Ranchi : झारखंड के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर प्रिंस खान के नेटवर्क से जुड़े एक अहम खुलासे में सामने आया है कि शूटर उपलब्ध कराने वाले राणा राहुल सिंह को रांची पुलिस की ओर से अलग-अलग समय में सरकारी बॉडीगार्ड मुहैया कराया गया था। इस तथ्य के सामने आने के बाद पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
तीन बार मिला बॉडीगार्ड, गतिविधियों पर नहीं पड़ी नजर
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार पुलिस जांच में सामने आया है कि राणा राहुल सिंह को पहली बार 27 अक्टूबर 2023 को एक वरीय अधिकारी के आदेश पर बॉडीगार्ड दिया गया था। कुछ दिनों बाद सुरक्षा वापस ले ली गई, लेकिन बाद में उसने फिर से दबाव बनाकर जिला बल से सुरक्षा हासिल कर ली।
इसके बाद दूसरी बार भी बॉडीगार्ड वापस लिया गया, हालांकि जुलाई 2025 में उसे तीसरी बार फिर से सुरक्षा मिल गई। फरवरी 2026 में नगर निगम चुनाव से पहले सुरक्षा फिर हटा ली गई।
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शूटर कुबेर से पूछताछ में खुलासा
16 मार्च को धनबाद में गिरफ्तार प्रिंस खान के शूटर कुबेर से पूछताछ के दौरान राणा राहुल सिंह और नामकुम निवासी कौशल पांडे का नाम सामने आया। इसके बाद जांच में राणा की भूमिका को लेकर कई तथ्य सामने आए। पुलिस के अनुसार, राणा रांची में शूटर उपलब्ध कराने का काम करता था और गैंग के लिए सक्रिय रूप से नेटवर्क संचालित कर रहा था।
खतरे का हवाला देकर हासिल की सुरक्षा
जानकारी के मुताबिक, राणा राहुल सिंह ने खुद को व्यवसायी बताते हुए उग्रवादी संगठनों से खतरा होने का हवाला दिया था। उसने धमकी मिलने की शिकायत भी दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर उसे पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई।
दुबई में हुई मुलाकात, नेटवर्क मजबूत
पुलिस के अनुसार, सितंबर 2023 में राणा राहुल सिंह दुबई गया था, जहां उसकी मुलाकात प्रिंस खान से हुई। इस दौरान रंगदारी और शूटर उपलब्ध कराने को लेकर बातचीत हुई थी।
सहयोगियों ने भी किया बॉडीगार्ड का उपयोग
जांच में यह भी सामने आया है कि राणा का सहयोगी कौशल पांडे भी बॉडीगार्ड का इस्तेमाल करता था। वह नामकुम इलाके में सुरक्षा कर्मियों के साथ घूमता था और सोशल मीडिया पर फोटो-वीडियो साझा करता था।
फरार है आरोपी, कर्नाटक में होने की आशंका
फिलहाल राणा राहुल सिंह फरार है। पुलिस को इनपुट मिला है कि वह कर्नाटक भाग गया है। उसकी तलाश में छापेमारी जारी है।
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एसएसपी ने कहा- रिकॉर्ड देखने के बाद ही स्पष्ट होगा मामला
रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी रिकॉर्ड देखने के बाद ही दी जा सकेगी।
पहले भी सामने आई थी चूक
इससे पहले भी प्रिंस खान से जुड़े मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आ चुकी है। वर्ष 2021 में फर्जी नाम से पासपोर्ट बनवाकर विदेश भागने के मामले में सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठे थे।
इनपुट – दैनिक भास्कर