झारखंड सरकार ने जल संरक्षण एवं सिंचाई क्षमता बढ़ाने को लेकर बड़ा रोडमैप तैयार करने का फैसला किया है झारखंड सरकार ने केंद्र से विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए करीब तीन हजार करोड़ रुपये की आर्थिक मदद भी मांगी है, जिस मुद्दे को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित दो दिवसीय जल जीवन मिशन के समापन सत्र में उठाया गया।
समिट में झारखंड के जल संसाधन मंत्री हफिजुल हसन और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद शामिल हुए थे। जल संसाधन मंत्री ने यह बताया है कि झारखंड का करीब तीस प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है एवं राज्य का अधिकांश भू-भाग पठारी है। ऐसे में, बारिश के पानी को रोकना और उसका बेहतर इस्तेमाल करना बेहद जरूरी बताया है।
मंत्री हफिजुल हसन के अनुसार झारखंड में होने वाले करीब अस्सी प्रतिशत बारिश का पानी बहकर निकल जाती है, जिससे, सरकार अब इस पानी को संरक्षित कर साल भर उपयोग में लाने की दिशा में काम करेगी जिसके लिए जल संरक्षण के साथ-साथ सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। झारखंड में करीब 24.25 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित किए जाने की संभावना भी है लेकिन फिलहाल लगभग दस लाख हेक्टेयर क्षमता ही विकसित हो पाई है