रांची। झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी छात्र आंदोलन के 12वें दिन एक ओर राज्य सरकार ने वार्ता की पहल की, वहीं दूसरी ओर विधायक दल की बैठक के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के जरिए छात्रों को बातचीत का न्योता भेजा, लेकिन छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास जाकर वार्ता करने से इनकार करते हुए पहले अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन की शर्त रख दी।
सरकार ने भेजा वार्ता का प्रस्ताव
बुधवार को एसडीएम और एडीएम आंदोलन स्थल पहुंचे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से छात्र प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री आवास पर बैठक का निमंत्रण दिया। प्रशासन ने कहा कि बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी और सीमित संख्या में छात्र प्रतिनिधियों को बैठक के लिए आमंत्रित किया गया।
लेकिन आंदोलनकारी छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी एक संगठन या कुछ प्रतिनिधियों का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के प्रतियोगी छात्रों की सामूहिक आवाज है। ऐसे में कुछ लोगों के साथ बैठक कर पूरे आंदोलन का निर्णय लेना उचित नहीं होगा।
‘मुख्यमंत्री खुद धरनास्थल आएं’
छात्रों ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचकर सभी आंदोलनकारियों से खुली बातचीत करें। उनका मानना है कि इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और सभी छात्रों का भरोसा भी कायम रहेगा।
आंदोलनकारी छात्र राकेश कुमार ने कहा कि वे केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि अपनी मांगों पर सरकार की स्पष्ट और लिखित प्रतिबद्धता चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों को स्वीकार करने के लिए तैयार है तो पहले इसका लिखित मसौदा दिया जाए। इसके बाद ही छात्र प्रतिनिधि औपचारिक वार्ता में शामिल होंगे।
छात्रों का कहना है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
विधायक दल की बैठक के बाद सियासत तेज
इधर, छात्र आंदोलन और अन्य मुद्दों को लेकर आयोजित विधायक दल की बैठक के बाद सत्ता पक्ष के नेताओं ने भी सरकार का पक्ष रखा।
‘जरूरत पड़ी तो सीएम हाउस में भी होगी रेड’ : अनूप सिंह
कांग्रेस विधायक अनूप सिंह (जयमंगल सिंह) ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भ्रष्टाचार और किसी भी तरह की गड़बड़ी को लेकर पूरी तरह सख्त हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जांच के दौरान आवश्यकता पड़ी तो मुख्यमंत्री आवास में भी जांच या छापेमारी से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में चाहे सरकार के भीतर के लोग हों या बाहर के, दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
सरकार ने बनाई निगरानी समिति
छात्र आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखने के लिए सरकार ने एक विशेष प्रतिनिधिमंडल गठित किया है। इसमें सत्ता पक्ष के विभिन्न घटक दलों के विधायक शामिल रहेंगे। सरकार का कहना है कि यह समिति आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम पर लगातार नजर रखेगी।
‘कमेटी वार्ता के लिए नहीं, निगरानी के लिए’ : राधाकृष्ण किशोर
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने समिति की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य छात्रों से सीधे वार्ता करना नहीं, बल्कि पूरे आंदोलन की निगरानी करना है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी मंशा छात्रों तक पहुंचा चुकी है और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाधान के लिए दोनों पक्षों को लचीला रुख अपनाना होगा। उनके शब्दों में, “संभव है कि छात्रों को दो कदम पीछे हटना पड़े और सरकार को भी दो कदम आगे बढ़ना पड़े।”
फिलहाल वार्ता को लेकर गतिरोध बना हुआ है। एक ओर सरकार बातचीत के जरिए समाधान चाहती है, वहीं छात्र पहले लिखित आश्वासन और ठोस निर्णय की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।