रामगढ़: हाथ में घर की जिम्मेदारियां, सिर पर बच्चों की परवरिश का बोझ और सामने खाकी वर्दी हासिल करने का सपना… रामगढ़ के मैदान में जब कविता देवी 1600 मीटर की दौड़ के लिए उतरीं तो उनकी तस्वीर ने हर किसी का ध्यान खींच लिया। साड़ी पहनकर और नंगे पांव दौड़ती कविता देवी ने करीब 6 मिनट 45 सेकेंड में 1600 मीटर की दौड़ पूरी की।
दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की रहने वाली कविता देवी होमगार्ड बहाली की तैयारी कर रही हैं। पति की बीमारी से मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। दो बच्चों की परवरिश के साथ वह घरेलू कामकाज और मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाती हैं।
सुबह 3 बजे उठकर करती हैं दौड़ की तैयारी
कविता के लिए होमगार्ड की नौकरी सिर्फ रोजगार का जरिया नहीं, बल्कि अपने परिवार को बेहतर जिंदगी देने का सपना है। वह रोज सुबह करीब 3 बजे उठकर गांव के पास मैदान में दौड़ का अभ्यास करती हैं। कई बार उनके बच्चे भी उनके साथ मैदान पहुंचते हैं।
अभ्यास के बाद वह घर के काम निपटाती हैं और फिर मजदूरी के लिए निकल जाती हैं। गांव से ट्रेनिंग सेंटर दूर होने के कारण वह नियमित रूप से वहां नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में गांव के नजदीक मैदान को ही उन्होंने अपनी ट्रेनिंग का मैदान बना लिया है।
साड़ी बनी मजबूरी नहीं, हौसले की पहचान
रामगढ़ में आयोजित 1600 मीटर के ट्रायल में कई महिला अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। कविता भी साड़ी पहनकर मैदान में उतरीं। लेकिन उनकी दौड़ ने लोगों का ध्यान इसलिए खींचा क्योंकि उन्होंने नंगे पांव ही पूरी दूरी तय की।
दौड़ खत्म होने के बाद शरीर थका हुआ था, सांसें तेज थीं, लेकिन चेहरे पर संतोष और आत्मविश्वास साफ नजर आ रहा था। कविता ने करीब 6 मिनट 45 सेकेंड में 1600 मीटर की दूरी पूरी की।
24 अक्टूबर से शुरू होनी है होमगार्ड बहाली
रामगढ़ जिले में 24 अक्टूबर से 5 नवंबर तक होमगार्ड बहाली की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इसके तहत कुल 284 पदों पर भर्ती होनी है। शारीरिक परीक्षा की तैयारी के लिए जिला मैदान में 1600 मीटर दौड़ का ट्रायल कराया गया, जिसमें महिला और पुरुष अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।
महिला अभ्यर्थियों के लिए भर्ती में 50 प्रतिशत सीटों का प्रावधान बताया गया है। वहीं विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान बताया गया है।
कविता देवी की यह दौड़ अभी अंतिम परीक्षा नहीं है। लेकिन यह तस्वीर बताती है कि मुश्किल हालात भी किसी के सपने को रोक नहीं सकते।
साड़ी में नंगे पांव दौड़ती कविता के कदम सिर्फ 1600 मीटर की दूरी तय नहीं कर रहे थे… वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और आत्मनिर्भर बनने के सपने की ओर बढ़ रहे थे।
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