तुरामडीह माइंस में ठेका कार्यों पर सवाल, ₹1.39 करोड़ के वर्क ऑर्डर की जांच की मांग

Anand Kumar
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जादूगोड़ा/तुरामडीह: यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) की तुरामडीह माइंस में ठेका कार्यों, कंपनी की सामग्री के कथित इस्तेमाल और भूमिगत-सतही कार्यों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश सिंह ने इन शिकायतों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड और स्थल सत्यापन के जरिए वास्तविक स्थिति सामने लाना है।

उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर 24 नवंबर 2025 को जारी Work Order No. GEMC-511687761339113 में तुरामडीह माइंस के भूमिगत क्षेत्र में विविध सिविल कार्यों के लिए जनशक्ति तैनाती का उल्लेख है। इसकी कुल राशि ₹1,39,70,190.19 बताई गई है और कार्य अवधि 1 दिसंबर 2025 से 30 नवंबर 2026 तक निर्धारित है। इसी वर्क ऑर्डर को लेकर यह सवाल उठाया गया है कि निर्धारित कार्य वास्तव में भूमिगत हुए या सतही क्षेत्र में।

भूमिगत कार्य के नाम पर सतही काम कराने का आरोप

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उक्त वर्क ऑर्डर के तहत सड़क, ग्रेडिंग, बैरिकेडिंग, शेड अथवा अन्य सतही सिविल कार्य कराए गए।

यदि ऐसा हुआ है तो यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि क्या वर्क ऑर्डर की शर्तों में कोई बदलाव किया गया था, किस स्तर से इसकी अनुमति दी गई और वास्तविक कार्य को Measurement Book, RA Bill और Final Bill में किस तरह दर्ज किया गया।

इसीलिए शिकायतकर्ताओं ने वर्क ऑर्डर, BOQ, साइट इंस्ट्रक्शन, मस्टर रोल और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के साथ वास्तविक स्थल का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।

Rock Bolt के इस्तेमाल पर भी सवाल

शिकायत में भूमिगत खदान में चट्टान और छत की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली Rock Bolt सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

आरोप है कि कंपनी के स्टॉक से जारी ऐसी सामग्री का कथित तौर पर सड़क या अन्य सतही निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इसलिए जांच में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि Rock Bolt कितनी मात्रा में जारी की गई, किस उद्देश्य के लिए जारी की गई और उसका वास्तविक इस्तेमाल किस स्थान पर हुआ।

इसके लिए Material Issue Register, Stock Register, Store Requisition और Site Records का Measurement Book तथा संबंधित बिलों से मिलान किया जा सकता है।

पिछले तीन वर्षों के ठेकों का ऑडिट कराने की मांग

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामला केवल एक वर्क ऑर्डर तक सीमित नहीं हो सकता। उनका दावा है कि पिछले लगभग तीन वर्षों में समान प्रकृति के कार्यों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

इसलिए पिछले तीन वर्षों के संबंधित ठेकों का विशेष ऑडिट कराने की मांग की गई है।

जांच में मुख्य रूप से इन दस्तावेजों का मिलान किया जा सकता है:

  • Work Order और BOQ
  • Measurement Book
  • RA Bill और Final Bill
  • Stock एवं Material Issue Register
  • Store Requisition
  • Gate Pass
  • Muster Roll
  • Site Instructions
  • Contractor Payment Records

इस रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि कागज पर स्वीकृत काम और जमीन पर किए गए काम में कोई अंतर था या नहीं।

ठेका प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल

शिकायतकर्ताओं ने ठेका आवंटन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

मांग की गई है कि यह जांच हो कि समान प्रकृति के कार्यों के लिए कितने ठेकेदारों ने निविदा में हिस्सा लिया, किस आधार पर काम आवंटित हुआ और क्या कुछ ठेकेदारों को बार-बार समान प्रकृति के कार्य मिलते रहे।

साथ ही यह भी जांचने की मांग की गई है कि यदि किसी ठेके में कंपनी की सामग्री का इस्तेमाल हुआ, तो उस सामग्री की कीमत ठेकेदार के भुगतान में शामिल थी या नहीं।

खान प्रबंधन की भूमिका की जांच की मांग

शिकायत में तुरामडीह खान प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। इसमें खान प्रबंधक मनोज कुमार मिश्रा की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि, किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह तय करने के लिए दस्तावेज आधारित जांच जरूरी होगी कि किस अधिकारी ने वर्क ऑर्डर, साइट निरीक्षण, माप, सामग्री निर्गमन और भुगतान प्रक्रिया में क्या भूमिका निभाई।

Posting और Transfer History भी जांच के दायरे में

शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों की लंबे समय से एक ही यूनिट में पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों की Posting और Transfer History की समीक्षा की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पूर्व में कोई स्थानांतरण आदेश जारी हुआ था या नहीं और यदि हुआ था तो उसमें बाद में कोई संशोधन किया गया या नहीं।

कथित ‘सिंडिकेट’ के आरोप की भी जांच की मांग

शिकायत में कुछ ठेकेदारों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों के बीच कथित सांठगांठ अथवा “सिंडिकेट” जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

इन आरोपों को सत्य मानने के बजाय शिकायतकर्ताओं ने रिकॉर्ड आधारित जांच की मांग की है। इसके लिए ठेका आवंटन, कर्मचारी और सुपरवाइजर की तैनाती, Measurement Book में हस्ताक्षर, सामग्री निर्गमन, बिल सत्यापन और भुगतान अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा सकती है।

मामला सिर्फ वित्तीय नहीं, खान सुरक्षा से भी जुड़ा

तुरामडीह यूरेनियम खनन क्षेत्र की महत्वपूर्ण इकाई है और UCIL यहां भूमिगत खनन गतिविधियां संचालित करता है।

इस वजह से यदि भूमिगत सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के उपयोग को लेकर कोई शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच केवल वित्तीय अनियमितता के नजरिये से नहीं, बल्कि तकनीकी और सुरक्षा मानकों के आधार पर भी की जानी चाहिए।

यही वजह है कि शिकायतकर्ताओं ने UCIL के स्थानीय स्तर से ऊपर Vigilance या Corporate स्तर की स्वतंत्र टीम से जांच कराने की मांग की है।

सतीश सिंह की मांग—रिकॉर्ड और स्थल सत्यापन से हो फैसला

सतीश सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं है। उनका कहना है कि यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो निष्पक्ष जांच के बाद जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि आरोप सही नहीं हैं तो रिकॉर्ड तथा जांच के माध्यम से स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।

उनकी प्रमुख मांगें हैं:

  1. पिछले तीन वर्षों के संबंधित Work Orders का विशेष ऑडिट।
  2. भूमिगत और सतही कार्यों का भौतिक सत्यापन।
  3. Rock Bolt समेत कंपनी की सामग्री के निर्गमन और वास्तविक उपयोग का मिलान।
  4. Work Order, BOQ, Measurement Book और Bills की जांच।
  5. ठेका आवंटन और बार-बार काम पाने वाले ठेकेदारों की समीक्षा।
  6. संबंधित अधिकारियों की Posting और Transfer History की जांच।
  7. बिल से भुगतान तक जिम्मेदारी तय करना।
  8. खान सुरक्षा से जुड़े आरोपों की तकनीकी जांच।
  9. UCIL Vigilance/Corporate स्तर की स्वतंत्र जांच।

जांच से ही सामने आएगी वास्तविक तस्वीर

तुरामडीह माइंस से जुड़े इन आरोपों की पुष्टि के लिए वर्क ऑर्डर से लेकर वास्तविक कार्य, सामग्री निर्गमन, माप पुस्तिका और भुगतान तक पूरी श्रृंखला की जांच ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। 1.39 करोड़ के इस वर्क ऑर्डर में कागज पर जो काम दर्ज है, जमीन पर वास्तव में वही काम हुआ या नहीं? इसका जवाब रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच से ही मिल सकता है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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