“पैसा दिला दीजिए, नहीं तो हम मर जाएंगे” – पांच माह से मानदेय नहीं मिलने पर MGM अस्पताल में फूट-फूटकर रोई महिला होमगार्ड

Anand Kumar
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कमांडेट ने जारी की चिट्ठी, सरयू राय के हस्तक्षेप पर स्वास्थ्य मंत्री का आश्वासन

जमशेदपुर: एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शनिवार को एक बेहद भावुक और चिंताजनक घटना सामने आई। अस्पताल में तैनात एक आदिवासी महिला होमगार्ड जवान पांच माह से बकाया मानदेय नहीं मिलने से इस कदर टूट गई कि ड्यूटी के दौरान ही फूट-फूटकर रोने लगी। उन्होंने अधिकारियों और साथियों से गुहार लगाते हुए कहा, “हमको पैसा दिला दीजिए, नहीं तो हम मर जाएंगे।” महिला ने यह तक कह दिया कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वह अस्पताल की छत से कूदकर आत्महत्या कर लेगी।

अगले सप्ताह भी भुगतान नहीं होने की सूचना से टूटी हिम्मत

जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब नौ बजे महिला को यह पता चला कि अगले सप्ताह भी बकाया मानदेय मिलने की कोई संभावना नहीं है। यह सुनते ही वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गई और अस्पताल परिसर में ही रोने लगी। घटना की जानकारी मिलते ही अन्य होमगार्ड जवान मौके पर पहुंचे और उन्हें पूछताछ केंद्र में बैठाकर काफी देर तक समझाते रहे। इस दौरान कई जवान भी भावुक हो गए।

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गंभीर बीमारी से जूझ रही महिला, ऑपरेशन के लिए भी नहीं हैं पैसे

बोड़ाम थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला ने बताया कि वह पिछले लगभग छह माह से रीढ़ के पास असहनीय दर्द से पीड़ित हैं। एमजीएम अस्पताल सहित कई सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के बाद भी राहत नहीं मिली, जिसके बाद वह पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में इलाज करा रही हैं। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण इलाज संभव नहीं हो पा रहा है।

महिला ने बताया कि जब उन्होंने पति से इलाज के लिए पैसे मांगे तो जवाब मिला, “हमारे पास पैसे कहां हैं, तुम अपने मानदेय के पैसे से इलाज करा लो।” यह सुनकर वह पूरी तरह मानसिक रूप से टूट गईं।

एक सप्ताह पहले भी हो चुकी है आत्महत्या की कोशिश

यह पहला मामला नहीं है। करीब एक सप्ताह पहले भी एमजीएम अस्पताल में कार्यरत एक अन्य आदिवासी महिला होमगार्ड ने मानसिक तनाव में फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया था। उपचार के बाद वह अब दोबारा ड्यूटी पर लौट चुकी हैं।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने होमगार्ड जवानों की आर्थिक और मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिला कमांडेंट का बड़ा फैसला, इच्छुक जवानों को दूसरे संस्थानों में मिलेगी ड्यूटी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम जिला होमगार्ड कमांडेंट ने एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक और एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को पत्र लिखकर कहा है कि लंबे समय से कर्तव्य भत्ता का भुगतान नहीं होने से गृह रक्षक आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं।

पत्र में कहा गया है कि जिन संस्थानों में नियमित रूप से कर्तव्य भत्ता का भुगतान हो रहा है, वहां इच्छुक होमगार्ड जवानों की प्रतिनियुक्ति की जा सकती है। एमजीएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में तैनात इच्छुक गृह रक्षकों को जिला कार्यालय से दूसरे संस्थानों में ड्यूटी के लिए कमान पत्र लेने को कहा गया है।

सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री से की बात, जल्द भुगतान का आश्वासन

इधर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि एमजीएम अस्पताल में कार्यरत होमगार्ड जवानों और आउटसोर्सिंग कर्मियों के लंबित मानदेय और वेतन का भुगतान शीघ्र कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से बातचीत हुई है। स्वास्थ्य मंत्री ने बकाया भुगतान जल्द कराने तथा अस्पताल में पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।

सरयू राय ने बताया कि पिछले दो दिनों से वह एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्वास्थ्य मंत्री अपना आश्वासन जल्द पूरा करेंगे।

आर्थिक संकट बना मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा

एमजीएम अस्पताल में लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण होमगार्ड जवान गहरे आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं। यदि समय रहते भुगतान नहीं हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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