Jan Man Explainer : ओडिशा और झारखंड के अलग होने के बाद, क्या बिहार एक बार फिर बंटवारे की राह पर है? राजनीति में अक्सर जो दिखता है, वह होता नहीं… और जो होने वाला होता है, उसकी भनक बहुत बाद में लगती है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सीमांचल दौरा, सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल की बिहार के नए राज्यपाल के रूप में अचानक नियुक्ति, बंगाल को लोक भवन में आईबी (IB) के पूर्व अफसर की ताजपोशी और इन सबके बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अचानक कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जाने का ऐलान – ये तमाम घटनाएं सिर्फ इत्तेफाक नहीं हो सकतीं।
भले ही केंद्र सरकार सीमांचल को अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाने की खबरों को ‘अफवाह’ करार दे रही हो, लेकिन सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि बिहार और बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की रणनीतिक बिसात बिछाई जा रही है। आइए, ‘जन-मन की बात’ के इस खास एक्सप्लेनर में इस पूरी थ्योरी का विश्लेषण करते हैं।
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सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की चर्चा क्यों उठी?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 25 से 27 फरवरी के बीच हुई, जब गृह मंत्री अमित शाह सीमांचल के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने बॉर्डर सुरक्षा की एक बेहद अहम समीक्षा बैठक की। इस दौरे के तुरंत बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई:
- एआईएमआईएम (AIMIM) का दावा: 28 फरवरी को AIMIM विधायक तौसिफ आलम ने बयान दिया कि केंद्र सरकार सीमांचल और बंगाल के कुछ हिस्सों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने जा रही है।
- पप्पू यादव का ट्वीट: 6 मार्च को पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि बीजेपी पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाकर और बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कराकर सीमांचल, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने का खेल कर रही है।
केंद्र सरकार का जवाब: इन बढ़ती चर्चाओं के बीच 7 मार्च को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई योजना नहीं है। उन्होंने पूर्णिया सांसद के दावों को तथ्यहीन और भ्रामक अफवाह बताया।

नया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाने का नियम क्या है?
संविधान के अनुच्छेद-3 (Article 3) के तहत किसी भी नए राज्य के गठन या सीमाओं में बदलाव का पूरा अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
- इसके लिए पहले प्रभावित राज्य की विधानसभा से नए राज्य के गठन का प्रस्ताव पास कराया जाता है और राष्ट्रपति को भेजा जाता है।
- फिर गृह मंत्री संसद में नए राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के गठन का प्रस्ताव (Bill) पेश करते हैं।
- इसी बिल में नए राज्य के जिले, विधानसभा और लोकसभा सीटों का पूरा खाका तय होता है।
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केंद्र शासित प्रदेश क्यों बनाए जाते हैं? आमतौर पर छोटे आकार, कम जनसंख्या या अलग संस्कृति वाले क्षेत्रों को UT बनाया जाता है। लेकिन कई बार राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक कारणों (जैसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) से भी किसी संवेदनशील इलाके को सीधे केंद्र के नियंत्रण में लिया जाता है।
सीमांचल ही क्यों? ‘चिकन नेक’ और राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल
अगर सीमांचल को यूटी बनाने की बात महज अफवाह भी है, तो यह अफवाह इसी इलाके को लेकर क्यों उड़ी? इसके पीछे ठोस भौगोलिक और रणनीतिक कारण हैं:
- ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की संवेदनशीलता: सीमांचल (अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया) नेपाल और बांग्लादेश की सीमा से सटा है। यह इलाका ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ के बेहद करीब है, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। यह महज 22 किलोमीटर चौड़ी पट्टी है जो पूरे पूर्वोत्तर भारत (North-East) को देश के बाकी हिस्से से जोड़ती है।
- घुसपैठ और डेमोग्राफिक बदलाव: हाल के वर्षों में नेपाल और बांग्लादेश में भारत विरोधी ताकतों के मजबूत होने से इस सीमा पर घुसपैठ का खतरा बढ़ा है। 2019 में देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद शरजील इमाम ने इसी ‘चिकन नेक’ को ब्लॉक करके असम को भारत से काटने की धमकी दी थी।
- आर्थिक पिछड़ापन: सीमांचल बिहार का सबसे पिछड़ा इलाका है। यहाँ की साक्षरता दर (51-55%) राज्य के औसत से 20% कम है, और प्रति व्यक्ति आय भी बहुत निचले स्तर पर है।
नीतीश कुमार की विदाई और नए राज्यपालों की ‘स्ट्रैटेजिक’ नियुक्ति
इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू 5 मार्च को सामने आया। एक ही दिन में तीन बड़ी घटनाएं हुईं:
- बिहार में सेना के जनरल की एंट्री: केंद्र ने बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को हटाकर सेना से रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को नया राज्यपाल नियुक्त किया। जनरल हसनैन ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा को लेकर अपनी रणनीतिक समझ के लिए जाने जाते हैं।
- बंगाल में IB के पूर्व अफसर: पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) से जुड़े पूर्व अफसर आरएन रवि को कमान सौंपी गई।
- नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना: इसी दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना पद छोड़कर राज्यसभा जाने का नामांकन किया।
क्या है इसके पीछे की राजनीति? औपचारिक तौर पर नीतीश कुमार ने इसे अपनी पुरानी इच्छा बताया। लेकिन अंदरखाने की खबर यह है कि अमित शाह के दौरे में यह फीडबैक मिला था कि बिहार सरकार पूरी तरह से ‘अफसरशाही’ (Bureaucracy) के चंगुल में है। जब सीमा पार से राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा मंडरा रहा हो, तो इतने संवेदनशील इलाके को सिर्फ नौकरशाहों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। नीतीश कुमार के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए, उन्हें सम्मानजनक तरीके से केंद्र में लाया गया और सीमाई राज्यों की कमान राष्ट्रीय सुरक्षा के जानकारों (पूर्व सैन्य और खुफिया अधिकारियों) के हाथों में सौंप दी गई।
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निष्कर्ष
राजनीति की बिसात पर मोहरे जिस तेजी से बदले गए हैं, वह स्पष्ट संकेत है कि ‘चिकन नेक’ और सीमांचल की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर आ गई है। भले ही आज सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की बात कागजों पर न हो, लेकिन आने वाले समय में इस इलाके के प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर सीमांचल को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बना देना चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें।