चाईबासा में हाथियों का कहर : एक सप्ताह में 17 मौतें, बाबरिया गांव में एक ही परिवार के 5 सदस्य कुचले गए, एक रात पहले पिता और दो बच्चे बने थे शिकार

Anand Kumar
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नोवामुंडी और गोइलकेरा में दंतैल हाथी का आतंक, वन विभाग अलर्ट, मानव–वन्यजीव संघर्ष गहराया

फाइल फोटो

Chaibasa : पश्चिम सिंहभूम जिले में जंगली हाथियों का आतंक रुकने का नाम नहीं ले रहा। 6 जनवरी की देर रात नोवामुंडी प्रखंड के जेटेया थाना क्षेत्र में एक दंतैल हाथी ने गांवों में घुसकर 7 लोगों की जान ले ली। सबसे दर्दनाक घटना बाबरिया गांव में हुई, जहां एक ही परिवार के 5 सदस्य (पति-पत्नी और उनके 3 मासूम बच्चे) हाथी के हमले में कुचलकर मारे गए। इसके अलावा पास के गांवों में दो अन्य ग्रामीणों की भी मौत हो गई। गौरतलब है कि एक रात पहले ही सोमवार देर रात गोइलकेरा प्रखंड के आराहासा पंचायत अंतर्गत सोवां गांव में जंगली हाथी ने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान ले ली थी। मृतकों में कुंदरा बाहदा, उसका 6 सालका बेटा कोदमा बाहदां और आठ महीने की बेटी सामू बाहदां शामिल हैं।

सोते हुए परिवार पर अचानक हमला

ग्रामीणों ने बताया कि मंगलवार रात करीब 10 बजे बाबरिया गांव में पीड़ित परिवार अपने घर में सो रहा था। अचानक हाथी ने घर पर हमला बोल दिया। दीवारें तोड़कर वह अंदर घुस गया और सोते हुए लोगों पर टूट पड़ा। इस हमले में परिवार के 5 सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। चमत्कारिक रूप से परिवार का एक बच्चा किसी तरह जान बचाने में कामयाब रहा। घर पूरी तरह तबाह हो गया। हाथी का कहर बाबरिया तक सीमित नहीं रहा। बड़ा पासीया गांव में एक ग्रामीण को रौंद डाला, जबकि लांपाईसाई गांव में एक अन्य व्यक्ति हाथी के हमले का शिकार बना। इन दोनों गांवों में मृतकों की पहचान समाचार लिखे जाने तक नहीं हो पाई थी।

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लोग दहशत में, प्रशासन हरकत में

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। हाथी की निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। प्रभावित परिवारों को तत्काल मुआवजा देने और सुरक्षा उपायों का आश्वासन दिया गया है। लेकिन ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि हाथियों को जंगल की ओर भगाने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।पश्चिम सिंहभूम जंगली हाथियों के कॉरिडोर में स्थित है, जहां मानव-वन्यजीव संघर्ष लंबे समय से समस्या बना हुआ है। लेकिन हाल के दिनों में हमले असामान्य रूप से बढ़ गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों की कटाई और कॉरिडोर में बाधाओं से हाथी गांवों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं।

हाल की घटनाओं की टाइमलाइन (जनवरी 2026)

  • 1-3 जनवरी: एक दंतैल हाथी ने अलग-अलग हमलों में 4 लोगों की मौत और कई घायल किए। कुल टोल शुरू में 4-5।
  • 2 जनवरी: 3 लोगों की मौत (विष्णु सुंडी, मंगल सिंह हेम्ब्रोम आदि)।
  • 4 जनवरी: 2 मौतें अलग-अलग घटनाओं में (चंपा कुई, विरेंद्र कोरवा)।
  • 5-6 जनवरी: 3-4 मौतें, जिसमें पिता और दो बच्चे शामिल।
  • 6 जनवरी (मंगलवार रात): सबसे भयावह हमला—6 मौतें, जिसमें एक परिवार के 5 सदस्य। कुल टोल 13-17 तक पहुंचा (विभिन्न रिपोर्ट्स में 9 से 17)।
    कुल: एक सप्ताह में 17 मौतें, मुख्य रूप से एक ही दंतैल हाथी से।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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