झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित किया है
Jan-Man Report : झारखंड में मानसून की दस्तक और बदलते मौसम के साथ ही एक मूक मगर बेहद जानलेवा खतरा तेजी से पैर पसार रहा है – सर्पदंश (Snakebite)। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़े बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में साल 2022 से अब तक सर्पदंश के 9,438 मामले सामने आ चुके हैं।
- झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित किया है
- झारखंड के सबसे खतरनाक और विषैले सांप (The Big Four)
- इंडियन कोबरा (Indian Cobra / नाग)
- रसेल वाइपर (Russell’s Viper / चंद्रबोड़ा)
- कॉमन क्रैत (Common Krait / करैत)
- सॉ-स्केल्ड वाइपर (Saw-scaled Viper / फुरसा)
- सांप काटने पर तुरंत क्या करें?
- सांप काटने पर न करें ये जानलेवा गलतियां
- सांपों से बचाव के उपाय: घर और खेतों को कैसे सुरक्षित रखें?
- झारखंड सरकार की पहल और मुफ्त इलाज
- जागरूकता ही एकमात्र बचाव है
जहाँ 2022 में मात्र 392 मामले थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 4,078 हो गई और 26 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस साल, यानी अप्रैल 2026 तक ही 561 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार ने सर्पदंश को अधिसूचित रोग (Notified Disease) घोषित कर दिया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा के अनुसार, सभी स्वास्थ्य केंद्रों को राष्ट्रीय सर्पदंश प्रबंधन प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है ताकि साल 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों को आधा (50%) किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि झारखंड में सांपों की 250 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से लगभग 25% विषैली हैं। दुःख की बात यह है कि अधिकांश मौतें सांप के जहर से नहीं, बल्कि अस्पताल पहुंचने में देरी और अंधविश्वास (झाड़-फूंक) के कारण होती हैं।
इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि झारखंड में कौन से सांप सबसे खतरनाक हैं, सांप काटने पर तुरंत क्या करना चाहिए, किन गलतियों से बचना चाहिए और सांपों से अपने घर-परिवार को कैसे सुरक्षित रखें।

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झारखंड के सबसे खतरनाक और विषैले सांप (The Big Four)
झारखंड के जंगलों, पथरीले इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में कई तरह के सांप पाए जाते हैं। हालांकि अधिकांश सांप विषहीन होते हैं, लेकिन मुख्य रूप से चार ऐसे सांप हैं जिन्हें ‘द बिग फोर’ (The Big Four) कहा जाता है। राज्य में होने वाली अधिकांश मौतों के लिए यही जिम्मेदार हैं:
इंडियन कोबरा (Indian Cobra / नाग)
- पहचान : इसे स्थानीय भाषा में ‘गेहुंअन’ या ‘नाग’ कहा जाता है। उत्तेजित होने पर यह अपना बड़ा सा फन फैला लेता है, जिसके पीछे चश्मे जैसा (Spectacle) निशान होता है।
- जहर का प्रकार: न्यूरोटॉक्सिक (Neurotoxic)। यह जहर सीधे इंसान के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर हमला करता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है, आंखें बंद होने लगती हैं और समय पर इलाज न मिलने पर लकवा (Paralysis) या हार्ट फेलियर से मौत हो जाती है।
रसेल वाइपर (Russell’s Viper / चंद्रबोड़ा)
- पहचान: यह सांप भूरे रंग का होता है और इसके शरीर पर छल्लेदार या जंजीर जैसी गोल आकृतियां बनी होती हैं। यह बहुत सुस्त दिखता है, लेकिन खतरा महसूस होने पर कुकर की सीटी जैसी तेज फुफकार मारता है और बिजली की गति से हमला करता है।
- जहर का प्रकार: हीमोटॉक्सिक (Haemotoxic)। यह जहर खून के थक्के जमाने की क्षमता को खत्म कर देता है, जिससे शरीर के आंतरिक अंगों और मसूड़ों या घाव से लगातार खून बहने लगता है। किडनी फेलियर इसका मुख्य लक्षण है।
कॉमन क्रैत (Common Krait / करैत)
- पहचान: यह चमकीले काले या नीले-काले रंग का होता है, जिस पर सफेद रंग की धारियां (पट्टियां) होती हैं। यह सांप अक्सर रात के समय सक्रिय होता है और गर्मी या सुरक्षा के लिए सोते हुए इंसानों के बिस्तर में घुस जाता है।
- जहर का प्रकार: अत्यधिक न्यूरोटॉक्सिक। इसके काटने पर दर्द बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता, जिसके कारण सोते हुए व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि उसे सांप ने काटा है। सुबह व्यक्ति मृत या गंभीर स्थिति में मिलता है।
सॉ-स्केल्ड वाइपर (Saw-scaled Viper / फुरसा)
- पहचान: यह आकार में छोटा (लगभग 1 से 2 फीट) होता है, लेकिन बेहद आक्रामक होता है। जब यह डरता है, तो अपने शरीर के स्केल्स (शल्कों) को आपस में रगड़ता है, जिससे आरी चलने जैसी आवाज आती है।
- जहर का प्रकार: हीमोटॉक्सिक। छोटा होने के बावजूद इसका जहर बेहद घातक होता है और यह ऊतकों (Tissues) को नष्ट कर देता है।

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सांप काटने पर तुरंत क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो घबराने के बजाय सूझबूझ से काम लेना चाहिए। सही समय पर दिया गया प्राथमिक उपचार जान बचा सकता है।
- मरीज को शांत रखें: सांप काटने के बाद डर और पैनिक के कारण मरीज का ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ जाता है, जिससे जहर शरीर में तेजी से फैलता है। मरीज को ढाढस बंधाएं कि हर सांप विषैला नहीं होता और इलाज संभव है।
- अंग को स्थिर रखें: जिस हाथ या पैर में सांप ने काटा है, उसकी मूवमेंट (हिलना-डुलना) पूरी तरह बंद कर दें। आप लकड़ी की पटरी (Splint) या कपड़े की मदद से अंग को बांधकर स्थिर कर सकते हैं, जैसे टूटी हुई हड्डी के लिए किया जाता है।
- गहने और तंग कपड़े उतार दें: सूजन आने से पहले ही मरीज के हाथ की अंगूठी, घड़ी, चूड़ियां, पायल या तंग कपड़े तुरंत उतार दें, अन्यथा सूजन बढ़ने पर ये रक्त संचार को रोक सकते हैं।
- घाव को साफ करें: यदि पानी उपलब्ध हो, तो काटने वाली जगह को साफ पानी और साबुन से हल्के हाथ से धो लें।
- मरीज को बाईं करवट सुलाएं (Recovery Position): यदि अस्पताल ले जाते समय मरीज को उल्टी आए या वह बेहोश होने लगे, तो उसे बाईं करवट पर सुलाएं ताकि उसकी श्वास नली साफ रहे।
- एंटी-स्नेक वेनम (ASV) वाले अस्पताल ले जाएं: बिना एक सेकंड गंवाए मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) या मेडिकल कॉलेज ले जाएं, जहाँ एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध हो।
सांप काटने पर न करें ये जानलेवा गलतियां
ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी के कारण लोग अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो मरीज की मौत का कारण बनती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, “गोल्डन ऑवर” (काटने के बाद का पहला एक घंटा) इन गलतियों में बर्बाद हो जाता है।
- झाड़-फूंक और ओझा-गुनी के चक्कर में न पड़ें: झारखंड के स्वास्थ्य सचिव और विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि अंधविश्वास ही मौतों की सबसे बड़ी वजह है। तंत्र-मंत्र या जड़ी-बूटी से सांप का जहर खत्म नहीं होता।
- टूर्निकेट (कड़ा बंधन) न बांधें: काटने वाली जगह के ऊपर रस्सी, तार या बेल्ट को बहुत कसकर न बांधें। इससे उस अंग में रक्त का थक्का जम सकता है और गैंग्रीन (अंग का सड़ना) हो सकता है, जिससे बाद में वह हाथ या पैर काटना पड़ सकता है।
- घाव पर चीरा (Cut) न लगाएं: ब्लेड या चाकू से घाव को काटने की गलती न करें। इससे इंफेक्शन फैल सकता है और हीमोटॉक्सिक जहर की स्थिति में खून बहना बंद नहीं होगा।
- मुंह से जहर चूसने की कोशिश न करें: फिल्मों की तरह मुंह से जहर चूसने (Sucking) का प्रयास बिल्कुल न करें। जहर चूसने वाले व्यक्ति के मुंह के छालों के जरिए जहर उसके शरीर में भी जा सकता है।
- बर्फ या आग का इस्तेमाल न करें: घाव पर बर्फ न रगड़ें और न ही उसे सेकें। इससे त्वचा की कोशिकाएं पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं।
- मरीज को सोने न दें: विशेषकर करैत या कोबरा के काटने पर मरीज को लगातार जगाए रखें और उससे बात करते रहें।
- दवाइयां या एस्पिरिन न दें: मरीज को खुद से कोई भी दर्द निवारक दवा (Painkillers) या एस्पिरिन न दें, क्योंकि एस्पिरिन खून को और पतला कर सकती है।
सांपों से बचाव के उपाय: घर और खेतों को कैसे सुरक्षित रखें?
सांप कभी भी इंसानों पर जानबूझकर हमला नहीं करते। वे केवल तभी काटते हैं जब अनजाने में उन पर पैर पड़ जाए या वे खुद को असुरक्षित महसूस करें। थोड़ी सी सावधानी बरतकर सर्पदंश से बचा जा सकता है:
घर के आसपास की सफाई
- झाड़ियों और मलबे को हटाएं: घर के आसपास उग आई गाजर घास, ऊंची झाड़ियों और ईंट-पत्थर या लकड़ियों के ढेर को हटा दें। ये सांपों के छिपने के पसंदीदा स्थान हैं।
- चूहों का नियंत्रण: सांप घरों में चूहों का शिकार करने आते हैं। इसलिए घर में अनाज को सुरक्षित रखें और चूहों को पनपने न दें।
- दरारें बंद करें: दीवारों, फर्श या दरवाजों के नीचे की दरारों को सीमेंट से बंद कर दें ताकि रात के समय सांप रेंगकर अंदर न आ सकें।
व्यक्तिगत सावधानियां
- जमीन पर सोने से बचें: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में करैत सांप के काटने के मामले इसलिए ज्यादा हैं क्योंकि लोग जमीन पर सोते हैं। हमेशा मच्छरदानी लगाकर और खाट (पलंग) पर सोएं। मच्छरदानी सांप को बिस्तर में घुसने से रोकती है।
- टॉर्च का प्रयोग करें: रात के समय घर से बाहर निकलते समय हमेशा तेज रोशनी वाली टॉर्च (फ्लैशलाइट) का इस्तेमाल करें।
- खेतों में काम करते समय सावधानी: किसान भाई खेतों में काम करते समय या घास काटते समय लंबे जूते (Gum boots) और मोटे दस्ताने पहनें। झाड़ी में हाथ डालने से पहले उसे लाठी से हिलाकर देख लें।
- जूते पहनते समय जांचें: बाहर रखे जूते या चप्पलों को पहनने से पहले उन्हें उल्टा करके अच्छी तरह झाड़ लें।
झारखंड सरकार की पहल और मुफ्त इलाज
झारखंड स्वास्थ्य विभाग अब सर्पदंश को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सरकार द्वारा उठाए गए कुछ प्रमुख कदम इस प्रकार हैं:
- नि:शुल्क एंटी-स्नेक वेनम (ASV): सरकार ने निर्देश जारी किया है कि राज्य के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और जिला अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम सीरम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहेगा। यह इलाज पूरी तरह मुफ्त है।
- अधिसूचित रोग (Notified Disease): सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित करने से अब हर एक मामले की ट्रैकिंग डिजिटल रूप से होगी, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में दवाइयों की कमी नहीं होने दी जाएगी।
- मुआवजा राशि: झारखंड सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के नियमों के तहत, सर्पदंश से मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को सरकारी प्रावधानों के अनुसार आपदा मुआवजा राशि (वर्तमान में ₹4 लाख) दी जाती है, बशर्ते पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अस्पताल का सर्टिफिकेट मौजूद हो (झाड़-फूंक के मामलों में यह देय नहीं होता)।

जागरूकता ही एकमात्र बचाव है
झारखंड से साल 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों को आधा करने का जो संकल्प स्वास्थ्य विभाग ने लिया है, वह बिना जन-भागीदारी के पूरा नहीं हो सकता। सांप प्रकृति के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और चूहों की आबादी को नियंत्रित कर फसलों की रक्षा करते हैं। हमें सांपों को मारने के बजाय उनसे दूरी बनानी होगी और सतर्क रहना होगा।
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