झारखंड में ट्रेजरी ‘महाघोटाले’ पर सियासी विस्फोट, बाबूलाल मरांडी ने CBI जांच की मांग की, कई जिलों में फैले रैकेट के संकेत

Anand Kumar
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Ranchi : झारखंड में ट्रेजरी से कथित अवैध निकासी का मामला अब महज वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि संभावित “संगठित महाघोटाले” के रूप में उभरता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विस्तृत पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय एजेंसी (CBI) या न्यायिक निगरानी में कराने की मांग की है।

मरांडी द्वारा लिखे गए पत्र में स्पष्ट संकेत दिया गया है कि यह मामला राज्य की वित्तीय प्रणाली में गहरे पैठ बना चुके भ्रष्ट नेटवर्क का परिणाम हो सकता है, जिसकी परतें खुलने पर व्यापक स्तर पर सरकारी धन की लूट सामने आ सकती है।

चारा घोटाले की छाया, इतिहास की पुनरावृत्ति का डर

पत्र में इस पूरे घटनाक्रम की तुलना चर्चित चारा घोटाला से करते हुए कहा गया है कि जिस प्रकार डोरंडा ट्रेजरी से बड़े पैमाने पर अवैध निकासी हुई थी, उसी तरह अब झारखंड के कई जिलों में पुलिस विभाग के जरिए करोड़ों रुपये की निकासी के मामले सामने आ रहे हैं।

यह तुलना सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरचना में संभावित व्यवस्थित विफलता की ओर भी इशारा करती है।

5 जिलों में फैला घोटाला, शुरुआती आंकड़ा ही 35 करोड़ पार

पत्र के अनुसार बोकारो, हजारीबाग, साहिबगंज, गढ़वा और पलामू जिलों में इस घोटाले की पुष्टि हो चुकी है। शुरुआती स्तर पर ही 35 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी के संकेत मिले हैं।

सबसे अहम बात यह है कि यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि मामला अभी शुरुआती खुलासों तक सीमित है और वास्तविक घोटाले का आकार इससे कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।

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‘एक आरोपी’ की थ्योरी पर सवाल, नेटवर्क की आशंका

बोकारो में गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडेय को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, लेकिन पत्र में इस थ्योरी को सिरे से खारिज किया गया है।

ई-कुबेर सिस्टम में छेड़छाड़, जन्मतिथि में बदलाव और करोड़ों की निकासी जैसे जटिल तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों को एक व्यक्ति द्वारा अंजाम देना असंभव बताया गया है। इससे संकेत मिलता है कि यह एक संगठित रैकेट है जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत हो सकती है।

63 बार ट्रांजैक्शन, सिस्टम पूरी तरह फेल?

सबसे गंभीर उदाहरण बोकारो से जुड़ा है, जहां उपेंद्र सिंह के नाम पर वेतन की राशि 63 बार एक अन्य खाते में ट्रांसफर होती रही, लेकिन पूरे पुलिस महकमे को इसकी जानकारी नहीं हुई।

यह न केवल निगरानी तंत्र की विफलता है, बल्कि संभावित “संरक्षित भ्रष्टाचार” (Protected Corruption Model) की ओर भी संकेत करता है।

अधिकारियों की भूमिका पर सीधे सवाल

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी को कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रशस्ति पत्र दिए गए थे। इसमें पूर्व डीजीपी, एसपी और डीआईजी स्तर के अधिकारी शामिल बताए गए हैं।

यह तथ्य इस मामले को और गंभीर बनाता है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि आरोपी को न केवल संरक्षण मिला बल्कि उसे संस्थागत मान्यता भी दी गई।

राशि लगातार बढ़ रही, ‘महाघोटाले’ की आशंका

बोकारो में 3.5 करोड़ से शुरू हुआ मामला 6 करोड़ तक पहुंच चुका है, जबकि हजारीबाग में यह आंकड़ा 28 करोड़ रुपये तक जा चुका है।

यदि पूरे राज्य में फैले पैटर्न को देखा जाए, तो यह घोटाला हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है—ऐसी आशंका पत्र में जताई गई है।

सिस्टम में खामी या सुनियोजित लूट?

पत्र में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी उठाया गया है कि ट्रेजरी से निकासी की जिम्मेदारी जिला स्तर पर डीएसपी और एसपी के पास होती है। ऐसे में उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी बताई गई है।

साथ ही JAP-IT की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि तकनीकी स्तर पर किस तरह की हेराफेरी की गई।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य में पहले भी ऊर्जा विभाग (100 करोड़), पर्यटन विभाग (10 करोड़) और पेयजल विभाग (23 करोड़) से अवैध निकासी के मामले सामने आ चुके हैं।

इससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक लंबे समय से सक्रिय संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

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जांच पर सवाल, CBI या न्यायिक निगरानी की मांग

मरांडी ने साफ कहा है कि जब खुद पुलिस विभाग के अधिकारी संदेह के घेरे में हों, तब उसी विभाग से जांच कराना निष्पक्ष नहीं माना जा सकता।

उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराई जाए या फिर झारखंड हाईकोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच हो।

राजनीतिक असर: सरकार बनाम सिस्टम

यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी परीक्षण बन चुका है। यदि जांच उच्च स्तर तक पहुंचती है, तो इसका असर झारखंड की राजनीति, प्रशासनिक ढांचे और आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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