रांची से गरजी कांग्रेस: खड़गे ने उठाए पहलगाम हमले पर सवाल, बोले – मोदी को मिली थी जानकारी, फिर क्यों मारे गए 26 लोग?

Anand Kumar
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मुख्यमंत्री Hemant Soren का नाम भूल गये कांग्रेस अध्यक्ष

Ranchi : रांची के विधानसभा मैदान में मंगलवार को कांग्रेस की “संविधान बचाओ रैली” एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में तीखे तेवर और गंभीर सवालों का मंच बनी। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने न सिर्फ केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए, बल्कि हालिया पहलगाम आतंकी हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया।

इंटेलिजेंस इनपुट था, फिर भी हमला क्यों नहीं रोका गया?

खड़गे ने कहा कि, “22 अप्रैल को हुए हमले के तीन दिन पहले प्रधानमंत्री के पास आतंकी हमले की सूचना थी, इसलिए उन्होंने खुद कश्मीर दौरा रद्द कर दिया। लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया।” खड़गे का यह आरोप सीधे तौर पर सुरक्षा में चूक की ओर इशारा करता है।

उन्होंने सरकार से पूछा, “जब पता था कि हमला हो सकता है, तो 26 निर्दोष लोग क्यों मारे गए? क्या आम लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है?”

संविधान और आरक्षण पर केंद्रित हमला

खड़गे ने आगे कहा, “मोदी सरकार की नीति है कि सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) को बंद कर दो, और पिछड़े वर्ग के लोगों की नौकरियां छीन लो। देश में लाखों वैकेंसी खाली हैं, लेकिन भर्ती नहीं हो रही। क्यों? क्योंकि सरकार गरीबों और आदिवासियों को तंग करना चाहती है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार 50% आरक्षण हटाने की दिशा में काम कर रही है, जबकि उन्होंने खुद इस मुद्दे पर पीएम को चिट्ठी लिखी है।

झारखंड के मुख्यमंत्री का नाम भूल गए खड़गे

हालांकि भाषण के दौरान एक दिलचस्प पल भी सामने आया, जब खड़गे मंच पर झारखंड के मुख्यमंत्री का नाम भूल गए। पीछे खड़े एक नेता से उन्होंने नाम पूछा, लेकिन उसे मंच से दोहराया नहीं।

इसके बावजूद उन्होंने राज्य सरकार का समर्थन करते हुए कहा, “एक आदिवासी मुख्यमंत्री को जेल भेजकर केंद्र सरकार हँसती है, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मोदी सरकार आदिवासियों और गरीबों को डराने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम डरने वाले नहीं।”

कांग्रेस नेताओं के तीखे बयान

रैली में अलका लंबा, प्रदीप यादव और भूपेश बघेल समेत कई कांग्रेस नेताओं ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया:

  • अलका लंबा: “आतंकी हमले के बावजूद केंद्र गंभीर नहीं है। एक ओर लोग मारे जा रहे हैं, दूसरी ओर सरकार जातीय जनगणना की घोषणा कर रही है।”
  • प्रदीप यादव: “बीजेपी को अब चेत जाना चाहिए। संविधान के अनुसार ही देश चलेगा।”
  • भूपेश बघेल: “छत्तीसगढ़ और झारखंड की आत्मा एक है। आज जोहार की गूंज दिल्ली तक सुनाई देनी चाहिए।”

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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