हाथी हमलों पर हेमंत का सख्त रुख : 12 दिनों में मुआवजा, क्विक रिस्पॉन्स सिस्टम और 5 साल का डेटा मांगा
Ranchi : रांची के कांके रोड स्थित आवासीय कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों को मानव-हाथी संघर्ष पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। हाल के महीनों में हाथियों के हमलों से हुई मौतों और नुकसान पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “हाथी हमले से एक भी व्यक्ति की मृत्यु न हो, यह हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।”
बैठक में अधिकारियों से प्रभावित जिलों – रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला और दुमका में हालिया घटनाओं का ब्योरा मांगा गया। विभागीय प्रस्तुति के अनुसार पिछले कुछ महीनों में लगभग 27 लोगों की मौत की सूचना है। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए त्वरित और प्रभावी तंत्र बनाने पर जोर दिया।
12 दिनों में मुआवजा, नियमों में संशोधन के संकेत
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि हाथी हमले में मृत्यु की स्थिति में 12 दिनों के भीतर पूर्ण मुआवजा दिया जाए। जान-माल, फसल और पशुधन के नुकसान के मामलों में भी भुगतान में देरी न हो।
साथ ही, एनिमल अटैक से जुड़े कंपनसेशन प्रावधानों की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन करने और एक प्रभावी नियमावली तैयार करने को कहा गया।
अधिकारियों को पिछले 5 वर्षों के कैजुअल्टी और मुआवजा भुगतान का विस्तृत डेटा प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि जवाबदेही तय हो सके।
प्रभावित क्षेत्रों में क्विक रिस्पॉन्स सिस्टम
मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि बार-बार विचलन (straying) के बावजूद बेहतर मैकेनिज्म क्यों विकसित नहीं हो पाया। विभाग ने बताया कि हाथी रेस्क्यू के लिए क्विक रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है और 6 कुनकी हाथी मंगाने की प्रक्रिया में है, जिससे ट्रैकिंग और नियंत्रित ड्राइव-आउट ऑपरेशन में मदद मिलेगी।
हजारीबाग क्षेत्र में पांच आक्रामक हाथियों के झुंड की गतिविधियों के मद्देनजर 70 सदस्यीय टीम तैनात होने की जानकारी दी गई। विभाग अलर्ट मोड पर है और एलिफेंट कॉरिडोर की मैपिंग पर भी काम करने को कहा गया है।
ग्रामीणों को तकनीकी प्रशिक्षण और संसाधन
मानव-हाथी संघर्ष वाले इलाकों में ग्रामीणों को एलीफेंट रेस्क्यू के लिए तकनीकी प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया।
रात के समय सुरक्षित ढंग से हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए मशाल हेतु डीजल/किरासन, पुराने टायर, टॉर्च और सोलर सायरन जैसे संसाधन उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। विभाग को प्रभावित गांवों के साथ बेहतर समन्वय और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
प्रशासनिक समन्वय और विशेषज्ञों की मदद
बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि रेस्क्यू सिस्टम को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएंगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जीवन की क्षति, स्थायी दिव्यांगता, पशुधन और फसल नुकसान, सभी को समान गंभीरता से लेकर राहत तंत्र को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विभागीय सचिव अबू बकर सिद्दीकी पी, पीसीसीएफ (हॉफ) संजीव कुमार, पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) रवि रंजन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
क्या बदल सकते हैं जमीनी हालात?
मानव-हाथी संघर्ष झारखंड के कई जिलों में वर्षों से चुनौती बना हुआ है। एलिफेंट कॉरिडोर की मैपिंग, क्विक रिस्पॉन्स टीम, कुनकी हाथियों की तैनाती और 12 दिन में मुआवजा, यदि समयबद्ध ढंग से लागू हुए, तो इससे जमीनी स्तर पर राहत मिल सकती है।
अब निगाह इस बात पर है कि विभाग तय समयसीमा में डेटा, संशोधित नियमावली और रेस्क्यू तंत्र को कितना प्रभावी बना पाता है।