Jamshedpur : उद्यमी देवांग गांधी के बेटे कैरव गांधी के अपहरण मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक कैरव गांधी को फिरौती की रकम मिलने के बाद ही छोड़ा गया, जबकि इससे पहले पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक, यह दावा कर चुके थे कि पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते अपहर्ता कैरव को रास्ते में उतारकर फरार हो गए थे।
अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में ये जानकारी सामने आई है।
गया और नालंदा से तीन आरोपी गिरफ्तार
कैरव की सकुशल वापसी के बाद जिला पुलिस ने बिहार के गयाजी और नालंदा में एक साथ छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गया जिले के बुनियादगंज थाना क्षेत्र के सोंधी गांव से उपेंद्र सिंह और अर्जुन सिंह को हिरासत में लिया गया।
दोनों की निशानदेही और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर नालंदा जिले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पहाड़ीतल गांव में छापेमारी कर उपेंद्र सिंह के रिश्तेदार गुड्डू सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा आरोपियों के संपर्क में रहने वाले पांच अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
पूछताछ में खुलासा: फिरौती के बाद छोड़ा गया
गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि फिरौती की रकम मिलने के बाद गणतंत्र दिवस की देर रात कैरव गांधी को बिहार-झारखंड सीमा पर बरही-चौपारण के बीच एक सुनसान इलाके में छोड़ दिया गया था। इसके बाद सभी आरोपी अलग-अलग दिशाओं में फरार हो गए।
स्कॉर्पियो, कार और हथियार बरामद
सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान अपहरण में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो, एक अन्य कार और हथियार भी बरामद किए गए हैं, हालांकि जिला पुलिस की ओर से अब तक इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस की एक टीम अभी भी बिहार में लगातार छापेमारी कर रही है।
सोनू फरार, तलाश जारी
जांच के दौरान जेम्को निवासी सोनू नामक युवक की भूमिका भी सामने आई है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने बिहार स्थित उसके ससुराल में भी छापेमारी की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
आरोपियों का आपराधिक इतिहास
पुलिस जांच में सामने आया है कि उपेंद्र सिंह और गुड्डू सिंह का आपराधिक इतिहास रहा है। दोनों पहले भी अपहरण, बैंक लूट और अवैध शराब कारोबार जैसे मामलों में जेल जा चुके हैं। वहीं अर्जुन सिंह के बारे में बताया जा रहा है कि वह जल्दी पैसा कमाने के लालच में अपराध की दुनिया में उतरा।
बयान दर्ज नहीं, परिवार सतर्क
कैरव गांधी की घर वापसी के दूसरे दिन भी पुलिस उनका बयान दर्ज नहीं कर सकी। उनके आवास पर लोगों का आना-जाना लगा रहा, जबकि परिवार के कुछ सदस्यों ने मोबाइल फोन बंद कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार परिजन किसी भी तरह की जानकारी सार्वजनिक करने से बच रहे हैं।
कैसे दिया गया था अपहरण को अंजाम
13 जनवरी को दोपहर करीब एक बजे कैरव गांधी घर से गम्हरिया स्थित अपनी फैक्ट्री जा रहे थे। इसी दौरान कदमा-सोनारी लिंक रोड पर करीब आधा दर्जन अपराधियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उनका अपहरण कर लिया।
उन्हें क्रेटा कार से उतारकर ‘पुलिस’ लिखा बोर्ड लगी स्कॉर्पियो में बैठाया गया और बिहार ले जाया गया। बाद में इंडोनेशिया नंबर से परिजनों को कॉल कर भारी फिरौती की मांग की गई। रकम मिलने के बाद 26 जनवरी की रात कैरव को छोड़ा गया और 27 जनवरी की सुबह परिजन उन्हें सुरक्षित घर लेकर पहुंचे।