भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी अगस्त बैठक में रेपो रेट को 5.25% तक रखने का फैसला लिया है, जिसमें, लगातार चौथी बार केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। Mpc ने अपनी न्यूट्रल नीति का रुख बरकरार रखते हुए, इस फैसला को बाजार की उम्मीद के अनुरूप माना जा रहा है।
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह कहा कि देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ाई जा रही है। जैसा कि कच्चे तेल की कीमतों में उतर चढ़ाव, भू राजनीतिक तनाव एवं वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपना है। इससे महंगाई पर लगातार नजर रखी जा रही है एवं आगे के फैसले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर ही लिए जाएंगे।
आरबीआई के वित्तीय वर्ष 2026 27 के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.7% रखा गया है। हालांकि, महंगाई को लेकर भी केंद्रीय बैंक ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जिसमें कहा गया है कि खाद एवं ईंधन की कीमतों सहित वैश्विक कारकों पर नजर रखी जाएगी।
रेपो रेट में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है जिसका मतलब यह भी है कि फिलहाल बैंकों के लिए आरबीआई से कर्ज लेने की लागत पहले जैसी ही रहेगी।