Ranchi : राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme) के तहत झारखंड में चल रही सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के नमूना ऑडिट में गंभीर अनियमितताएं सामने आयी हैं। राज्य सरकार के निर्देश पर कराए गए इस ऑडिट में पाया गया कि लगभग 32 प्रतिशत लाभुक पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते। इनमें वैसे लाभुकों के नाम पर जारी भुगतान भी शामिल है, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।
12.08 लाख लाभुक, 5192 का नमूना ऑडिट
राज्य में NSAP के तहत कुल 12.08 लाख लाभुक सूचीबद्ध हैं। प्रारंभिक चरण में 11 जिलों की 21 ग्राम पंचायतों के 5192 लाभुकों का नमूना ऑडिट किया गया। इनमें से 3152 लाभुक ही ऑडिट टीम के समक्ष उपस्थित हुए।
ऑडिट निष्कर्षों में पाया गया कि
- 445 लाभुक मृत पाए गए, जबकि उनके नाम पर पेंशन भुगतान जारी था।
- 646 लाभुक निर्धारित आयु या अन्य पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते थे।
- 90 लाभुक लापता पाए गए।
कुल मिलाकर 1181 लाभुक ऐसे पाए गए जो निर्धारित अयोग्यता श्रेणियों में आते हैं। यह ऑडिटेड लाभुकों का 32.03 प्रतिशत है।
किन जिलों में हुआ ऑडिट
नमूना ऑडिट जिन जिलों में किया गया, उनमें रांची (Ranchi), धनबाद (Dhanbad), चतरा (Chatra), गढ़वा (Garhwa), दुमका (Dumka), गिरिडीह (Giridih), गोड्डा (Godda), लातेहार (Latehar), सरायकेला (Saraikela), साहिबगंज (Sahibganj) और सिमडेगा (Simdega) शामिल हैं।
पात्रता की आठ श्रेणियां
ऑडिट के दौरान जिन मामलों को अयोग्य माना गया, वे इस प्रकार हैं:
- मृत लाभुक
- लापता व्यक्ति
- विधवा न होने के बावजूद विधवा पेंशन
- दिव्यांग न होने के बावजूद दिव्यांग पेंशन
- एक से अधिक पेंशन का लाभ
- निर्धारित आयु सीमा पूरी न करना
- बीपीएल सूची में नाम न होना
- आय सीमा से अधिक आय
NSAP के तहत संचालित प्रमुख योजनाएं
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना
Indira Gandhi National Old Age Pension Scheme
60 वर्ष से अधिक आयु के पात्र बुजुर्गों को मासिक सहायता।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना
Indira Gandhi National Widow Pension Scheme
40 से 79 वर्ष की विधवा महिलाओं के लिए सहायता।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना
Indira Gandhi National Disability Pension Scheme
18 से 79 वर्ष के दिव्यांग लाभुकों के लिए पेंशन।
राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना
National Family Benefit Scheme
परिवार के मुखिया की मृत्यु पर एकमुश्त 20,000 रुपये की सहायता।
प्रशासनिक और वित्तीय असर
यह मामला केवल पेंशन वितरण की तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि राजकोषीय अनुशासन और डाटा प्रबंधन की चुनौती भी है। यदि नमूना ऑडिट में 32 प्रतिशत तक गड़बड़ी पाई गई है, तो राज्य के सभी 24 जिलों में व्यापक ऑडिट के बाद वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टैक्सदाताओं के धन का उपयोग पात्र लाभुकों तक ही पहुंचे। अब निगाहें पूर्ण ऑडिट और संभावित सुधारात्मक कार्रवाई पर हैं।