Hazaribag : झारखंड के हजारीबाग में विश्वप्रसिद्ध रामनवमी जुलूस इस बार भी भव्यता और परंपरा के साथ संपन्न हुआ, लेकिन इसके साथ कुछ गंभीर घटनाएं भी सामने आईं। 28 तारीख की रात 8 बजे शुरू हुआ जुलूस 30 मार्च की सुबह करीब 4 बजे समाप्त हुआ। करीब 36 घंटे तक चले इस आयोजन में 107 अखाड़ों के साथ 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी रही।
36 घंटे का ऐतिहासिक जुलूस
हजारीबाग की रामनवमी देशभर में अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है। जहां अन्य स्थानों पर रामनवमी का समापन हो जाता है, वहीं यहां दशमी की रात से जुलूस शुरू होता है और एकादशी की सुबह समाप्त होता है। इस दौरान शहर की सड़कों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा रहा और जगह-जगह आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं।
अखाड़ों का पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन
इस जुलूस की सबसे खास पहचान अखाड़ों द्वारा किया जाने वाला पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन है। तलवार, भाला और लाठी के साथ युवाओं ने विभिन्न प्रकार के करतब दिखाए। हालांकि इसी दौरान कई लोग चोटिल भी हुए। प्रशासन के अनुसार लगभग 1000 लोग करतब दिखाने या भीड़ के दबाव में घायल हुए, जिनका इलाज अस्थायी चिकित्सा शिविरों और अस्पतालों में किया गया। सभी घायलों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर बताई गई है।
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जुलूस के दौरान तीन लोगों की हत्या
जुलूस के दौरान तीन लोगों की हत्या की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे माहौल में तनाव पैदा हो गया। मृतकों में कटकमसांडी प्रखंड के गोदखर गांव निवासी राम कुमार साव और बड़ी बाजार क्षेत्र के अभिषेक वर्मा शामिल हैं। इन घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा गया।

शव रखकर किया गया विरोध
अभिषेक वर्मा की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने जुलूस मार्ग पर शव रखकर लगभग एक घंटे तक विरोध किया। बाद में वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के आश्वासन के बाद स्थिति सामान्य हुई और अंतिम संस्कार किया गया।
प्रशासन ने बताया सफल आयोजन
हजारीबाग के उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि पूरा आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और यह प्रशासन तथा विभिन्न समितियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। वहीं पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन के अनुसार इस आयोजन की तैयारी पिछले चार महीनों से की जा रही थी और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
भव्यता के बीच सुरक्षा पर सवाल
यह आयोजन जहां आस्था और परंपरा का प्रतीक रहा, वहीं तीन मौतें और बड़ी संख्या में घायलों की घटना यह संकेत देती है कि भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
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