कटक के SCB मेडिकल कॉलेज में ICU में आग, 10 मरीजों की मौत, शॉर्ट सर्किट की आशंका

Anand Kumar
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Cuttack : ओडिशा के कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के ट्रॉमा केयर ICU में सोमवार तड़के लगी आग में 10 मरीजों की मौत हो गई। हादसा रात करीब 2:30 बजे हुआ, जब अस्पताल की पहली मंजिल पर बने ICU से अचानक धुआं और आग की लपटें उठने लगीं।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार आग लगते ही वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। उस समय ट्रॉमा ICU, उससे सटे ICU और पास के वार्ड में कुल 23 मरीज भर्ती थे। अस्पताल कर्मियों और सुरक्षा गार्डों ने तत्काल मरीजों को बाहर निकालना शुरू किया।

दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने के लिए तीन फायर टेंडर लगाए गए। काफी देर की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।


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ICU से मरीजों को शिफ्ट किया गया

एहतियात के तौर पर ICU में भर्ती सभी मरीजों को अस्पताल के अन्य वार्डों और न्यू मेडिसिन ICU में शिफ्ट किया गया।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के अनुसार आग की चपेट में आने से सात मरीजों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य मरीजों को शिफ्ट किए जाने के बाद तीन और मरीजों ने दम तोड़ दिया।


बचाव में जुटे 11 कर्मचारी झुलसे

बचाव कार्य के दौरान अस्पताल के 11 कर्मचारी झुलस गए। सभी का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

अधिकारियों के अनुसार अस्पताल के कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों ने मरीजों को बाहर निकालने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया।


शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और घायलों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार आग बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की न्यायिक जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


मृतकों के परिजनों को 25 लाख की सहायता

राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले मरीजों के परिजनों को 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।

सीएम ने कहा कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार पहले ही कदम उठा रही है और इसके लिए बजट भी बढ़ाया गया है।


मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी

घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य सचिव, कटक के जिला कलेक्टर और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। बचाव कार्य के दौरान अस्पताल के आसपास की मुख्य सड़क को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।


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राष्ट्रपति और विपक्ष ने जताया दुख

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने घटना पर दुख जताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भी घटना को दुखद बताते हुए सरकार से घायलों के लिए बेहतर इलाज सुनिश्चित करने की मांग की।

कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस ने मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है।

अस्पतालों में आग के 4 सबसे बड़े ‘विलेन’:

  1. शॉर्ट सर्किट और इलेक्ट्रिकल ओवरलोड: अस्पतालों में वेंटिलेटर, डायलिसिस मशीन और 24 घंटे चलने वाले AC का भारी लोड होता है। पुरानी वायरिंग इस भार को झेल नहीं पाती और शॉर्ट सर्किट हो जाता है।
  2. ऑक्सीजन सैचुरेशन: अस्पताल के वार्डों में ऑक्सीजन की मात्रा हवा में अधिक होती है। ऑक्सीजन आग बुझाती नहीं, बल्कि उसे ‘विस्फोटक’ बना देती है, जिससे मामूली चिंगारी भी चंद सेकंड में पूरे वार्ड को राख कर देती है।
  3. फायर ऑडिट में लापरवाही: कई छोटे और मंझोले अस्पतालों के पास ‘Fire NOC’ तो होता है, लेकिन उनके उपकरण (Fire Extinguishers) एक्सपायर हो चुके होते हैं या स्टाफ को उन्हें चलाना नहीं आता।
  4. इमरजेंसी एग्जिट का अभाव: अक्सर अस्पतालों में जगह बचाने के चक्कर में इमरजेंसी गेट के सामने बेड लगा दिए जाते हैं या उन्हें ताला मार दिया जाता है। झांसी और दिल्ली के बेबी केयर सेंटर वाले हादसों में यही सबसे बड़ी लापरवाही थी।
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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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