आयोग की पूरी बेंच पश्चिम बंगाल के दौरे पर, जानें क्या है ‘मिशन 2026’ का पूरा रोडमैप
New Delhi/Koklata : भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सवों में से एक, पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) इसी सप्ताह पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के लिए चुनावी तारीखों का ऐलान कर सकता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग की पूरी बेंच इस समय पश्चिम बंगाल के दौरे पर है, जहां सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों की अंतिम समीक्षा की जा रही है।
बंगाल दौरे के बाद दिल्ली में बढ़ेगी हलचल
चुनाव आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी 10 मार्च को कोलकाता से दिल्ली लौटेंगे। दिल्ली पहुंचते ही आयोग एक उच्च स्तरीय आंतरिक बैठक करेगा, जिसमें पिछले एक महीने के दौरान किए गए पांचों राज्यों के दौरों की रिपोर्ट पर चर्चा होगी। इस बैठक के बाद ही प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय निर्धारित किया जाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 12 से 14 मार्च के बीच किसी भी दिन चुनाव की तारीखों की घोषणा हो सकती है और इसी के साथ इन राज्यों में आदर्श चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो जाएगी।
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संवैधानिक समय सीमा और चुनौती
चुनाव आयोग के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सभी राज्यों में नई सरकार का गठन उनकी विधानसभा के कार्यकाल खत्म होने से पहले हो जाए।
- तमिलनाडु: यहां विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है।
- पश्चिम बंगाल: यहाँ की विधानसभा का कार्यकाल 7 मई तक है।
- असम और केरल: यहां क्रमशः 20 मई और 23 मई को कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन तारीखों को देखते हुए, आयोग के पास अप्रैल के मध्य से मई के पहले सप्ताह तक मतदान प्रक्रिया संपन्न कराने का समय है।
डिजिटल निगरानी: पहली बार 100% वेबकास्टिंग का बड़ा फैसला
इस चुनाव की सबसे क्रांतिकारी विशेषता इसकी तकनीकी पारदर्शिता होने वाली है। चुनाव आयोग ने तय किया है कि असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के सभी पोलिंग स्टेशनों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की जाएगी।
महत्वपूर्ण बदलाव: अब तक केवल ‘संवेदनशील’ या ‘क्रिटिकल’ बूथों पर ही वेबकास्टिंग होती थी (लगभग 50 प्रतिशत)। लेकिन पिछले साल बिहार विधानसभा चुनावों के सफल प्रयोग के बाद, अब इसे पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। इससे दिल्ली में बैठा चुनाव आयोग का कंट्रोल रूम हर बूथ की लाइव गतिविधि देख सकेगा। इसके लिए जिला और राज्य स्तर पर विशेष मॉनिटरिंग टीमें तैनात की गई हैं।
स्थानीय भावनाओं और त्योहारों का सम्मान
चुनाव का शेड्यूल तैयार करते समय स्थानीय संस्कृति और त्योहारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। असम की राजनीतिक पार्टियों ने आयोग से पुरजोर अपील की है कि तारीखें तय करते समय ‘रंगाली बिहू’ त्योहार का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही, असम में कम चरणों में चुनाव कराने की मांग की गई है ताकि सुरक्षा बलों और मतदाताओं को असुविधा न हो। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह इन सुझावों पर विचार कर रहा है और शेड्यूल में इसका प्रतिबिंब दिखेगा।
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मतदाता जागरूकता और वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण
लोकतंत्र की मजबूती के लिए SVEEP (Systematic Voters’ Education and Electoral Participation) के तहत आयोग इस बार युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही, असम को छोड़कर बाकी चार राज्यों में वोटर लिस्ट का विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) पूरा कर लिया गया है, ताकि फर्जी वोटों को हटाया जा सके और नई फोटो युक्त पहचान पत्र जारी किए जा सकें।