रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ सार्वजनिक रूप से तीखी टिप्पणी करना पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव को भारी पड़ता दिख रहा है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने साव को शोकॉज नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। उनसे लिखित स्पष्टीकरण देने के साथ स्वयं उपस्थित होकर यह बताने को कहा गया है कि पार्टी संविधान के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
नोटिस प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव की ओर से जारी किया गया है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने इसकी जानकारी दी है।
हेमंत सोरेन पर क्या कहा था योगेंद्र साव ने?
मामला 18 सितंबर को हजारीबाग में खासमहल जमीन पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दिए गए योगेंद्र साव के बयान से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, साव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “दुनिया के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्रियों में से एक” बताया था। उन्होंने सरकार पर झारखंड के जल, जंगल और जमीन को कॉरपोरेट और आउटसोर्सिंग के हाथों सौंपने का आरोप भी लगाया।
साव ने कथित तौर पर यह भी कहा कि प्रशासन उनके घर पर बुलडोजर चला दे, लेकिन वे अपनी बात कहने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार को दिए जा रहे समर्थन पर भी पुनर्विचार करने की अपील की थी।
हालांकि, ये योगेंद्र साव के आरोप और राजनीतिक बयान हैं। इनके संबंध में कोई स्वतंत्र न्यायिक निष्कर्ष इस खबर का हिस्सा नहीं है।
खासमहल जमीन की कार्रवाई से शुरू हुआ विवाद
हजारीबाग के हुरहुरू क्षेत्र में 50 डिसमिल खासमहल जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। प्रशासन की ओर से जमीन को सरकारी खासमहल भूमि बताते हुए कार्रवाई की गई। इसी कार्रवाई के दौरान योगेंद्र साव और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विवाद हुआ और इसके बाद साव ने मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान दिया।
बेटी अंबा प्रसाद ने भी जताई असहमति
योगेंद्र साव की बेटी और कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने भी अपने पिता के बयान से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना उनके पिता से अपेक्षित नहीं था।
उधर, सत्तारूढ़ झामुमो ने भी साव के बयान पर आपत्ति जताई और कांग्रेस से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने भी उनके बयान से दूरी बनाई।
पहले भी पार्टी से निष्कासित हो चुके हैं योगेंद्र साव
योगेंद्र साव इससे पहले भी मुख्यमंत्री और गठबंधन सरकार के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। मार्च 2026 में प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति ने उन्हें तीन वर्ष के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया था। बाद में पार्टी नेतृत्व ने जून 2026 में उनका निष्कासन रद्द कर दिया था।
अब पार्टी में वापसी के कुछ ही महीनों बाद एक बार फिर साव को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है। इस बार अनुशासन समिति ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए तीन दिन का समय दिया है।
अब जवाब पर टिकी नजर
कांग्रेस के नोटिस में कहा गया है कि साव का हालिया आचरण पार्टी के सिद्धांतों और नेतृत्व के निर्देशों के विपरीत माना गया है। समिति ने यह भी उल्लेख किया है कि पहले भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर चुके साव के खिलाफ इस तरह का आचरण दोहराया गया है।
अब देखना होगा कि योगेंद्र साव अपने शोकॉज का क्या जवाब देते हैं और कांग्रेस अनुशासन समिति उनके जवाब के बाद क्या फैसला लेती है।
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