इस बंदरगाह पर ईंधन कार्गो की नियमित आवाजाही जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एलपीजी टैंकर और कच्चे तेल के जहाजों के पहुंचने का सिलसिला आपूर्ति शृंखला पर दबाव कम करने में मदद कर रहा है।

lpg gas

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले एक एलपीजी टैंकर ने 16,714 टन एलपीजी की खेप उतारी थी, जबकि ‘अपोलो ओशन’ को भी अतिरिक्त एलपीजी लेकर पहुंचने वाला जहाज बताया गया। इसी क्रम में रूसी कच्चे तेल से लदा जहाज भी पोर्ट पहुंचा, जिससे यह साफ संकेत मिला कि भारत संकट काल में भी बहु-स्रोत आपूर्ति मॉडल पर काम कर रहा है। हालांकि ‘अपोलो ओशन’ के संबंध में 16,000 मीट्रिक टन, गुरुवार शाम 4 बजे आगमन और गुजरात में आधी खेप उतारने जैसे सभी बिंदुओं की मुझे स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली; उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में यह जरूर पुष्टि हुई कि जहाज के मंगलुरु पहुंचने और अतिरिक्त एलपीजी आपूर्ति की तैयारी की बात कही गई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है सबसे बड़ा जोखिम

मौजूदा संकट का सबसे संवेदनशील बिंदु ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ है। वैश्विक कच्चे तेल और एलपीजी व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान की भौगोलिक स्थिति इस मार्ग के बेहद निकट है, इसलिए किसी सैन्य तनाव, अवरोध या नौवहन बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। भारत के लिए चिंता इसलिए भी बढ़ती है क्योंकि पश्चिम एशिया लंबे समय से उसके ऊर्जा आयात का महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। यही वजह है कि सरकार बार-बार यह रेखांकित कर रही है कि विविध आपूर्तिकर्ता, भंडारण क्षमता और घरेलू उत्पादन भारत की सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहे हैं। मंत्रालय ने भी अपनी ताजा विज्ञप्ति में पश्चिम एशिया के घटनाक्रम के संदर्भ में ही भारत की ऊर्जा आपूर्ति को “पूरी तरह सुरक्षित” बताया है।

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क्या संदेश देना चाहती है सरकार

इस पूरे घटनाक्रम से सरकार तीन स्पष्ट संदेश देना चाहती दिख रही है। पहला, देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की तत्काल कमी का कोई संकट नहीं है। दूसरा, अफवाहों या दहशत की वजह से अनावश्यक खरीद से बचने की जरूरत है, क्योंकि सप्लाई सामान्य है। तीसरा, भारत ने ऊर्जा खरीद और भंडारण का ऐसा ढांचा बनाया है जो क्षेत्रीय युद्ध जैसी असाधारण परिस्थितियों में भी कुछ समय तक दबाव झेल सकता है।

भारत की पर्याप्त तैयारी

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव निश्चित रूप से वैश्विक तेल बाजार के लिए चिंता का विषय है, लेकिन फिलहाल भारत सरकार का आधिकारिक रुख यही है कि देश की पेट्रोलियम और एलपीजी आपूर्ति सुरक्षित है। न्यू मंगलुरु पोर्ट जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर एलपीजी और कच्चे तेल के जहाजों का लगातार पहुंचना इस दावे को व्यावहारिक आधार देता है। आने वाले दिनों में सबसे बड़ी नजर हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और भारत की आयात-लॉजिस्टिक्स पर रहेगी। अभी के संकेत यही बताते हैं कि भारत ने तत्काल ऊर्जा संकट से बचने के लिए पर्याप्त तैयारी कर रखी है।

इनपुट – एजेंसी और न्यूज वेबसाइट्स

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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